छोटे पर्दे पर धार्मिक सीरियल्स की धूम (Mythology based shows rule small screen)

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सीरियल्स में दर्शकों को कब, क्या पसंद आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. कभी सास-बहू का कॉन्सेप्ट हिट रहता है, तो कभी परंपरागत क़िस्से-कहानियां. लेकिन इन सबके साथ इन दिनों हर चैनल्स पर धार्मिक सीरियल्स की धूम मची हुई है. आइए, इस पर एक नज़र डालते हैं.

 

एक वक़्त था, जब टीवी पर सीरियल्स हिट होने का पैमाना धार्मिक सीरियल्स को माना जाता था, जैसे- रामायण, महाभारत, श्रीकृष्ण, ओम नमः शिवाय, जय हनुमान, माता की चौकी आदि. निर्माता-निर्देशक भी इस बात से आश्‍वस्त रहते थे कि पौराणिक कथाओं पर बने धारावाहिक दर्शकों को पसंद ज़रूर आएंगे. इन विषयों पर उस समय रामानंद सागर, बी. आर. चोपड़ा, धीरज कुमार जैसे फिल्ममेकर्स का दबदबा था. लेकिन धीरे-धीरे छोटे पर्दे का रंग-रूप बदलने लगा. फैमिली ड्रामा का दौर धार्मिक-पौराणिक कथाओं से हटकर फैमिली ड्रामा अधिक पसंद किया जाने लगा. फिर एक ऐसा दौर आया कि रोमांटिक, सास-बहू, पारिवारिक सीरियल्स का ख़ुमार दर्शकों पर छाने लगा. इसमें एकता कपूर के सीरियल्स की ख़ास भूमिका रही, जहां पर सास-बहू ड्रामा, रोना-धोना, प्रेम त्रिकोण, ईर्ष्या-प्रतिशोध से भरी विलेन महिलाओं की झड़ी-सी लग गई. इमोशनल अत्याचार का यह सिलसिला क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर-घर की, कसौटी ज़िंदगी की से लेकर ये रिश्ता क्या कहलाता है, दीया और बाती हम, बालिका वधू आदि धारावाहिकों के ज़रिए बदस्तूर जारी रहा.
एक बार फिर वक़्त व लोगों की पसंद ने करवट बदली. अब हम लव व फैमिली स्टोरी, जिसमें एक्शन, ड्रामा, डांस, सॉन्ग सब कुछ होता है, से लेकर मायथोलॉजिकल्स यानी पौराणिक कथाओं पर आधारित सीरियल्स की वापसी को भी देखते हैं.
जब लंबे अंतराल के बाद दूरदर्शन ने फिर से धारावाहिक संकट मोचन हनुमान लेकर आए थे, जिसमें महाभारत में द्रोणाचार्य की यादगार भूमिका निभानेवाले सुरेंद्र पाल सूत्रधार (पंडित) की भूमिका में थे. लोगों ने इसे ख़ूब पसंद किया था. इसमें हनुमानजी के पूर्वजन्म से लेकर बचपन, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था व कई कालों व युग-युगान्तर की महिमा की कथाएं दिखाई गई थीं. वहीं कलर्स पर दिखाए गए जय जग जननी मां दुर्गा में मां दुर्गा के जन्म से लेकर उनके तमाम अवतारों की कथाओं का चित्रण किया गया था. साथ ही इस सीरियल में नारी शक्ति के संदेश को भी ख़ूबसूरती से प्रसारित किया गया था. ऐसा भव्य पौराणिक धारावाहिक टीवी के स्क्रीन पर पहली देखा गया. दर्शकों ने पहली बार महिषासुरमर्दिनी, गौरी, चामुंडा, भवानी या काली दुर्गा आदि अवतारों को देखा. किस प्रकार देवी दुर्गा तीनों देव- ब्रह्मा, विष्णु व महेश का सृजन करती हैं, इसमें यह भी दिलचस्प ढंग से दिखाया गया था.

पौराणिक कथाओं की बहार

आज हर चैनल पर धार्मिक सीरियल्स की बाढ़-सी आ गई है. और मज़ेदार बात यह है कि इन सभी को दर्शक पसंद भी ख़ूब कर रहे हैं. सिया के राम, सूर्यपुत्र कर्ण, जय संतोषी मां, संकट मोचन महाबली हनुमान आदि धारावाहिक इसके उदाहरण हैं.
सूर्यपुत्र कर्ण सीरियल में सूत पुत्र कहलाने जाने से लेकर एक योद्धा बनने तक की कर्ण की अनूठी यात्रा है. बेहतरीन परफॉर्मेंस, उत्कृष्ट विज़ुअल्स व दिलचस्प कहानी इस शो को अन्य धार्मिक सीरियल्स से अलग कर देती है.
सिया के राम धारावाहिक का दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें मिथिला की सीता के दृष्टिकोण से कहानी कही गई है. इसके निर्माता-निर्देशक निखिल सिन्हा के अनुसार, जब भी पौराणिक कहानियों पर कुछ बनाया जाता है, तब हम वो ही लेते हैं, जो लिखा होता है. वक़्त बदल रहा है, आज का युवा वर्ग भी काफ़ी समझदार है. वो पौराणिक कथाओं से जुड़े क़िरदारों, क्यों व कैसे के बारे में जानना चाहता है. इसलिए आज की संस्कृति को देखते हुए सीता के व्यक्तित्व को समझने की काफ़ी ज़रूरत है. बहुत कम लोग जानते हैं कि सीता बेहद मज़बूत शख़्सियत थीं.

सीरियल्स का प्रभाव

भारतीय लोगों की ईश्‍वर व ग्रंथ-पुराणों में अटूट आस्था से इंकार नहीं किया जा सकता. यही धार्मिक जुड़ाव इस तरह के धारावाहिकों के सफल होने का कारण भी बनते हैं. इतिहास गवाह है कि पौराणिक सीरियल्स ने दर्शकों को हमेशा प्रभावित किया है. हम कैसे भूल सकते हैं उस दौर को जब रामायण, महाभारत जैसे धारावाहिक को रविवार की सुबह देखने के लिए हर वर्ग के लोग टीवी के सामने बैठ जाते थे. उस समय सड़कें-गलियां सुनसान-सी हो जाती थीं. आज के इस आधुनिक दौर में भले ही प्राइवेट एंटरटेनमेंट चैनल्स ख़ूब चल रहे हों, पर धार्मिक व पौराणिक धारावाहिकों के प्रसारण में दूरदर्शन का दबदबा हमेशा ही रहा है. समय-समय पर देश के लगभग सभी बड़े प्राइवेट एंटरटेनमेंट चैनल्स, मसलन- स्टार प्लस, ज़ी टीवी, सोनी, सहारा वन, कलर्स आदि ने पौराणिक व धार्मिक धारावाहिकों का निर्माण किया, पर वह दूरदर्शन पर लंबे अर्से पहले प्रसारित हुए धारावाहिकों रामायण, महाभारत, ओम नमः शिवाय, जय हनुमान की लोकप्रियता को कभी भी दोहरा नहीं पाए.

आज पौराणिक, ऐतिहासिक व मिथक के चरित्र टीवी के दर्शकों को काफ़ी पसंद आ रहे हैं. हर चैनल धार्मिक विषयों पर सीरियल्स बनाकर फ़ायदा उठा रहे हैं. लेकिन धार्मिक ग्रंथ-पुराण और इससे जुड़े विषयों पर सीरियल बनाना अच्छी बात है, पर हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर की यह ज़िम्मेदारी भी बन जाती है कि वो विषय व तथ्यों के साथ पूरा न्याय करें, वरना विवादों को उठते देर नहीं लगती.

– महाभारत में धृतराष्ट्र का क़िरदार निभानेवाले ठाकुर अनूप सिंह ने मिस्टर वर्ल्ड 2015 का ख़िताब जीता.
– अफगानिस्तान में एक टाइम वेल है, जिसमें 12 फीट का एक विमान फंसा हुआ है. यह वही विमान है, जिसका ज़िक्र हिंदू धार्मिक ग्रंथों व पौराणिक कथाओं में मिलता है.
– रामायण, महाभारत, लव-कुश सीरियल्स के अलावा लव-कुश फिल्म में भी हनुमान का क़िरदार दारा सिंह ने निभाया था.

– ऊषा गुप्ता