इन 9 पोषक तत्वों की कमी से हो सकता है डिप्रेशन ( Nutritional Deficiencies That May Cause Depression)

पोषण रहित खाना (Nutritional Deficiencies) न स़िर्फ हमारे शरीर के लिए नुक़सानदायक है, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है. हमारे मस्तिष्क को नियमित रूप से पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है, जो जंक फूड से नहीं मिल सकते. कहने का अर्थ यह है कि यदि आपको डिप्रेशन से बाहर आना है तो दवाओं के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर आहार भी ग्रहण करना होगा.

Nutritional Deficiencies

मस्तिष्क के लिए कितना ज़रूरी है पौष्टिक भोजन?
नोराड्रेनालाइन, सेरोटोनिन और डोपामाइन नामक तीन न्यूरोट्रांसमीटर्स हमारे मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन
न्यूरोट्रान्समीटर्स के उत्पादन व उनके सही तरी़के से काम करने में विटामिन्स और मिनरल्स की अहम् भूमिका होती है. आहार में पोषक तत्वों की कमी होने पर मानसिक सेहत के बिगड़ने का ख़तरा बढ़ जाता है. जानिए, दिमाग़ को स्वस्थ रखने के लिए किन पोषक तत्वों का सेवन ज़रूरी है.

ओमेगा3 फैट्स
ओमेगा3 फैट डीएचए मस्तिष्क की कोशिकाओं की बनावट में बहुत ज़रूरी होता है. अगर आपके आहार में इसकी कमी होगी, तो ट्रांसफैट्स जैसे दूसरे नुकसानदायक फैट्स इसकी जगह ले लेगें, जिसके कारण परेशानी हो सकती है. ट्रांसफैट के कारण पेट में जलन होती है, साथ ही डिप्रेशन का ख़तरा भी बढ़ता है.
एक अन्य ओमेगा3 फैट ईपीए न्यूरॉन्स की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है और साथ ही जलन और सूजन भी घटाता है. अलसी, अखरोट, सैल्मन व मार्केल मछली, कैनोला ऑयल, कॉड लिवर ऑयल, ऑयस्टर, सोयाबीन्स इत्यादि ओमेगा3 फैटी एसिड्स के प्रमुख स्रोत हैं.

आयोडीन
इसे आप नया विटामिन डी कह सकते हैं. यह थायरॉइड को स्वस्थ रखने के लिए अति आवश्यक है, जो मेटाबॉलिज़्म के लिए ज़रूरी है. हममें से ज़्यादातर लोग पर्याप्त मात्रा में आयोडीन ग्रहण नहीं करते, क्योंकि हमने अपने आहार में इसकी मात्रा घटा दी है. आयोडीन का औसतन सेवन 800 एमजी प्रतिदिन से घटकर 138-350 एमजी प्रतिदिन हो गया है. आपको बता दें कि थोड़ा-बहुत आयोडीन ग्रहण करने से शरीर में इनकी कमी नहीं होगी, लेकिन मस्तिष्क के सही तरी़के से कार्य करने के लिए पर्याप्त मात्रा में आयोडीन ग्रहण करना बहुत ज़रूरी है. सीवीड, कॉड और आयोडाइज़्ड नमक आयोडीन के बेहतरीन स्रोत हैं. इसके अलावा दूध, दही और अंडे में भी आयोडीन पाया जाता है.

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ज़िंक
यह पोषक तत्व न्यूरोट्रान्समीटर्स के उत्पादन और उनके सही क्रियान्वयन के लिए बेहद ज़रूरी है. इसके अलावा ज़िंक स्वस्थ पाचनतंत्र व बेहतरीन रोग-प्रतिरोधक प्रणाली के लिए ज़रूरी है. स्वस्थ पाचन तंत्र मानसिक स्वास्थ्य को सेहतमंद रखने में मदद करता है, क्योंकि 90 फ़ीसदी सेरोटोनिन और 50 फ़ीसदी डोपामाइन का उत्पादन छोटी आंत में होता है. ऑयस्टर, क्रैब, बीफ, लैंब, पोर्क, चिकन, काजू इत्यादि में भरपूर मात्रा में ज़िंक पाया जाता है.

मैग्नीशियम
ज़िंक की तरह ही 300 से अधिक बायोकेमिकल रिएक्शन्स के लिए मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है. इसके अलावा यह हड्डियों व दांतों को स्वस्थ रखने, एंज़ायटी कम करने, ब्लड प्रेशर घटाने के साथ-साथ डायबिटीज़ के ख़तरे को भी कम करता है. मैग्नीशियम उन एंज़ाइम्स को सक्रिय करने में मदद करता है, जो सेरोटोनिन, डोपामाइन और नेराड्रेनालाइन के उत्पादन के लिए ज़रूरी है. हममें से ज़्यादातर लोग रोज़ाना के लिए ज़रूरी मैग्नीशियम से कम मैग्नीशियम ग्रहण करते हैं. मैग्नीशियम प्रमुख रूप से मेवों, गाढ़े रंग की हरी सब्ज़ियों, साबूत अनाज और डार्क चॉकलेट में पाया जाता है. मैग्नीशियम की आवश्यकता पूरी करने के लिए सप्लीमेंट का सेवन भी किया जा सकता है.

विटामिन डी
हममें से अधिकतर लोग पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं लेते. आपको बता दें कि मस्तिष्क के लिए विटामिन डी बहुत ज़रूरी है. विटामिन डी की कमी से न स़िर्फ डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है, बल्कि एंज़ायटी, डिमेंशिया की समस्या भी होती है. सूरज की किरणों के अलावा सैल्मन, मार्केल और ट्राउट मछली विटामिन डी के
बेहतरीन स्रोत हैं.

सेलेनियम
थायरॉइड के सही तरी़के से काम करने के लिए आयोडीन के साथ-साथ सेलेनियम भी बेहद ज़रूरी है. खाने में सेलेनियम की मात्रा बढ़ाकर थायरॉइड हार्मोन से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है. सेहतमंद थायरॉइड डिप्रेशन के ख़तरे को कम करता है. सेलेनियम इनएक्टिव थायरॉइड हार्मोन टीएच4 को एक्टिव थायरॉइड टीएच3 से परिवर्तित करने में मदद करता है. यह शरीर में ग्लूटाथॉइन के स्तर को बढ़ाता है, जो डिप्रेशन को घटाने में मददगार है. आपको बता दें कि ग्लूटाथॉइन मस्तिष्क में सूजन को घटाने में सहायक है. मछली, श्रिम्प, लिवर और चिकन सेलेनियम के बढ़िया स्रोत हैं.

आयरन
आयरन की कमी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज़्यादा होती है. शरीर में आयरन की कमी होने पर डिप्रेशन, थकान, चिड़चिड़ापन, भूख की कमी जैसी समस्याएं होती हैं. बीफ, पोर्क, लैंब, डार्क मीट चिकन, अंडे, ऑएस्टर और व्हाइट बीन्स आयरन के प्रमुख स्रोत हैं. आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ खाने से आयरन का अवशोषण बेहतर तरी़के से होता है.

बी कॉम्पलेक्स
इसमें प्रमुख रूप से सभी 11 बी विटामिन्स आते हैं, जो न्यूरोट्रान्समीटर्स के उत्पादन और क्रियान्वयन के लिए ज़रूरी हैं. बी 12 ब्रेन मास के लिए ज़रूरी है. इससे मस्तिष्क सिकुड़ता नहीं है, जो डिमेंशिया का प्रमुख कारण है. बी12 की कमी होने पर डिप्रेशन की समस्या हो सकती है. मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी अन्य बी विटामिन्स में बी1, बी2, बी3 और फॉलेट आता है. बी विटामिन्स प्रमुख रूप से साबूत अनाज, नट्स, सीड्स, गाढ़ी हरी सब्ज़ियों और मीट में पाया जाता है.

विटामिन सी
विटामिन सी की कमी से आमतौर पर स्कर्वी, मसूढ़ों में सूजन, दर्द और ख़ून निकलना इत्यादि समस्याएं होती हैं. विटामिन सी सप्लीमेंट्स का सेवन करने पर एक हफ़्ते में ही इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन विटामिन सी की कमी से डिप्रेशन भी हो सकता है. कीवी, शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी
विटामिन सी के बढ़िया स्रोत हैं.
कहने का अर्थ यह है कि शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के हिसाब से खान-पान पर ध्यान दीजिए. पोषक तत्वों को नज़रअंदाज़ करना शरीर ही नहीं, दिमाग़ के लिए भी घातक होता है.

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