पहला अफेयर: अधूरा प्यार, मु...

पहला अफेयर: अधूरा प्यार, मुकम्मल एहसास! (Pahla Affair, Love Story: Adhura Pyar, Mukammal Ehsaas)

ये भीगता मौसम, ये बरसती फ़िज़ा… मन के किसी कोने में तुम्हारी यादों की सोंधी महक को फिर हवा दे जाते हैं… जब-जब ये बारिश होती है, तन के साथ-साथ मन को भी भिगो देती है… कैसी अजीब सी कशिश थी तुम्हारी उस सादगी में भी, कैसी रूमानियत थी तुम्हारी आंखों की उस सच्चाई में भी… मेरा पहला जॉब वो भी इतने बड़े बैंक में. थोड़ा डर लग रहा थालेकिन तुमने मुझे काफ़ी कम्फ़र्टेबल फील कराया था.

हर वक्त मेरी मदद की और न जाने कैसे धीरे-धीरे एक दिन अचानक मुझे ये एहसास हुआ कि कहीं मैं प्यार में तो नहीं? 

कुछ दिन अपने दिल को समझने और समझाने में ही बीत गए और उसके बाद मैंने निर्णय ले लिया कि तुमसे अपनीफ़ीलिंग्स का इज़हार कर दूंगी क्योंकि घर में भी मेरी शादी को लेकर बात चलने लगी थी. 

मैंने देर करना ठीक नहीं समझा और कहीं न कहीं मुझे भी ये लगने लगा था कि तुम्हारा भी खिंचाव और लगाव है मेरीतरफ़. मैंने लंच में तुमसे बिना झिझके साफ़-साफ़ अपने दिल की बात कह दी. तुमने भी बड़े सहज तरीक़े से मुझसे कहाकि तुम भी मुझसे प्यार करने लगे हो लेकिन एक सच है जो तुम मुझे बताना चाहते हो, लेकिन शाम को फ़ुर्सत में… 

‘निशांत, कहो क्या कहना चाहते हो?’

‘निधि मैंने तुमको अपने घर इसलिए बुलाया कि बात गंभीर है और मैं तुमको अंधेरे में नहीं रखना चाहता. निधि ये तस्वीर मेरी 3 साल की बेटी किट्टू की है.’ 

‘तुम शादीशुदा हो? तो तुमने मुझे अपने घर क्यों बुलाया? तुम्हारी पत्नी और बेटी कहां हैं?’

‘निधि, यही सब बताने के लिए तो बुलाया है तुम्हें! मेरी पत्नी और मैं अलग रहते हैं. हमने तलाक़ का फ़ैसला लिया है. किट्टू भी राधिका के साथ ही है. मेरी पत्नी राधिका को मेरी सादगी और सहजता पसंद नहीं थी. उसको शुरू से लगता था कि मैंऔरों की तरह स्मार्ट नहीं. उसकी ख्वाहिशें भी बहुत बड़ी थीं जो मैं पूरी न कर सका, इसलिए हमने अलग होने का फ़ैसला किया है.’

‘निशांत मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं और तलाक़ तक तो क्या, ताउम्र तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हूं!’ 

इसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, मेरी शामों में रूमानियत घुलने लगी थी, दिन रंगीन हो ही रहे थे कि निशांत ने बताया उसकी बेटी किट्टू बहुत बीमार है और राधिका वापस घर लौट आई है क्योंकि किट्टू अपने मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना चाहती थी. किट्टू की रिपोर्ट्स से पता चला कि उसको ब्रेन ट्यूमर है और सर्जरी करनी पड़ेगी, जो काफ़ी रिस्की है! 

मैंने निशांत को कहा कि फ़िलहाल वो किट्टू पर ध्यान दे. 

‘क्या बात है निशांत, तुम इतने उलझे-उलझे क्यों रहते हैं इन दिनों? किट्टू ठीक हो जाएगी, ज़्यादा सोचो मत!’

‘निधि किट्टू की फ़िक्र तो है ही लेकिन एक और बात है, राधिका काफ़ी बदल गई है. उसका कहना है कि किट्टू हम दोनों केसाथ रहना चाहती है और उसकी ख़ातिर वो खुद को बदलना चाहती है, लेकिन मैंने उसे अपने और तुम्हारे रिश्ते के बारे मेंबता दिया है, राधिका को कोई आपत्ति नहीं, पर किट्टू की ज़िद का क्या करूं. वो बस यही कहती है कि उसको मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना है!

‘निशांत, किट्टू की ज़िद ग़लत नहीं है, हर बच्चा यही चाहता है और जब राधिका भी बदलने को तैयार है तो तुम्हें भी अपने रिश्ते को एक और मौक़ा ज़रूर देना चाहिए!’

‘कैसी बातें कर रही हो तुम? क्या हमने सपने नहीं देखे अपने प्यार के लिए, उनको कैसे तोड़ दूं?’

‘एक 3 साल की बच्ची का दिल और अपनी शादी को तोड़ने से तो बेहतर है हम अपनी ख्वाहिशों को एक कदम पीछे कर लें! रही बात मेरी, तो मैं सारी ज़िंदगी तुम्हारा इंतज़ार करूंगी और अपने प्यार की वजह से ही मैं तुमसे कह रही हूं कि किट्टूकी ख़ातिर एक चान्स ज़रूर दो अपनी शादी को.’

‘पर निधि मैं तुम्हारे बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता.’

‘निशांत, इस वक़्त जो दो रास्ते हैं उनमें से एक को ही चुनना होगा और हमको सही रास्ता ही चुनना चाहिए वरना हमारा प्यार बदनाम होगा, वो प्यार नहीं स्वार्थ कहलाएगा!’

…बस ये आख़री मुलाक़ात थी हमारी, उस दिन खूब बारिश हुई थी बाहर भी और मन के भीतर भी. उसके बाद मैंने अपनी पोस्टिंग दूसरे शहर में करवा ली. ऐसा नहीं कि निशांत से संबंध ख़त्म कर लिए, हम फ़ोन और सोशल मीडिया के ज़रिए सम्पर्क में ज़रूर हैं लेकिन मैं रूबरू नहीं होना चाहती, क्योंकि सामने निशांत को देखूंगी तो अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाऊंगी! 

किट्टू अब ठीक है और अपने मम्मी-पापा के साथ खुश भी है. उसको खुश देख कर मैं और निशांत अपने प्यार पर गर्व महसूस करते हैं. उसकी इसी ख़ुशी में हमारे प्यार की जीत छिपी है! यही है मेरा पहला प्यार, अधूरा रहकर भी मुकम्मल हो गया जो!

  • गोल्डी शर्मा 

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