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काव्य- बिकने के लिए तैयार हूं मैं (Poem- Bikane Ke Liye Taiyar Hun Main)

मैं बिकने के लिए तैयार हूं
ख़रीद सकते हो तो ख़रीद लो
बस मुझे ख़रीदने के लिए
इंसानियत और सत्य की पूंजी लाना
इसे भी खनक और अभिमान के साथ
विपणन में प्रयोग मत करना
मेरी अंतरात्मा को इसे विश्वास
और विनम्रता के साथ सौंप पाए
तो मैं क्या
कोई भी
जीवनभर के लिए 
तुम्हारा हो जाएगा
बाकी के सभी व्यापार तो 
अस्थाई रिश्तों में बदल जाते हैं…

- मुरली मनोहर श्रीवास्तव 

यह भी पढ़े: Shayeri

Photo Courtesy: Freepik

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