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कविता- सज गए हैं बप्पा… (Poetry- Saj Gaye Hain Bappa…)

सज गए हैं बप्पा फिर बाज़ारों में

अब होगा मोल तोल ख़रीददारों में

अब भाव तय होंगे भगवान के भी

भक्तों की भीड़ भरी बाज़ारों में

क्यों प्रथा बनी भगवान बनाने की ऐसी

क्यों आ गई ये रस्म भी त्योहारों में

भावनाओं से पूजन हो

भावों में ही हो दर्शन

फिर भक्त नहीं दिखेंगे

लंबी-लंबी कतारों में

कोई जो समझेगा बात मेरी

वो तो होगा कोई हज़ारों में

ध्यान करो ईश्वर का मन से

तब होगा असर पुकारों में

ईश्वर को शोर नहीं

सच्चे मन की आवाज़ चाहिए

क़ीमती मूर्तियां नहीं पूजन को

मन में श्रद्धा और विश्वास चाहिए

जिसे देखना हो ईश्वर

वो अपने भीतर झांक कर देखे

कब किसे मिले हैं भगवान

भीड़ भरे बाज़ारों में

भावनाओं से पूजन हो भावों में हो दर्शन

फिर भक्त नहीं दिखेंगे लंबी कतारों में

कोई जो समझेगा बात मेरी

वो तो होगा हज़ारों में

ध्यान करो ईश्वर का मन से

तब होगा असर पुकारों में…

🙏 गणपति बप्पा मोरया 🙏

– प्रज्ञा पांडे मनु

Hindi Poetry - Bappa

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Photo Courtesy: freepik

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