क्या है पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम ? (Polycystic Ovary Syndrome)

Polycystic Ovary Syndrome

पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली एक तरह की बीमारी है. बदलती लाइफस्टाइल और कई कारणों से आजकल कम उम्र में ही महिलाएं इस बीमारी की शिकार हो रही हैं. क्या है पीसीओएस? जानने के लिए हमने बात की गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. कोमल चव्हाण से. 

क्या हैं लक्षण?
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कई लक्षण होते हैं. आपको अगर इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

अनियमित माहवारी
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का सबसे प्रमुख लक्षण है अनियमित माहवारी. इससे ग्रसित महिलाओं/लड़कियों को साल में स़िर्फ 9 माहवारी या कभी-कभी उससे भी कम पीरियड्स होते हैं. कुछ महिलाओं/लड़कियों में हैवी ब्लीडिंग की समस्या तो कुछ महिलाओं में मासिक धर्म के रुक जाने की समस्या हो जाती है.

मुंहासे
कई बार चेहरे पर मुंहासे निकल आते हैं. आमतौर पर हर बार मुंहासे निकलने को पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से जोड़कर नहीं देखा जा सकता.

बढ़ता वज़न
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का एक लक्षण ये भी है कि इसमें पीड़ित का शरीर मोटा होने लगता है. अचानक वज़न बढ़ने लगता है.

चेहरे पर बाल
पीसीओएस से पीड़ित महिला के चेहरे पर मोटे बाल निकल आते हैं. चेहरे पर ही नहीं, बल्कि पेट के निचले हिस्से, चेस्ट और पीठ पर भी बाल निकलने लगते हैं.

डिप्रेशन
पीसीओएस से पीड़ित महिला कई बार डिप्रेशन की शिकार हो जाती है. इस तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें.

अन्य लक्षण
उपरोक्त लक्षणों के अलावा महिलाओं में यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना, गर्भधारण में मुश्किल होना जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं.

क्या है पीसीओएस?
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें महिलाओं के
सेक्स हार्मोंस संतुलित नहीं रहते. इसके कारण ओवरी में सिस्ट यानी
छोटी-छोटी फोड़ियां हो जाती हैं. ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा
रचनाएं होती हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है. ओवरी
में ये जमा होती रहती हैं और इनका आकार भी
धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है. इसी स्थिति
को पॉलिसिस्टिक ओवरी
सिंड्रोम कहते हैं.

क्या है इलाज?
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का इलाज बहुत मुश्किल नहीं है. समय रहते इसका पता चल जाए, तो इलाज आसान है. इसका इलाज इसके लक्षण, महिला की उम्र और फ्यूचर प्रेग्नेंसी प्लान को ध्यान में रखते हुए किया जाता है. इसके लिए डॉक्टर निम्न ट्रीटमेंट करते हैं:
पीरियड को रेग्युलेट करने के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स देते हैं.
 इंफर्टिलिटी ट्रीटमेंट.
 एंटी-हेयर ग्रोथ मेडिकेशन.
 अदर एक्सेस हेयर ट्रीटमेंट.
 लाइफस्टाइल में बदलाव और हेल्दी डायट फॉलो करने की सलाह दी जाती है.
 रेग्युलर एक्सरसाइज़ और मोटापा कम करके इस बीमारी पर नियंत्रण रखा जा सकता है और इसे कम किया जा सकता है.

क्या खाएं?
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से निजात पाने के लिए सबसे पहले आपको अपने खानपान में बदलाव करना पड़ेगा.
फलों का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करें.
हरी सब्ज़ियां खाएं.
अनाज का सेवन बढ़ा दें.
ड्राईफ्रूट्स को डेली डायट में शामिल करें.

क्या न खाएं?
बहुत ज़्यादा मीट, चीज़ और फ्राइड फूड खाने से बचें. इससे वज़न बढ़ता है और पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का ख़तरा भी.

क्या है पीसीओडी?
पीसीओडी और पीसीओएस सामान्यतः एक ही हैं.
दोनों के लक्षण भी लगभग एक ही तरह के होते हैं.
साधारणतः पीसीओडी को पीसीओएस कहते हैं.

क्यों होता है कम उम्र में पीसीओएस?
चिकित्सकों के अनुसार, पिछले 10-15 सालों में यह बीमारी कम उम्र की महिलाओं में ज़्यादा होने लगी है. पहले यह 30 वर्ष से ज़्यादा उम्र वाली महिलाओं में पाया जाता था, लेकिन अब कम उम्र की लड़कियां भी इसका शिकार हो रही हैं. क्या है इसका कारण? आइए, जानते हैं:

ख़राब डायट
जंक फूड, जैसे- पिज़्ज़ा, बर्गर आदि शरीर को नुक़सान पहुंचाते हैं. बहुत ज़्यादा ऑयली, मीठा और वसायुक्त भोजन भी इस बीमारी का कारण है.

मोटापा
जंक फूड खाने, पूरा दिन स्कूल या घर में बैठे रहने और मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, वीडियो गेम से चिपके रहने के कारण कम उम्र की लड़कियों का वज़न बढ़ने लगता है और यही बढ़ा हुआ वज़न इस बीमारी का कारण बन जाता ह

ख़तरनाक हो सकता है पीसीओएस
कुछ महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
के कारण कई बार हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपर टेंशन,
ब्रेस्ट कैंसर, डायबिटीज़ आदि बीमारियां भी
देखने को मिलती हैं. शहरी इलाकों में हर
साल लगभग 15 फ़ीसदी लड़कियां
पीसीओएस की शिकार होती हैं.

– श्वेता सिंह

 

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