सोशल मीडिया पर रिश्ते तलाशते लोग अंदर से होते हैं तन्हा…! (Relationship Alert: Social Media Makes You Feel Alone)

Social Media Makes You Feel Alone
सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं. लेकिन जब हम इनके आदी होने लगें और जब यथार्थ की दुनिया को छोड़कर इस डिजिटल वर्ल्ड में ही अपनों को और अपने रिश्तों को तलाशने लगें, तब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या हम इतने तन्हा हैं कि हमारे आसपास कोई है ही नहीं अपने सुख-दुख बांटने के लिए और हम ऐसे लोगों की तलाश सोशल साइट्स पर भी करने लगे हैं.

  • कई तरह की स्टडीज़ और रिसर्च यह बताते हैं कि सोशल साइट्स पर सीमा से अधिक समय बिताना एक तरह के एडिक्शन को जन्म देता है.
  • ये शोध यह भी बताते हैं कि जो लोग भीतर से तन्हा होते हैं, वो इस तरह के एडिक्शन के अधिक शिकार होते हैं.
  • वो अपना अकेलापन दूर करने के लिए ही चैटिंग का सहारा लेते हैं.
  • अक्सर इस तरह की चैटिंग के ज़रिए ही वो अपने लिए पार्टनर भी तलाशने लगते हैं.
  • हालांकि कुछ लोग ये चैटिंग फन के लिए करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत लगने लगती है और फिर वो सीरियस एडिक्शन में तब्दील होने लगती है.
  • यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.
  • दरअसल, यंगस्टर्स सोशल मीडिया में इस तरह से इंवॉल्व हो जाते हैं कि बाहरी दुनिया से कट जाते हैं. उन्हें वो डिजिटल दुनिया और उसके रिश्ते इतने आकर्षक लगते हैं कि अपनी असली दुनिया उन्हें बोरिंग लगने लगती है. यही वजह है कि जब कभी उन्हें डिजिटल वर्ल्ड से ब्रेक लेना पड़ता हो या फिर वहां उन्हें रिश्ते नहीं मिल रहे हों, तो उन्हें रियल वर्ल्ड और भी तन्हा लगने लगता है. उनमें निराशा, अवसाद और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. इसका असर यह होता है कि वो फिर उसी डिजिटल दुनिया का रुख करते हैं और अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए नए रिश्ते तलाशने लगते हैं.
  • यह एक चक्र जैसा है, जिसमें हमें पहले यह लगता है कि हम तन्हा हैं, तो सोशल मीडिया हमारी तन्हाई को दूर करने का सबसे कारगर साधन है, लेकिन जब हम इस चक्र में फंसने लगते हैं, तो महसूस होता है कि यह तन्हाई दूर करने का नहीं, बढ़ाने का साधन साबित हो रहा है.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.
  • यानी लोग अपनी तन्हाई दूर करने के इरादे से सोशल वर्ल्ड में आते हैं और यह उनकी तन्हाई घटाने की बजाय बढ़ा देता है.
  • इसके अलावा, डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का भी होता है. आपको कोई भी आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है यहां.
  • अपनी पहचान छिपाकर आपसे लंबे समय तक दोस्ती रख सकता है, आपका फ़ायदा उठा सकता है. इसी तरह की एक घटना का ज़िक्र करती हैं मुंबई की प्रीति वर्मा (बदला हुआ नाम). प्रीति ने जो आपबीती सुनाई, वो हैरान करनेवाली थी. “मैं पहले तो बहुत अधिक सोशल मीडिया पर रहती ही नहीं थी. मेरे सभी दोस्त सोशल मीडिया पर काफ़ी एक्टिव थे और मैं अपनी ज़िंदगी में बहुत ही तन्हाई के दौर से गुज़र रही थी. मैंने सोचा, क्यों न मैं भी सोशल मीडिया पर किसी से दोस्ती कर लूं. धीरे-धीरे मुझे यहां अच्छा लगने लगा. मेरा ज़्यादा समय यहां गुज़रने लगा. मुझे नए दोस्त बनाने का शौक़ तो था ही, यहां नए-नए लोगों से बातचीत होती, उनके बारे में दिलचस्प बातें जानने को मिलतीं, तो मेरा रुझान इस तरफ़ ज़्यादा ही होने लगा. कुछ समय पहले मुझे एक लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, उसका प्रोफाइल बेहद आकर्षक था. मैंने भी उसमें दिलचस्पी दिखाई. हम दोस्त बन गए, दोस्ती थोड़ी गहरी हुई, तो हमने अपने फोन नंबर्स एक्सचेंज किए. वो घंटों मुझसे फोन पर बात करता. मुझे भी अच्छा लगने लगा था. वो अपने वीडियोज़ और पिक्चर्स भेजता. पर कहीं न कहीं मुझे लगता था कि न जाने क्यों इस शख़्स की पर्सनैलिटी से इसकी बातें मैच नहीं करतीं. वो पिक्चर्स तो बहुत आकर्षक भेजता था, लेकिन उसकी बातें बहुत ही बचकानी लगती थीं, जैसे कोई टीनएजर बात कर रहा हो. इस तरह पूरा एक साल बीत गया. वो अक्सर मिलने की इच्छा ज़ाहिर करता. दूसरे शहर में रहने की वजह से मैं प्लान कर रही थी कि कैसे जाकर उससे मिलूं, क्योंकि मैं भी उससे मिलना चाहती थी.एक दिन मैं यूं ही यू ट्यूब पर वीडियोज़ देख रही थी, तो अचानक एक वीडियो पर मेरी नज़र गई. मैं हैरान रह गई. वो वीडियो एक पंजाबी मॉडल का था, जिसकी शक्ल मेरे उस दोस्त से हूबहू मिलती थी. मैंने डीटेल में उस मॉडल का प्रोफाइल खंगाला, तो मेरे पसीने छूट गए, ये अगर असली है, तो वो कौन है, जो इसकी पहचान के आधार पर मेरा दोस्त बना हुआ था? उसने नकली पिक्चर्स लगाकर, नाम बदलकर मुझसे दोस्ती की. मैंने उसे तुरंत फोन लगाकर सफ़ाई मांगी, तो वो डर गया, मैंने पुलिस कंप्लेन करने की बात कही, तो उसने मुझे ब्लॉक कर दिया. नंबर्स से लेकर सोशल मीडिया तक, सब जगह से वो अब गायब था. मैं चाहकर भी कुछ न कर सकी, बस यही सोचकर रूह कांप जाती है कि अगर मैं उससे मिलने चली गई होती, तो न जाने क्या होता? मैं ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रही थी. मैं बस, यही कहना चाहती हूं कि जब भी सोशल मीडिया पर रिश्ते तलाशें, तो अच्छी तरह जांचें-परखें, वरना यह आपको और भी तन्हा कर देगा. कहां तो मैं अपनी तन्हाई दूर करने यहां आई थी, कहां मैं बेव़कूफ़ बन बैठी.”
  • यह अपने आप में अकेली घटना नहीं है, प्रीति की तरह ही बहुत से लड़के-लड़कियां अपनी तन्हाई को दूर करने के लिए सोशल मीडिया की शरण में आते हैं और वो इस कदर तन्हा होते हैं कि कोई दोस्त मिल जाने पर बिना जांचे-परखे आगे बढ़ने लगते हैं. जबकि सोशल मीडिया एक अच्छा प्लेटफॉर्म है हर किसी के लिए, लेकिन यहां आकर जल्दबाज़ी में रिश्ते ढूंढ़ना आपको भारी पड़ सकता है. बेहतर होगा सतर्क रहें, सावधान रहें.
  • रियल वर्ल्ड में अगर आप तन्हा हैं या आपका अभी-अभी ब्रेकअप हुआ है, तो थोड़ा सब्र करें, ख़ुद को समय दें. अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें और अपना मन लगाने के अन्य साधन भी तलाशें. अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव हो जाते हैं या फिर अपनी बोरिंग शादीशुदा लाइफ से हटकर ज़िंदगी में कुछ स्पाइस ऐड करने के इरादे से यहां आते हैं. शुरुआत में उन्हें सब कुछ बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन इससे अपनी तन्हाई दूर करने का यह इरादा उन्हें भटका भी सकता है.
  • बेहतर होगा, तन्हाई को क्रिएटिविटी में बदलें. कुछ समय बाद तन्हाई का एहसास अपने आप कम होने लगेगा. सोशल मीडिया पर ज़रूर जाएं, लेकिन एक निश्‍चित सीमा में रहकर, सावधानी से ही किसी से संपर्क साधें और अपने नंबर्स शेयर करें.

ब्रह्मानंद शर्मा

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