बाल गंगाधर तिलक… एक न...

बाल गंगाधर तिलक… एक नेता से लोकनायक तक का सफ़र! (Remembering Bal Gangadhar Tilak: Unknown Facts About Him)

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  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पहले लोकप्रिय नेता बाल गंगाधर तिलक को मेरी सहेली की ओर से नमन!
  • 23 जुलाई 1856 में जन्मे केशव गंगाधर तिलक न स़िर्फ स्वतंत्रता सेनानी थे, वे एक बेहतरीन वकील, विचारक, शिक्षक, विद्वान व समाज सुधारक भी थे.
  • उनका जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी के एक गांव में हुआ था. आधुनिक शिक्षा पाने के बाद इन्होंने लोगों को जगाने का काम किया.
  • शुरुआती दौर में ये शिक्षक के रूप में कार्य करते रहे, लेकिन समाज व देश के प्रति इनके लगाव ने इन्हें जल्द ही जनता का सबसे बड़ा नायक बना दिया.
  • ये अंग्रेज़ी शिक्षा के विरोधी थे, क्योंकि इनका मानना था कि यह भारतीय संस्कृति के प्रति हमें अनादर सिखाती है और हम में अपने ही देश व लोगों के प्रति मन में घृणा व हीन भावना भरती है.
  • उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उन्हें लोकमान्य की उपाधि मिल गई, जिसका अर्थ है लोगों द्वारा नायक के रूप में स्वीकृत यानी लोकनायक के रूप में सभी ने उन्हें स्वीकारा.
  • उनके काम व व्यक्तित्व के क़द के आगे ब्रिटिश शासन भी उनसे घबराता था. उनका प्रसिद्ध नारा, जो मूल रूप से मराठी में दिया गया था, “स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच” यानी स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा, काफ़ी लोगों के दिलों को छू गया था और उनके मन में आज़ादी की लौ जगा गया था.
  • आज़ादी की लड़ाई में ये नरम दल के विरोधी थे, इसलिए लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ ये गरम दल का हिस्सा थे. इन तीनों को ही लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था.
  • अंग्रेज़ इन्हें ‘भारतीय अशांति के पिता’ कहा करते थे और इन्हें हिंदू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है.
  • जनजागृति के लिए इन्होंने कई अख़बार व पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित कीं और कई शिक्षण संस्थान भी खोले.
  • तिलक ने अनेक पुस्तकें लिखीं, लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या को लेकर मांडले जेल में लिखी गई गीता-रहस्य सर्वोत्कृष्ट है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है.
  • जनता को एकता के सूत्र में बांधनेवाले तिलक ने ही गणेशोत्सव और शिवाजी समारोह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों की शुरुआत की थी. तिलक ने अंग्रेज़ों की नींद हराम कर रखी थी और अपनी आख़िरी सांस तक वो देश की आज़ादी के लिए लड़ते रहे.
  • 1 अगस्त 1920 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
  • ऐसे प्रखर नेता को उनकी डेथ एनीवर्सरी पर हम याद व नमन करते हैं.