जानें लेंस इस्तेमाल करने का सही तरीक़ा व नियम ( Rules you MUST follow if you wear contact lenses)

अगर लेंस (contact lenses) का इस्तेमाल सही तरी़के से हो, तो वह चश्मे का स्वस्थ विकल्प है. जहां लेंस से दृश्य साफ़ दिखता है, वहीं इसके कुछ जोखिम भी हैं. इन दिनों लोग लेंस का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं और इसे यूज़ करना एक आम बात हो गई है. इन बातों को ही ध्यान में रखकर निर्माता कंपनियां वैसे ही लेंस बना रही हैं, जो गुणवत्ता और सहूलियत के मामले में बढ़िया हो. लेकिन लेंस का इस्तेमाल बेहद ही सावधानी से करना ज़रूरी है और इसे इस्तेमाल करने के कुछ नियम हैं (rules wearing contact lenses). कॉर्निया, कैटरेक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जन डॉ. हर्षवर्द्धन घोरपड़े, (हीरानंदानी और फोर्टिस- वाशी) से जानते हैं इन नियमों के बारे में.

rules wearing contact lenses

नियम 1
हमेशा प्रोफेशनल की मदद लें. वह न केवल बताते हैं कि लेंस कैसे पहनें और साफ़-सफ़ाई रखें, बल्कि आपकी आंखों की जांच करके यह भी बताते हैं कि लेंस लगाने की सही जगह क्या होती है. वह देखते हैं कि लेंस आपकी आंखों पर फिट हो रहा है या नहीं और क्या लेंस आंखों पर बड़ी आसानी से घूमती है. लेंस लगाने के बाद यह ज़रूरी है कि कॉर्निया को ऑक्सीजन मिले.एक्सपर्ट्स इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए आंखों की लगातार जांच भी करते हैं.

नियम 2
कॉन्टेक्ट लेंस पहनकर सोएं नहीं (जब तक कि उनको इसके लायक नहीं तैयार किया गया हो). जब आप सोते हैं, तो आपकी आंखें सूख जाती हैं और ऑक्सीजन कम हो जाती है. ऐसे में, अगर आपने लेंस पहने हैं, तो कॉर्निया संक्रमित हो सकता है. इससे गंभीर संकट भी पैदा हो सकता है, जिससे आपकी दृष्टि ख़राब हो सकती है. इसलिए सबसे बढ़िया विकल्प है कि सोते समय लेंस न पहनें.

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नियम 3
अपने कॉन्टेक्ट लेंस की उचित देखभाल करें.
– कॉन्टेक्ट लेंस को अपनी हथेली पर रखकर मानक कॉन्टेक्ट लेंस सॉल्युशन से साफ़ उंगलियों से धीमे-धीमे साफ़ करें.
– कभी पानी का इस्तेमाल न करें. डिब्बे में रोज सॉल्यूशन बदलें.
– हर महीने सॉल्युशन की बोतल बदलें.
– हर महीने लेंस के डिब्बे को बदले.
– अगर किसी लेंस के इस्तेमाल करने की अवधि महीने भर की है, तो उसे महीने भर के बाद इस्तेमाल न करें.
– अगर लेंस और उसका डिब्बी जमीन पर गिर गया है, तो उन्हें फेंक दें और नई लेंस और डिब्बी ख़रीद लें.
– अगर स्वीमिंग के दौरान आपने लेंस का इस्तेमाल किया हैे, तो उनको भी हटा दें.
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नियम 4
कॉन्टेक्ट लेंस के ज़्यादा इस्तेमाल से जुड़ी तीन सबसे बड़ी समस्याओं का निदानः
– कॉर्नियल अल्सर आंख की बाहरी पारदर्शी परत का संक्रमण है, इससे दृष्टि चली जाती है.
– तैरते समय कॉन्टेक्ट लेंस के इस्तेमाल से आमतौर पर स्यूडोमोनास बैक्टीरिया या अकैंथ अमीबा पैरासाइट का संक्रमण होता है.
– इससे आंखों में दर्द होता है, आंखें लाल रहती हैं, पानी निकलता है और दृष्टि धुंधली हो जाती है.
– ऐसी स्थिति में, कॉर्निया विशेषज्ञ के पास फ़ौरन जाना चाहिए.
– जल्द से जल्द एंटीबायोटिक ड्रॉप्स आंखों में डाली जानी चाहिए.
– अगर कवक या अंकैथ अमीबा का संक्रमण है, तो तीन महीने तक का लंबा इलाज चल सकता है. कॉर्निया बदलने की ज़रूरत भी पड़ सकती है.

जाइंट पैपिलरी कंजेक्टिवाइटिस (जीपीसी)
बताए गए समय अंतराल पर लेंस नहीं बदलने से यह बीमारी होती है. इससे लेंस में गंदगी जमा होने लगती है, जिससे आंखों में जलन होती है. पलक के नीचे दानेदार परत का निर्माण होने लगता है, जिसे पैपीले कहते हैं, जो आकार में बड़ा होता है. यह परत कॉर्निया पर रगड़ पैदा करता है, जिससे फोटोफोबिया (रोशनी के प्रति काफ़ी संवेदनशील स्थिति) और क्रॉनिक रेड आई बीमारी होती है. जब इसका इलाज शुरू होता है, तब कुछ समय तक लेंस नहीं पहने (एक या एक महीने से ज़्यादा) की सलाह दी जाती है. आंखों में चिकनाई वाले द्रव्य का इस्तेमाल करना पड़ता है. ताज़ा उच्च डीके (ऑक्सीजन पारगम्यता) लेंस का इस्तेमाल भी करना पड़ता है, जिसे एक महीने में बदलना पड़ता है.

कॉन्टेक्ट लेंस एसोसिएटेड रेड आई (सीएलएआरई)- इसमें आंखें अचानक लाल होने लगती हैं. ये सोते समय लेंस पहनने से होती है. बहुत ज़्यादा फिट लेंस की वजह से कॉर्निया को जब ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है, तब यह बीमारी हो जाती है. यह बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन संक्रमण से आंखें लाल हो जाती है, जिससे तकलीफ़ होती है. एक हफ़्ते या इससे अधिक समय तक लेंस नहीं पहनने के बाद इसका इलाज शुरू होता है. आपसे चिकनाई वाले एंटीबायोटिक ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है और बेहतर फिटिंग के लिए लेंस बदल दिए जाते हैं.

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