– अनुपमा का क़िरदार निभाने के बाद मेरे मन से सारे डर ख़त्म हो गए हैं. मुझे किसी भी तरह से स्टीरियोटाइप होने का कोई फियर अब नहीं रहता है.

– मेरे इस क़िरदार को लोगों का भरपूर प्यार मिला है. ‘अनुपमा’ सीरियल सभी को ख़ासकर महिलाओं को प्रेरित करती है, यह देख-सुन अच्छा लगता है.
– देश में हो रहे ग़लत प्रदर्शनों से मन दुखी हो जाता है, तब दिल कहता है कि काश पीएम तानाशाह होते. मेरा यह मानना है कि हमें विदेश में बैठे किसी यूट्यूबर को अपना प्रवक्ता बनाने की ज़रूरत नहीं है.
– मेरे पिता का सपना था कि मुंबई में अपना घर बनाएं, जो ‘अनुपमा’ टीवी शो के ज़रिए पूरा हुआ.
– नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले डायरेक्टर (अनिल गांगुली) की बेटी होने से लेकर, अब नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले कोरियोग्राफर (विजय गांगुली) की बहन होने तक का सफ़र… मेरे लिए इससे बड़ी गर्व की बात और कुछ नहीं हो सकती. अब घर में तीन राष्ट्रीय पुरस्कार हैं.
– मेरी मां हमेशा कहती थीं कि विजय को आज की रात… गाने के लिए नेशनल अवॉर्ड ज़रूर मिलेगा. और सच में उनकी बात सच हो गई.

– मैं जानती हूं कि मेरा भाई बेहद सरल, दयालु, विनम्र और शुक्रगुज़ार इंसान है. और वह इस सम्मान का पूरी तरह हक़दार है. पापा हमेशा कहते थे कि अपना सिर हमेशा ऊंचा रखना, ईमानदार और विनम्र बने रहना. अपने काम की कद्र करना, हर बार अपना सबसे बेहतर देना और भगवान ने जो मौक़ा दिया है, उसकी पूरी इज़्ज़त करना. हमने हमेशा इन बातों को अपने जीवन में निभाया है. पापा के सबसे अच्छे बेटे बनने और पूरे गांगुली परिवार का नाम रोशन करने के लिए भाई को दिल से शुक्रिया.
– मैं और मेरे भाई अपने करियर को लेकर संघर्ष कर रहे थे. साल 2016 में पिता के न रहने पर ऐसा लगा कि उन्होंने ऊपर जाकर कुछ सेटिंग की, जिससे हम दोनों का करियर संवरने लगा. वे हमेशा हमारे साथ हैं और उनका आशीर्वाद हमारा मार्गदर्शन करता रहता है.
– लोग सोचते है कि मैं अपने रोल को लेकर बहुत चूजी हूं, पर ऐसा नहीं है. मुझे लगता है मेरे लिए ऊपरवाला ही सब कर देता है, तो सारा क्रेडिट उसी को जाता है.
– ‘अनुपमा’ शो के कारण मुझे गृहिणी से लेकर बहू, पत्नी, मां, बेटी हर भूमिका को बेहतरीन तरी़के से निभाने का मौक़ा मिला.
– ऊषा गुप्ता

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