संजीव कुमार एक सशक्त कलाकार होने के साथ-साथ एक नेकदल इंसान भी थे. उन्हें अभिनय का शौक बचपन से ही रहा. लेकिन ज़िंदगी कब उन्हें थिएटर से फिल्मों में ले आई वे भी नहीं जान पाएं. उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कई कहीं-अनकही बातों को जानेंगे मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
यूं तो उनसे जुड़ी कई दिलचस्प बातें रही हैं, लेकिन एक घटना ने उनके अभिनय के सोचने और देखने का नज़रिया ही बदल दिया.
जब वे थिएटर कर रहे थे तब उनके पहले ही नाटक में उन्हें बुज़ुर्ग का रोल मिला, जबकि वह यंग और हैंडसम थे. उन्होंने डायरेक्टर ए. के. हंगल से काफ़ी रिक्वेस्ट की उन्हें हीरो का यंग वाला क़िरदार करने दिया जाए. इस पर हंगल साहब ने उन्हें कहा कि आप इतने हैंडसम और आकर्षक हो कि हीरो की भूमिका ख़ूब मिल जाएगी और आप आसानी से कर भी लोगे. लेकिन चुनौती तो तब है कि जब आप लीक से हटकर अलग व परिपक्व वाली भूमिका निभाएं. संजीव कुमार ने उनकी इस बात को गांठ बांध ली और अपने पूरे फिल्मी करियर में हर तरह की भूमिकाएं कीं. उन्होंने हीरो, विलेन, कैरेक्टर रोल, कॉमेडियन सब किया.

यंग होते हुए भी उन्होंने तमाम ओल्ड भूमिकाओं को इस कदर ज़बर्दस्त ढंग से निभाया कि हर कोई उनके अभिनय का कायल हो गया, फिर चाहे ‘शोले’ के ठाकुर साहब हो या त्रिशूल में अपने से चार साल छोटे अमिताभ बच्चन के पिता की ही भूमिका क्यों ना हो.
कुछ इसी तरह अनुपम खेर ने भी अपनी पहली फिल्म ‘सारांश’ में यंग होते हुए एक बुज़ुर्ग की भूमिका बख़ूबी निभाई थी.

संजीव कुमार ने अपनी पूरी फिल्मी करियर में हर तरह की भूमिका की, विशेषकर ‘नया दिन नई रात’ मूवी में उनके द्वारा निभाई गई नौ भूमिकाएं आज भी यादगार है, जिसे करना किसी चैलेंज से कम नहीं था, जो उन्होंने बेहतरीन तरीक़े से निभाया.

उनकी भलमनसाहत के क़िस्से भी कुछ कम नहीं है. एक्ट्रेस सुलक्षणा पंडित उन्हें चाहती थीं और उनसे शादी करना चाहती थीं, लेकिन संजीव कुमार ने नहीं की. दरअसल, उनके परिवार का इतिहास कुछ ऐसा रहा था कि परिवार के पुरुष
लंबी उम्र नहीं जी पाते थे. उनके पिता, भाइयों के साथ रहा. इसलिए वे शादी करके किसी को वक़्त से पहले अकेला नहीं करना चाहते थे.
ऐसी और भी तमाम बातें और वाकये हैं, जो आप मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में देखेंगे और सुनेंगे. शेष फिर…

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