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व्यंग्य- एक साधारण वस्तु का असाधारण संदेश… (Satire- The extraordinary message of an ordinary object…)

“वो तो बस जूतों का यार है.”

तब समझ आया कि जूते दोस्ती भी निभाते हैं.

कल चाचाजी बेटे को डांट रहे थे, "तू तो जूते खाए बिना मानेगा नहीं!” तब पता चला कि जूते खाए भी जाते हैं.

हमने उनसे पूछा, “क्या हुआ?”

वे बोले, “जूते ने काट लिया.”

हम हैरान रह गए…

अरे! क्या जूता भी काटता है?

एक दिन उन्हें जूते में तेल लगाते देखा. हमने पूछा, "अब क्या हुआ?”

वे बोले, “जूता चूं-चूं करता है.”

वाह! मतलब जूता बोलता भी है!

फिर एक दिन किसी के बारे में कहते सुना,“वो तो बस जूतों का यार है.”

तब समझ आया कि जूते दोस्ती भी निभाते हैं.

कल चाचाजी बेटे को डांट रहे थे, "तू तो जूते खाए बिना मानेगा नहीं!” तब पता चला कि जूते खाए भी जाते हैं.

होली पर देखा कि एक मूर्ख को गधे पर बैठाकर गले में जूतों की माला पहनाई गई. तब समझ आया कि जूते सम्मान देने के काम भी आते हैं!

फुटबॉल में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को 'गोल्डन बूट' दिया जाता है.

वाह! पुरस्कार में भी सोने का जूता!

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किसी ने बताया कि विदेशी फिल्म टीवी जगत में भी श्रेष्ठ कलाकारों को‌ 'गोल्डन बूट अवॉर्ड' दिया जाता है. अब समझ नहीं आया कि सम्मान अभिनेता का हो रहा है या जूते का!

जब किसी को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो लोग कहते हैं, “जूता सुंघाओ!” तब ज्ञान मिला कि जूता औषधि भी है!

शादी में दूल्हे की सालियां उसके जूते चुरा लेती हैं और वापस करने के बदले पैसे मांगती हैं. ओह! मतलब जूते का अपहरण भी होता है!

गीत भी बना मेरा जूता है जापानी... अर्थात जूते की नागरिकता भी होती है!

अब तक हमने जाना कि जूता काटता है, जूता बोलता है, जूता दोस्ती निभाता है, जूता खाया जाता है, जूता सम्मान दिलाता है, जूता औषधि है, जूते का अपहरण होता है और उसकी नागरिकता भी होती है!

फिर पंडित जी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम वनवास गए, तब भरत ने उनकी खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राजकाज चलाया. अर्थात जूता राजा भी बन सकता है और यदि भगवान का हो तो पूजनीय भी.

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जीवन का संदेश

एक साधारण-सी वस्तु जूता भी, जिसके साथ रहती है, उसी के अनुसार सम्मान पाती है. तो सोचिए मनुष्य की संगति, व्यवहार और आचरण उसके जीवन को कितना ऊंचा उठा सकते हैं.

एक बात और… जूता हमेशा अपने जोड़ीदार के साथ रहता है. एक टूट जाए तो दूसरा भी बेकार हो जाता है.

दुनिया में शायद जूता ही ऐसा है जिसकी जोड़ी अखंड होती है. चलते भी साथ हैं, रुकते भी साथ हैं.

हम भी अपने मित्रों, जीवनसाथी, परिवार, समाज और देश का हर परिस्थिति में साथ निभाएं.

Photo Courtesy: Freepik

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