सेक्स से जुड़े मिथ्स कहीं कमज़ोर न कर दें आपके रिश्ते को (Sex Myths That Are Ruining Your Sex Life)

सेक्स प्यार का ही एक स्वरूप है और आपके रिश्ते को जोड़े रखनेवाली मज़बूत कड़ी व नींव भी है. यदि यह नींव किन्हीं कारणों से कमज़ोर पड़ गई, तो इसका सीधा असर आपके रिश्ते पर ही पड़ेगा. सेक्स को लेकर आज भी बहुत सी भ्रांतियां व डर हैं हमारे समाज में, जो आपके रिश्ते पर नकारात्मक असर डालते हैं. क्या हैं ये मिथ्स और क्या है सच्चाई यह जानना ज़रूरी है, ताकि आपका रिश्ता बना रहे व मज़बूती से टिका भी रहे.

रोज़ाना सेक्स नहीं करना चाहिए

यह मात्र ग़लतफ़हमी है. आप दोनों अगर रोज़ाना सेक्स करने की इच्छा रखते हो, तो ख़ुद को रोके रखने में समझदारी नहीं. पति का मन है, लेकिन पत्नी के मन में यह बात घर कर गई है कि यह रोज़ करनेवाली क्रिया नहीं है. ऐसे में पति का नाराज़ होना जायज़ है. बेहतर होगा कि इस बात को मन से निकाल दें और अपनी सेक्स लाइफ को क्रिएटिव बनाने की तरफ़ ध्यान दें.

दिन में बस एक बार ही सेक्स करना चाहिए

यह दूसरी सबसे बड़ी भ्रांति है. भूल जाइए कि आपके दोस्त व रिश्तेदार क्या कहते हैं, क्योंकि ऐसा कोई फिक्स नंबर नहीं है और न ही कोई मैजिक नंबर है, जो आपको पता चल जाए और आप उसको फॉलो करें. सेक्स हमेशा सहज और स्वाभाविक होना चाहिए. कपल जब भी एक-दूसरे के लिए यह महसूस करें, उन्हें सेक्स करना चाहिए और यदि दोनों में से एक का भी मन न हो, तो इंतज़ार करना ही बेहतर होगा, क्योंकि यह किसी एक को ख़ुश व संतुष्ट करने की क्रिया नहीं, बल्कि आपके रिश्ते को और भी ख़ूबसूरत बनाने की क्रिया है, तो यह जितना सहज होगा, उतना
बेहतर होगा.

सेक्स के लिए नियम नहीं बनाना चाहिए

जी नहीं, आप इसका टाइम टेबल ज़रूर बना सकते हो और यह आपको फन का एक्सपीरियंस देगा. यह सच है कि सेक्स सहज होना चाहिए, लेकिन याद करें रिश्ते के शुरुआती दिन, जब आप बन-ठनकर, कैंडल्स जलाकर, सेक्सी ड्रेस पहनकर मूड ऑन करते थे. तो क्यों न अपने कैलेंडर पर नए तरी़के से काम करें और सेक्स के लिए भी टाइम टेबल बनाकर रिश्ते में नयापन व ताज़गी लाएं.

सभी पुरुष रोज़ सेक्स करने की चाह रखते हैं

अधिकांश महिलाएं पुरुषों के बारे में यही राय रखती हैं. उन्हें लगता है पुरुष हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहते हैं और यदि उन्हें ख़ुश न रखा गया, तो वो रिश्ते से बाहर सेक्स व प्यार ढूंढ़ने लगते हैं. जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं. पुरुष ही नहीं, बहुत सी महिलाएं भी हैं, जिनके सेक्स की चाहत अपेक्षाकृत अधिक होती है. यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसकी सेक्स की इच्छा कब और कितनी होती है.

महिलाएं सेक्स को एंजॉय नहीं करतीं

यह भी बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है और इसका शिकार भी सबसे ज़्यादा महिलाएं ही हैं. महिलाओं को ख़ुद लगता है कि सेक्स स़िर्फ पुरुषों को ख़ुश करने के लिए होता है. ऐसे में वो सेक्स में पहल करने से भी कतराती हैं और सेक्स की इच्छा या अनिच्छा होने पर व्यक्त भी नहीं कर पातीं. वो अपने पार्टनर के मन व मूड के अनुसार सेक्स करती हैं. लेकिन इस तरह का सेक्स मशीनी प्रक्रिया से अधिक कुछ नहीं होगा. सेक्स भावना है, कोई रूटीन काम नहीं, जिसे बस निपटाना है. इस भावना को जब तक महसूस नहीं करेंगे, तब तक पार्टनर से कैसे जुड़ाव महसूस करेंगे?

उम्र बढ़ने पर सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, इसलिए ख़ुद पर कंट्रोल रखना चाहिए

अधिकांश भारतीयों में यह सोच होती है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो ऐसे में यह सब शोभा नहीं देता. सेक्स से उम्र या बच्चों का कोई लेना-देना नहीं होता. आप जब तक हेल्दी हैं और जब तक आपकी इच्छा है आप सेक्स कर सकते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है.

मेरे पार्टनर को पता होना चाहिए कि मुझे सेक्स के दौरान क्या पसंद है, क्या नहीं

सबसे पहले तो यह जान लें कि आपका पार्टनर माइंड रीडर नहीं है. जब तक आप दोनों कम्यूनिकेट नहीं करेंगे, तब तक किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. आप दोनों बस अंदाज़ा ही लगाते रह जाओगे. जिस तरह रिश्ते की मज़बूती के लिए कम्यूनिकेशन ज़रूरी है, उसी तरह अच्छी सेक्स लाइफ के लिए भी कम्यूनिकेशन बेहद ज़रूरी है. आप दोनों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. अपनी फैंटसीज़, अपने प्लेज़र पॉइंट्स आदि बताने चाहिए, ताकि सेक्स आप दोनों के लिए संतोषजनक हो.

शादीशुदा कपल पारंपरिक सेक्स ही करते हैं

अधिकांश कपल्स की सेक्स को लेकर कई तरह की फैंटसीज़ होती हैं. उनकी कल्पना का सेक्स अलग ही होता है, जबकि हक़ीक़त इससे कोसों दूर होती है, क्योंकि सेक्स को लेकर आपके मन में बहुत से मिथ्स होते हैं. आपको लगता है कि शादी के बाद सेक्स में ज़्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते हैं. जबकि आप अपनी फैंटसीज़ एक-दूसरे के साथ डिसकस कर सकते हैं और जितना संभव हो, उन्हें पूरा करने का प्रयास भी कर सकते हैं. चाहे सेक्स पोज़ीशन की बात हो या नई जगह पर सेक्स करना… आप सब कुछ ट्राई कर सकते हो. ज़रूरी नहीं कि आप अपनी सेक्स लाइफ को पारंपरिक सेक्स का नाम देकर बोरिंग बना दें और अपने रिश्ते को कमज़ोर करने की नींव रख दें.

बढ़ती उम्र के साथ फोरप्ले और नॉटी बातें कम होती जाती हैं

यह सच नहीं है. आपकी उम्र से इन सब बातों का कोई लेना-देना नहीं होता. फोरप्ले हमेशा ही ज़रूरी होता है और नॉटी बातें आपके रोमांस को बरक़रार रखती हैं. बेहतर सेक्स व रिलेशनशिप के लिए दोनों का ही नॉटी होना बेहद ज़रूरी है, चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो.

किसी यंग के साथ सेक्स का अनुभव बेहतर होता है

यह भी बहुत बड़ी भ्रांति है. सेक्स अनुभव व उम्र के साथ बेहतर होता जाता है और आप दोनों ही समय के साथ एक-दूसरे को बेहतर समझने लगते हैं. ऐसे में उम्र का सेक्स के अनुभव व बेहतर सेक्स से कोई लेना-देना नहीं होता. यह कतई ज़रूरी नहीं कि यंग पार्टनर के साथ सेक्स का अनुभव ज़्यादा अच्छा रहेगा. यहां मामला उल्टा भी हो सकता है.

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पत्नी को ऑर्गैज़्म न मिला, तो वो पति को कमज़ोर समझेगी

यह सोच पुरुष व महिलाएं दोनों में होती है. यदि सही तरी़के से फोरप्ले किया जाए, तो दोनों को ही एक साथ ऑर्गैज़्म मिल सकता है. लेकिन यदि इस क्रिया में कभी ज़्यादा एक्साइटमेंट के चलते या कभी अन्य कारणों से कोई एक जल्दी स्खलित हो जाए, तो इसका यह कतई अर्थ नहीं कि वो कमज़ोर है. ऐसा होना स्वाभाविक है. समय के साथ-साथ जब आप दोनों की कंपैटिबिलिटी व समझ बढ़ेगी, तो सेक्स को लेकर सहजता भी बढ़ेगी और आपका अनुभव बेहतर होता जाएगा. कई बार तो पत्नियां भी मात्र इस बात का प्रदर्शन करती हैं कि उन्हें ऑर्गैज़्म मिला है, पर बेहतर होगा सेक्स को लेकर खुलकर बात करें. इससे आपका रिश्ता भी बेहतर होगा, वरना कुंठाएं जन्म लेंगी.

सेक्स से कमज़ोरी आती है

यह सोच आज भी है. लंबे समय तक एथलीट्स को भी यही सलाह दी जाती थी कि अपनी परफॉर्मेंस से पहले की रात वो सेक्स न करें. इस सोच के पीछे की धारणा यह होती थी कि सेक्स न करने से आपकी ऊर्जा बचती है और वो एग्रेशन आप अपनी परफॉर्मेंस में देते हैं, जिससे आपका प्रदर्शन बेहतर होता है. पर अब कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि इसमें सच्चाई कम ही है. बेहतर सेक्स आपके प्रदर्शन को बेहतर करता है, न कि कमज़ोर.

पोर्न फिल्म्स से आप अपनी सेक्स लाइफ में नई ताज़गी ला सकते हैं

बहुत से लोग यह सोचते हैं कि इस तरह की फिल्म्स में जो दिखाया जाता है वह सच में संभव है, जबकि यह मात्र सेक्स को ग़लत संदर्भ में ग़लत तरी़के से दिखाती हैं. यह स़िर्फ पैसे कमाने की इंडस्ट्री है, इसे आपकी सेक्स लाइफ या आपको एजुकेट करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती. ये आपको वही दिखाती हैं, जो आपको अधिक उत्तेजक लगे, लेकिन यथार्थ में वह संभव नहीं हो सकता. कई लोग जब अपने पार्टनर पर पोर्न फिल्म देखकर उसी तरह परफॉर्म करने का दबाव बनाते हैं, तो रिश्तों में दूरियां व दरार आने लगती है. बेहतर सेक्स के लिए पार्टनर की भावनाओं का ख़्याल रखना सबसे ज़रूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि पोर्न देखने की लत से आपका सेक्स जीवन पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर आ सकता है, क्योंकि उसके बाद आपको रियल सेक्स बोरिंग लगने लगता है और आपको वो नकली दुनिया ज़्यादा हसीन व रंगीन नज़र आती है. बेहतर होगा कि इन फिल्मों की लत से बचें.

अल्कोहल सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर करता है

शुरुआती दौर में आपको ऐसा लगता है, लेकिन अल्कोहल आगे चलकर आपकी परफॉर्मेंस व सेहत दोनों को ख़राब ही करता है. साथ ही यह रिश्तों पर नकारात्मक असर डालता है. इसलिए कभी-कभार इसका सेवन आपका मूड बेहतर कर सकता है, पर इसकी भी लत अच्छी नहीं और इसे लेकर यह भ्रम ख़तरनाक है कि आपकी सेक्सुअल परफॉर्मेंस इससे बेहतर होगी.

सेक्स को लेकर क्यों हैं इतने मिथ्स?


– हमारे समाज में सेक्स पर आज भी अधिक कम्यूनिकेशन या बातचीत नहीं की जाती. इस वजह से बहुत से सवाल मन में ही रह जाते हैं.
– ग़लत जगह से जानकारी हासिल करना भी मिथ्स को बढ़ाता है.
– दोस्तों व सहेलियों की सेक्स को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने की आदत मन में कई ग़लत धारणाएं बना देती हैं.
– घर-परिवार में भी सेक्स की बातें करने की मनाही होती है.
– लड़कियों को हमेशा ही सेक्स की इच्छा को दबाकर रखने की सीख दी जाती है.
– उनकी परवरिश के दौरान उन्हें यही सिखाया जाता है कि सेक्स बुरी चीज़ है, जिसे ख़राब चरित्र के लोग ही तवज्जो देते हैं.
– बेटियों को यही बताया जाता है कि पति को ख़ुश करना ही उनके लिए सेक्स का उद्देश्य होना चाहिए.
– पर्सनल व सेक्सुअल हाइजीन व सेफ सेक्स की बातों को बताना ज़रूरी नहीं समझा जाता.
– रिलेशनशिप एक्सपर्ट या सेक्स थेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह कभी नहीं दी जाती.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए किस तरह से सेक्स को लेकर मैच्योरिटी होनी चाहिए इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता और न ही इसे महत्वपूर्ण माना जाता.
– लड़कों की परवरिश काफ़ी लापरवाही से की जाती है, जिसमें उनको यह भ्रम हो जाता है कि महिलाएं मात्र उनकी संतुष्टि का ज़रिया हैं.
– उन्हें महिलाओं की सेक्सुअल ज़रूरतों का ध्यान देने की हिदायतें कभी नहीं दी जातीं.
– सेक्स और भावनाओं के समन्वय को समझाया नहीं जाता.

कैसे दूर हों ये मिथ्स?

– ज़रूरी है सही समय पर सेक्स की सही शिक्षा.
– लिंग के आधार पर सेक्स की ज़रूरतों व ज़िम्मेदारियों को न बांटा जाए.
– सेक्स को लेकर बात करने में बच्चे सहज हों, पैरेंट्स को यह बच्चों को समझाना व ख़ुद भी समझना चाहिए.
– सेक्स को बुरा काम बताने की ग़लती न करें.
– यह एक सहज व प्राकृतिक क्रिया है, यह समझें व समझाएं.
– सेक्स को लेकर अपनी सोच में मैच्योरिटी लाएं. ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह लेने से न हिचकें.
– पैरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे ग़लत जगहों से जानकारी न लें.
– अलग-अलग तरीक़ों से उन्हें एजुकेट करें.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए सेक्स व सेक्स को लेकर सही सोच के महत्व को समझाएं.
– कोई सेक्सुअल समस्या हो, तो उसे शेयर करने में न तो कमज़ोरी होगी, न ही बुराई.इसे छिपाना सेहत व रिश्ते के लिए घातक हो सकता है.

– विजयलक्ष्मी

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