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कहानी- चूहेदानी (Short Story- Chuhedani)

चूहेदानी देखकर वह घबरा गया और बंगले में रह रहे अपने साथियों के पास पहुंचकर चूहेदानी की सूचना दी.
कबूतर ने उसकी बात को हंसी में उड़ाते हुए उत्तर दिया, “तो मैं क्या करूं? चूहेदानी मेरा क्या बिगाड़ लेगी?”
यहां से नाउम्मीद होकर वह मुर्गे के पास गया और चूहेदानी लाने की सूचना दी. मुर्गे ने बड़ी बेपरवाही से यह कहकर बात टाल दी कि "यह तुम्हारी समस्या है दोस्त! मैं इसमें क्या कर सकता हूं?"

एक बड़े से बंगले में रहनेवाले एक परिवार ने एक कबूतर, मुर्गा और एक बकरा पाल रखा था. कहीं से एक बड़े से चूहे ने भी वहीं आकर डेरा डाल दिया. और सब में अच्छी मैत्री हो गई थी.
बकरा, मुर्गा और कबूतर तो घर के बाहर रहते, परन्तु घरवालों की नज़र बचा कर चूहे का बंगले के भीतर भी आना-जाना हो जाता.
वह जब भी भीतर चक्कर लगाता, कभी कुछ खा जाता, कभी काम की चीज़ कुतर जाता. निश्चय ही मालिक उससे बहुत परेशान हो गए थे.

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एक दिन चूहे ने देखा कि पति-पत्नी बाहर से आए हैं और एक बड़ा सा बैग स्टोर में रख दिया है. चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने की चीज़ हो, परन्तु जब उसने बैग के भीतर देखा, तो पाया कि उसमें एक चूहेदानी रखी है.
चूहेदानी देखकर वह घबरा गया और बंगले में रह रहे अपने साथियों के पास पहुंचकर चूहेदानी की सूचना दी.
कबूतर ने उसकी बात को हंसी में उड़ाते हुए उत्तर दिया, “तो मैं क्या करूं? चूहेदानी मेरा क्या बिगाड़ लेगी?”
यहां से नाउम्मीद होकर वह मुर्गे के पास गया और चूहेदानी लाने की सूचना दी. मुर्गे ने बड़ी बेपरवाही से यह कहकर बात टाल दी कि "यह तुम्हारी समस्या है दोस्त! मैं इसमें क्या कर सकता हूं?"
इन दोनो से निराश होकर वह बाड़े में खड़े बकरे के पास गया और उसे अपना बड़ा भाई मान समस्या बताई. चूहे को ग़ुस्सा तब आया, जब बकरा उसकी बात सुन ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा और बोला, “यह चूहेदानी मुझे फंसा सकती है क्या? तुम अपनी फ़िक्र करो. यह चूहेदानी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती.”
उसी रात एक ख़तरनाक सांप उस चूहेदानी में फंस गया. आधी रात मालकिन ने चूहेदानी में से खटखट की आवाज़ आती सुनी. पास गई तो एक पूंछ सी बाहर निकली देखी. उसने भोर के अंधेरे में ही चूहे को बाहर जाकर फेंकना तय किया. घर से दूर एक वीरान सी जगह में पहुंच कर उसने ज्यों ही चूहेदानी का दरवाज़ा खोल उसमें हाथ डाला सांप ने उसके हाथ पर डस लिया.
उसने फ़ौरन भीतर जाकर पति को बताया. वह भी घबरा गया और फ़ौरन पत्नी को डॉक्टर के पास ले गया.

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डॉक्टर ने दवा दी और साथ में उसे कबूतर का सूप पिलाने की राय दी. पति ने सुबह रसोइए को बुलाकर उसे कबूतर मार कर उसका सूप बनाने को कहा.
सांप के काटने की ख़बर सुन दूर-पास के रिश्तेदार और मित्र मिलने आए. रिश्तेदार तो दूसरे शहर से आए थे. अतः उनके लिए मुर्गे का सालन बनवाया गया.
ईश्वर की कृपा से पत्नी सर्पदंश से बच गई. उसके ठीक होने पर पार्टी की मांग होने लगी. पति ने बड़े से प्रीतिभोज का आयोजन किया, जिसमें दूर-पास के सब मित्र-रिश्तेदारों को बुलाया गया एवं उस प्रीतिभोज के लिए बकरे को काटा गया.
चूहा तो ख़ैर पहले ही दिन बड़ी दूर कहीं भाग गया था.
अगली बार कोई व्यक्ति अपनी गंभीर समस्या लेकर आए, तो यह सोच कर चुपचाप न बैठ जाएं कि वह आपकी समस्या नहीं है, आपका कुछ नहीं बिगड़ने वाला.

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समाज का कोई एक अंग भी ख़तरे में है, तो पूरे समाज को एकजुट होकर उसकी सुरक्षा में जुट जाना चाहिए.
आज वह फंसे हैं, तो अगली बारी आपकी हो सकती है.

- उषा वधवा

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Photo Courtesy: Freepik

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