श्रीकांत ने रचा इतिहास… (Shrikant Kidambi Creates History…)

Shrikant

कदम-दर-क़दम कामयाबी की सीढ़ी चढ़ते हुए श्रीकांत किदांबी ने आख़िरकार इतिहास ही रच डाला. आस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज़ के फाइनल में चीन के मौजूदा ओलिंपिक व विश्‍व चैंपियन चेन लॉन्ग को सीधे सेटों में 22-20, 21-16 से हराकर. अब तक इनके बीच हुए पांच मुक़ाबलों में श्रीकांत को हार ही मिली थी, लेकिन रविवार का दिन श्रीकांत के नाम रहा.
आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहनेवाले श्रीकांत की कड़ी मेहनत और सतत आगे बढ़ते रहने के जज़्बे का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि चार साल पहले 2012 में वर्ल्ड रैंकिंग में वे 240 वें स्थान पर थे. सालभर में ही वे 13 वें स्थान पर पहुंचे. फिर उनकी बेस्ट रैंकिंग 2015 में तीसरी पोज़ीशन की रही थी. लेकिन फ़र्श से अर्श तक का उनका सफ़र शानदार रहा. आज शीर्ष पर पहुंचकर उन्होंने अपना और देश का नाम रोशन कर दिया.

श्रीकांत के खेल सफ़र पर एक नज़र डालते हैं-

* श्रीकांत ने हैदराबाद के गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी से प्रशिक्षण लिया है.
* साल 2011 के कॉमनवेल्थ यूथ गेम के मिक्स डबल्स में श्रीकांत ने सिल्वर मेडल जीता था.
* ऑल इंडिया जूनियर इंटरनेशनल बैंडमिंटन चैपिंयनशिप में सिंगल्स व डबल्स जीते.
* साल 2012 में मालदीव इंटरनेशनल चैलेंज में मलेशिया के जूनियर विश्‍व चैंपियन जुल्फदली को हराकर ख़िताब अपने नाम किया.
* 2013 में थाईलैंड ग्रा. प्री. गोल्ड में शानदार जीत हासिल की.
* 2014 में चाइना ओपर सुपर सीरीज़ प्रीमियर का ख़िताब जीते.
* श्रीकांत ने 2015 में स्विस ओपन ग्रां प्री गोल्ड में गोल्ड जीतनेवाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें. इसी साल उन्होंने इंडिया ओपन सुपर सीरीज़ भी जीता.
* हाल ही में जापान के काज़ुमास सैकई को फाइनल में हराकर उन्होंने इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज़ अपने नाम किया.
* वे अवध वॉरियर्स टीम का हिस्सा भी रहे हैं.
* श्रीकांत के बड़े भाई नन्दा गोपाल भी बैडमिंटन प्लेयर हैं.
* वे अब चार सुपर सीरीज़ ख़िताब जीत चुके हैं.
* आस्ट्रेलियन ओपन जीतने के साथ-साथ लगातार दो सुपर सीरीज़ जीतनेवाले वे पहले भारतीय खिलाड़ी हैं.
* वे दुनिया के पांचवे ऐसे खिलाड़ी भी बन गए हैं, जिन्होंने लगातार तीन सुपर सीरीज़ के फाइनल में जगह बनाई.
* भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) ने श्रीकांत की बेहतरीन उपलब्धि पर उन्हें पांच लाख की राशि पुरस्कार के रूप में देने की घोषणा की है.
बकौल श्रीकांत, “मैंने पूरे टूर्नामेंट तक ख़ुद पर अधिक दबाव नहीं डाला. मेरी कोशिश ख़िताब को जीतने की बजाय मैच दर मैच आगे बढ़ने की रही. मेरा उद्देश्य अच्छा खेलना था.” देश को श्रीकांत पर गर्व है. उन्होंने कई बार देश को गौरवान्वित होने का मौक़ा दिया. वैल डन श्रीकांत! ऑल द बेस्ट!

– ऊषा गुप्ता