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कहानी- बाजूबंद १ (Story Series- Bajuband 1)

बाजूबंद की स्वर्णिम चमक से मेरी आंखें चौंधिया गईं. जब कुछ बोलने की स्थिति में हुई, तो मेरे मुंह  से अस्फुट से स्वर निकले, “… य… यह तो मांजी का खोया हुआ…”
“आपने ठीक पहचाना, पर यह कभी खोया नहीं था.” मैंने नोटिस किया ऐसा बताते समय उनकी गर्दन असाधारण रूप से झुक गई थी. मैं कुछ-कुछ स्थिति भांप गई थी.

 

 

 

 

 

वैवाहिक स्वर्ण जयंती कार्यक्रम अच्छे से संपन्न हो गया था. कुछ मेहमान तो रात्रि ट्रेन या बस से निकल भी चुके थे. शेष को संभालने राकेश गेस्ट हाउस का राउंड लगाने चले गए, तो मैं भी बेडरूम में आ गई. जेवर, कपड़े बदलने का मन बना ही रही थी कि दरवाज़े पर दस्तक हुई. खोला तो देवर सुकेश भैया खड़े थे.
“आपके भैया तो गेस्ट हाउस मेें मेहमानों को संभालने गए हैं.”
“पता है. मैं आपसे मिलने आया हूं.” कहते हुए वे अंदर प्रविष्ट हो गए. हाथों में पीछे छुपा रखा लाल मखमली डिब्बा भी उन्होंने आगे कर लिया था. मेरी उत्सुक निगाहें डिब्बे पर टिक गई. उन्होंने डिब्बा मेरी ओर बढ़ाया, तो मैं अचकचा गई.
“आप भेंट दे तो चुके?”
“भेंट नहीं, आपका अधिकार है यह! आपकी अमानत!” कहते हुए उन्होंने डिब्बा खोल दिया. जड़ाऊ भारी बाजूबंद की स्वर्णिम चमक से मेरी आंखें चौंधिया गईं. जब कुछ बोलने की स्थिति में हुई, तो मेरे मुंह  से अस्फुट से स्वर निकले, “… य… यह तो मांजी का खोया हुआ…”

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“आपने ठीक पहचाना, पर यह कभी खोया नहीं था.” मैंने नोटिस किया ऐसा बताते समय उनकी गर्दन असाधारण रूप से झुक गई थी. मैं कुछ-कुछ स्थिति भांप गई थी.
“आइए इधर बैठकर बात करते हैं.”
मैंने उन्हें ठंडे पानी का ग्लास पकड़ाया, जिसे पीकर वे थोड़ा संयत हुए.
“सुमन के स्वभाव से तो आप वाकिफ़ ही रही हैं. ज़रूरत से ज़्यादा सोचना, चिंता करना उसके खून में था. दो बेटियां हो जाने के बाद तो वह और ज़्यादा चिंतित परेशान रहने लगी थी. मां से उसकी शुरू से ही नहीं बनी. इसलिए ख़ुद का घर और नौकरी होने के बावजूद बाउजी-मां लंबी-लंबी छुट्टियां लेकर आपके शहर डेरा जमाए रहते थे.”
“वह भी उनका ही घर था.”
“हां, पर हम सब वस्तुस्थिति जानते थे. मेरी क्लर्क की नौकरी में अलग से किराए का घर लेना मेरे बूते के बाहर था. इस बीच बाउजी सेवानिवृत्त हुए तो उनका डेरा एक तरह से आपके यहां हो गया. शादी-ब्याह या ग़मी में ही वे ग्वालियर लौटते. तभी उनके बैंक लॉकर  में मेरा नाम नॉमिनी के रूप में जुड़वाया गया था.”

अगला भाग कल इसी समय यानी ३ बजे पढ़ें…

संगीता माथुर

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