कहानी- एक सपने का सच होना 4...

कहानी- एक सपने का सच होना 4 (Story Series- Ek Sapne Ka Sach Hona 4)

“बंदा हाज़िर है, पहले बुला लिया होता तो चला आता.” केबिन के अंदर आते मलय को देख राजेश्‍वरी को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई है. मन की बातें भी सुन लेता है क्या?

“मुझे ही याद कर रही थीं ना? तोड़ दो इस चुप्पी को. बहुत व़क़्त दे दिया मैंने तुम्हें सोचने का.”

आंखों से आंसू बहने लगे राजेश्‍वरी के. इतनी शिद्दत से दिल की बात वही समझ सकता है, जो बेहद प्यार करता हो.

कुछ कहने को उद्धत हुई थी कि मार्केटिंग मैनेजर ने टोका, “अरे मैडम, अच्छा हुआ आप यहीं मिल गईं. अबकी बार अपने नए लॉन्च के लिए प्रोडक्ट का शूट इन्हीं से करवा रहे हैं. इनके रिजल्ट्स देखे हैं मैंने, बहुत बढ़िया तस्वीरें उतारते हैं.”

“कैसी हैं? संयोगों पर मेरा यकीन नहीं है, पर आज हो रहा है.”

“इन्हें सब कुछ ठीक तरह से समझा दीजिएगा, बार-बार शॉट्स न लेने पड़ें.”

राजेश्‍वरी जल्दी से ऑफ़िस से बाहर निकल गई. मलय की बात का जवाब न देकर उसने बदतमीज़ी की थी. पर वह क्या करती, उसे वहां देखकर उसके लिए अपने आपको संयत कर पाना मुश्किल हो गया था. मलय उसकी ज़िंदगी से इस तरह जुड़ा था कि उसी नाम के दूसरे पुरुष का सामना वह नहीं कर पा रही थी. यादों के झंझावात उसे बार-बार झिंझोड़ जाते. वर्षों बाद भी वह उन एहसासात के बवंडरों से स्वयं को मुक्त नहीं कर पा रही है.

“आपकी मुझसे क्या पिछले जन्म की कोई दुश्मनी है?” इस बार मलय ने मुलाक़ात होते ही प्रश्‍न कर डाला. न कोई भूमिका बांधी, न ही अभिवादन की औपचारिकता निभाई, शायद पिछली बार के उसके व्यवहार से आहत हुआ था. देखा जाए तो हर किसी को अपना आत्मसम्मान प्यारा होता है. राजेश्‍वरी चुप रही. काम के सिलसिले में बार-बार मुलाक़ातें होतीं और वह वही प्रश्‍न दोहराता.

पिघलने लगी राजेश्‍वरी. काम में महारत हासिल थी उसे. धैर्य भी गजब का था और मेहनती होने का गुण भी था. ज़िंदगी को व्यावहारिक ढंग से जीता था वह. अक्सर उनकी सोच एक जैसी होती, इसलिए टकराहट हुई ही नहीं. उसके चेहरे पर छाई संतुष्टि और उसकी चुप्पी के बावजूद राजेश्‍वरी के मौन को तोड़ने के प्रयत्न में आख़िर वह एक दिन सफल हो ही गया. सब कुछ बता दिया राजेश्‍वरी ने.

बहुत ज़ोर से हंसा वह. “ओह, तो सारा किया धरा मेरे नाम का है. पहले कहा होता तो कब का बदल देता.” फिर अचानक गंभीर हो गया, “माना कि पहला प्यार भुलाया नहीं जा सकता, पर जब वह प्यार यादों में दुख के साथ कड़वाहट के रूप में भी जुड़ा रहता है तो एक दिन नासूर बन जाता है. स्वीकार क्यों नहीं लेतीं कि उस मलय ने तुम्हें धोखा दिया है. साफ़ शब्दों में कहें तो वह पलायनवादी था और ऐसे इंसान के लिए रोना बेवकूफ़ी के सिवाय और कुछ नहीं है. आप चाहें तो इस मलय को ट्राई कर सकती हैं, यह बंदा आपको कभी धोखा नहीं देगा.”

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राजेश्‍वरी एक तरफ़ उसकी बेबाक़ी पर हैरान थी, तो दूसरी ओर ज़िंदगी के फलसफे को इतनी ख़ूबसूरती से बयान करने के कारण उसकी कायल भी हो गई थी. बरसों से उसके मन में भी कुछ इसी तरह की बातें पल रही थीं, पर वह स्वयं उन्हें ज़ुबान पर लाने से डरती थी. लेकिन फिर से एहसास की ख़ुशबू से स्वयं को लपेट लेना अब उसके लिए उतना सहज न था.

मलय का उनकी कंपनी से संबंधित काम ख़त्म हो चुका था. वही फ़ोन करता और राजेश्‍वरी हां-ना में बात ख़त्म कर देती. लगातार पंद्रह दिनों तक मलय का फ़ोन नहीं आया. राजेश्‍वरी की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. पर क्यों…? उसे उसके फ़ोन का इंतज़ार आख़िर क्यों है? आदत हो गई है या… उत्तर देने से स्वयं ही डर लगता था उसे. मोबाइल मिलाया पर नहीं लगा. मलय का चेहरा आंखों के सामने घूमने लगा. उसकी बातें, उसके समझाने का तरीक़ा और राजेश्‍वरी के लिए उसकी आंखों में छिपे भाव…

नहीं, नहीं वह प्यार नहीं कर सकती… ‘पर तुम इतना याद क्यों आ रहे हो? मेरी सोच को, मेरी उमंगों को नयी दिशा देकर आख़िर कहां चले गए हो? पिछले पांच वर्षों के दर्द को मैं तुम्हारा साथ पा भूल रही थी… निर्ममता के साथ जिन अपनत्व के दरवाज़ों को बंद कर दिया था, वे खुलने लगे थे. कहां हो तुम मलय. एक बार आवाज़ दो, फिर तुम्हें जाने नहीं दूंगी…’

“बंदा हाज़िर है, पहले बुला लिया होता तो चला आता.” केबिन के अंदर आते मलय को देख राजेश्‍वरी को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई है. मन की बातें भी सुन लेता है क्या?

“मुझे ही याद कर रही थीं ना? तोड़ दो इस चुप्पी को. बहुत व़क़्त दे दिया मैंने तुम्हें सोचने का.”

आंखों से आंसू बहने लगे राजेश्‍वरी के. इतनी शिद्दत से दिल की बात वही समझ सकता है, जो बेहद प्यार करता हो.

लिपट गई वह मलय से. “तुम ही सच हो मलय. मेरे जीवन के सपने का सच, मेरी ख़ुशियों को रूप देने का सच.”

“बहुत कंजूस हो यार तुम.” आंसू पोंछते हुए मलय ने कहा. “कम से कम चिल्लाकर यह तो कहो कि मैं तुम्हें प्यार करती हूं,” मलय ने बिल्कुल चिल्लाते हुए ही कहा.

राजेश्‍वरी सकुचा गई. उसके हाथों को अपने गालों से छुआते हुए प्यार से उन्हें चूम लिया उसने.

 

सुमन बाजपेयी

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