जब से परीक्षाओं के पेपर लीक हुए भूख हड़ताल, आंदोलन कर रहे लोगों का दौर सा चल रहा है तब से इस पर राजनीति भी ख़ूब हो रही. विपक्ष को तो एक सुनहरा मौक़ा मिल गया सरकार को घेरने का. हर कोई अपने-अपने तरीक़े से स्टूडेंट के फ्यूचर की चिंता के आड़ में अपनी राजनीति की रोटी सेंक रहा है. फिर वे विपक्ष के कोई भी पार्टी के क्यों न हो. पर यहां सवाल यह उठता है कि क्या वाकई में इन पॉलिटिशियन को विद्यार्थियों के भविष्य की चिंता है? शायद नहीं...

छात्रों को अपने अधिकार व भविष्य को लेकर आवाज़ उठाना चाहिए, पर उन्हें इस बात के प्रति भी पूरी तरह से सर्तक रहना चाहिए कि कोई उनके इस जायज़ मांगों का नाजायज़ फ़ायदा तो नहीं उठा रहा! यूं तो आम लोग हो, बड़ी-बड़ी हस्तियां हो या फिर सितारे इस पर कई लोगों ने आक्रोश दिखाए तो कितनों ने समझदारी भरी बातें भी कीं. इसी कड़ी में अनुपम खेर ने अपनी बात कुछ यूं रखी-
छात्र किसी भी देश की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं. उनकी आवाज़ को सुना जाना चाहिए, समझा जाना चाहिए और उसका सम्मान होना चाहिए. मेरी केवल एक प्रार्थना है- अपनी लड़ाई, अपना मुद्दा और अपनी सोच किसी और के हाथों का औज़ार मत बनने दीजिए. यह संदेश किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के भविष्य के पक्ष में है. सुरक्षित रहिए, जागरूक रहिए और अपने विवेक पर हमेशा भरोसा रखिए. जय हिंद!♥️🇮🇳🙏
#students
इसी के साथ उन्होंने लव, तिरंगे और प्रणाम करते हुए इमोजी साझा कीं और स्टूडेंट्स को टैग भी किया.
अनुपम खेर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नीट परीक्षा के पेपर लीक होने पर चल रहे तमाम प्रदर्शनों, नारे बाजियां, आंदोलन, धरना, क्रियाएं-प्रतिक्रियाओं पर एक वीडियो शेयर करते हुए विद्यार्थियों को सजग किया.
उनका कहना है-
मेरे प्यारे छात्रों नमस्ते!
एक-दो तीन पहले आपके प्रदर्शन की तस्वीरें देखकर मन व्याकुल हुआ और दुखी भी. किसी भी छात्र को अपनी बात कहने के लिए ऐसी परिस्थिति से नहीं गुज़रना चाहिए. मैं भी कभी छात्र था. मैंने भी सपने देखे, सवाल पूछे. व्यवस्था से असहमति जताई. आज भी मेरे संस्थान में सैकड़ों विद्यार्थी हैं, इसलिए मैं आपकी बेचैनी, ग़ुस्सा और आपकी उम्मीदें तीनों को समझ सकता हूं. मेरी नज़र में छात्र आंदोलन समाज की सबसे सच्ची आवाज़ होती है. उनमें कोई स्वार्थ नहीं होता. उन्हें बस अपनी भविष्य की चिंता होती है. अपने अधिकारों की बात होती है. और देश को बेहतर बनाने का सपना होता है. इसलिए मैं दिल से आपके साथ हूं.
लेकिन एक और बात मैं आपसे बड़े भाई की तरह कहना चाहता हूं. जब आपके आंदोलन में बाहर के लोग घुसने लगते हैं, राजनीतिक अवसरवादी हर आंदोलन में अपनी मौजूदगी दर्ज़ करवाते लोग या ऐसे तत्व जिनका मक़सद आपका मुद्दा नही, बल्कि अपना एजेेंडा होता है. तब सावधान हो जाइए. शुरू में आपको लगेगा कि जितना ज़्यादा लोग जुड़ेंगे आपकी ताक़त उतनी बढ़ेगी, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता. बहुत बार वही लोग आपकी सबसे बड़ी ताक़त को आपकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बना देते हैं. वो आपकी आवाज़ नहीं बनते. वो आपकी आवाज़ का इस्तेमाल करने लगते हैं. वो आपके दर्द को महसूस करने नहीं आते. वो आपके दर्द पर अपनी राजनीति की इमारत खड़ी करने आते हैं.
धीरे-धीरे मुद्दा आपका नहीं रह जाता. कैमरे उनके हो जाते हैं, नारे उनके हो जाते हैं, मक़सद उनका हो जाता है और शायद नुक़सान आपका. आपकी सच्चाई पीछे छूट जाती है.
आपकी लड़ाई आपकी ही रहनी चाहिए. उसे किसी और के एजेंडे का मंच मत बनने दीजिए. लोकतंत्र में सवाल पूछना आपका अधिकार है. प्रदर्शन करना आपका अधिकार है. अपनी बात मज़बूती से कहना आपका अधिकार है... लेकिन उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी यह भी है कि आपकी आवाज़ पर किसी और का कब्ज़ा ना हो.
याद रखिए, छात्र किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं. आपकी ऊर्जा, आपकी ईमानदारी, आपका आर्दशवाद ही आपकी असली ताक़त है. उसे किसी के हाथ का औज़ार मत बनने दीजिए. मैं आपके साथ हूं. आज भी, कल भी...
मैं चाहता हूं कि आप निडर होकर अपनी बात कहें, लेकिन अपनी शर्तों पर, अपने विवेक से, अपने आत्मसम्मान के साथ!.. ईश्वर आपको स्वस्थ रखें, सुरक्षित रखें और हमेशा सच के साथ खड़े रहने का साहस दें.
नमस्ते!
जय हिंद!
आज देश के युवा छात्रों को ज़रूरत है प्रोटेस्ट के गर्भ में छिपे इन असामाजिक, स्वार्थी जनों को देखने-परखने की, वरना ऐसा न हो हुड़दंग करनेवाले इन मंत्रियों के कठपुतली बनकर रह जाए वे.

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