सनस्क्रीन सिलेक्शन टिप्स

ऐ हुस्न बेपरवाह, मुझे है तेरी चाहत का नशा… गुलाब भी मांगते हैं रंगत तुझसे, ऐसी है कुछ तेरी अदा… तू चलती है जहां, धूप खिलती है वहां… और जो छिप जाती है तू, तो वीरान हो जाता है समां… कभी आंखों में ले जाती है तू ज़माने का नूर छिपाकर, तो कभी आसमान से सपनों को तोड़कर सहलाती है अपनी पलकों पर बैठाकर… साहिल की रेत पर लिखती है तू हुस्न की दास्तान और मैं लहरों-सा मिलता हूं तुझसे होकर तेरे इश्क़ में फ़ना… ये हसरतें मेरी तन्हा-तन्हा सी, तेरी तमन्नाओं में ढलकर पूरी होना चाहती हैं… और चांद की डोली पर सवार होकर, रेशमी तारों से तेरी मांग भरना चाहती हैं…

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सनस्क्रीन लगाना न स़िर्फ गर्मियों में, बल्कि हर मौसम में ज़रूरी है, क्योंकि यह आपको सनटैन, सनबर्न और प्रीमैच्योर एजिंग से प्रोटेक्शन देता है. इसके अलावा इसे अप्लाई करने से स्किन कैंसर होने की संभावना भी कम हो जाती है. लेकिन सनस्क्रीन सिलेक्ट करते व़क्त कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि आपको मिले कंप्लीट प्रोटेक्शन.

– सनस्क्रीन में सबसे महत्वपूर्ण होता है एसपीएफ. कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन सिलेक्ट करना है, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे- आपकी स्किन टाइप, आपके शहर का मौसम और तापमान आदि. भारत चूंकि गर्म प्रदेश है, तो यहां एसपीएफ 30 ही इफेक्टिव होता है.

–  एसपीएफ 15 आपको अधिक से अधिक दो-तीन घंटों तक का ही प्रोटेक्शन दे सकता है.

–  गर्मियों में जब धूप तेज़ होती है, तो बेहतर होगा कि सनस्क्रीन को साथ में कैरी करें.

–   जब बाहर धूप में हों, तो हर 3-4 घंटे में सनस्क्रीन अप्लाई करें.

–  फेस के लिए अलग सनस्क्रीन लें. अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो ऑयल फ्री सनस्क्रीन लें. इसी तरह सेंसिटिव स्किन के लिए भी अलग से सनस्क्रीन लें.

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–   आमतौर पर सनस्क्रीन लगाने के बाद आपकी त्वचा हल्की-सी डार्क पड़ जाती है, इससे बचने के लिए बाहर जाने से लगभग 15 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं, ताकि बाहर जाने तक त्वचा का रंग सामान्य हो जाए.

–  सनस्क्रीन लगाने के बाद अगर आप यह सोचेंगे कि अब आप दिनभर कड़ी धूप में भी रह सकते हैं, तो आप ग़लत सोच रहे हैं. बेहतर होगा कि जहां ज़रूरत न हो, वहां धूप से बचा जाए.

–  अतिरिक्त बचाव के लिए सनग्लासेस और हैट ज़रूर पहनें.

–  सनस्क्रीन ख़रीदते समय उसकी कंसिस्टेंसी भी ज़रूर देखें.  स्प्रे की बजाय क्रीम सनस्क्रीन अच्छे होते हैं.

–  हां, अगर आप क्रीम सनस्क्रीन अप्लाई करके उस पर स्प्रे भी करते हैं, तो सनस्क्रीन का असर ज़्यादा देर तक रहता है.

 

–  अपने स्काल्प के लिए भी अलग से सनस्क्रीन ख़रीदें, क्योंकि वहां धूप डायरेक्ट और तेज़ लगती है. यह स्काल्प को जला सकती है.

–  क्रीम सनस्क्रीन ड्राई स्किन के लिए बेस्ट होता है, जेल सनस्क्रीन स्काल्प के लिए और जहां-जहां बाल हों, जैसे- पुरुषों के सीने पर लगाने के लिए अच्छा होता है. स्टिक्स में उपलब्ध सनस्क्रीन को आप आंखों के आसपास लगाने के काम में ला सकते हैं.

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–  स्प्रे सनस्क्रीन लगाने में आसान ज़रूर होता है, लेकिन उसमें डर होता है कि वो आंखों में, सांस के द्वारा फेफड़ों में या फिर मुंह में जा सकता है.

–  आप सनस्क्रीन में मॉइश्‍चराइज़र भी मिक्स कर सकते हैं. यह और भी प्रभावी होगा.

–  स़िर्फ खुले हिस्से पर ही सनस्क्रीन लगाना है और बाकी पर नहीं, यह धारणा ग़लत है. पूरे शरीर पर लगाएं, क्योंकि आपके कपड़े आपको उतना प्रोटेक्शन नहीं देंगे, जितना सनस्क्रीन लगाने के बाद मिलेगा.

–  ध्यान रहे, तेज़ धूप में यदि बिना सनस्क्रीन के आप बाहर जाएंगे, तो आपकी स्किन जल सकती है, रैशेज़ आ सकते हैं और यहां तक कि ऊपरी त्वचा की परतें भी निकल सकती हैं.

–  कभी भी सनस्क्रीन लगाने के बाद आंखों को ज़ोर से रब न करें, क्योंकि आंखों में अगर वो गया, तो नुक़सान कर सकता है.

–  बहुत छोटे बच्चों को सनस्क्रीन न लगाएं, क्योंकि उनकी त्वचा सेंसिटिव होती है. थोड़े बड़े बच्चों को भी ज़िंक ऑक्साइडयुक्त या टाइटेनियम डायऑक्साइडयुक्त सनस्क्रीन ही लगाएं, क्योंकि ये स्किन में समाते नहीं और त्वचा को नुक़सान नहीं पहुंचाते.

–  अगर सनस्क्रीन की मात्रा की बात करें, तो चेहरे, स्काल्प, बांहों और हाथों पर 1-1 टीस्पून सनस्क्रीन अप्लाई करना चाहिए और 2-2 टीस्पून धड़ के हिस्से पर और प्रत्येक पैर पर लगाएं.

– कमलेश शर्मा