व्यस्त जीवनशैली और दिनभर की भागदौड़ के अलावा घर व ऑफिस की ज़िम्मेदारियों के चलते अधिकांश लोग तनावग्रस्त होते जा रहे हैं और उनकी सुकून भरी रातों की नींद हराम होती जा रही है. पूरे दिन की व्यस्तता के बाद रात में अच्छी और पर्याप्त नींद लेना बेहद ज़रूरी है. अच्छी व गहरी नींद से तन-मन में ताज़गी आती है और मूड भी फ्रेश बना रहता है. इसके साथ ही स्वस्थ नींद स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद भी मानी जाती है. चलिए जानते हैं, स्वस्थ नींद से स्वास्थ्य को होनेवाले फ़ायदों के बारे में.

नींद की कमी से होनेवाली स्वास्थ्य समस्याएं
स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. नींद की कमी या नियमित रूप से सोने के लिए पर्याप्त समय की कमी के कारण स्वास्थ्य से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं.
* आलस्य, थकान और कमज़ोरी महसूस करना.
* दिन में काम के दौरान बार-बार झपकी लेना.
* विचार और प्रतिक्रिया करने की क्षमता पर असर.
* याद्दाश्त और काम करने की क्षमता हो सकती है प्रभावित.
* मूड में बदलाव और चिड़चिड़ापन महसूस होना.
* हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज़ की समस्या.
* मोटापे और दिल की बीमारियों का ख़तरा.
स्वस्थ नींद के सेहतमंद फ़ायदे
बेशक़, नींद सभी को प्यारी होती है, लेकिन समय की कमी के चलते ज़्यादातर लोग रात में सिर्फ़ 5-6 घंटे की नींद ही ले पाते हैं. नींद की कमी से सिर्फ़ शरीर ही नहीं, बल्कि पूरा स्वास्थ्य प्रभावित होता है. वहीं अच्छी और स्वस्थ नींद सेहत के लिए कई तरह से फ़ायदेमंद होती है.
बेहतर होती है याद्दाश्त
एक शोध के अनुसार, जो लोग 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं, वे नई चीज़ों को ज़्यादा देर तक याद रख पाते हैं. इसके साथ ही उनकी याद्दाश्त भी अच्छी रहती है. इसके अलावा अच्छी नींद से दिमाग़ की एकाग्रता, विचार और प्रतिक्रिया करने की क्षमता भी बढ़ती है और दिमाग़ दिनभर सक्रियता से काम करता है.
वज़न नियंत्रित रहता है
नींद और शरीर के वज़न के बीच गहरा संबंध है. एक ओर जहां नींद की कमी वज़न बढ़ाने के साथ ही मोटापे का सबसे बड़ा कारण बन सकती है, तो वहीं पर्याप्त और स्वस्थ नींद न स़िर्फ वज़न को कंट्रोल करने में मदद करती है, बल्कि यह हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करती है.
डिप्रेशन दूर भगाने में मददगार
एक शोध में ख़ुलासा हुआ है कि नींद की कमी या अपर्याप्त नींद लेने वाले क़रीब 90 फ़ीसदी लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं, इसलिए डिप्रेशन को दूर करने के लिए अच्छी और सेहतमंद नींद लेना बेहद ज़रूरी है. अच्छी नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन जैसी समस्या का ख़तरा कम होता है और उनकी मानसिक सेहत भी अच्छी
रहती है.
शरीर की सूजन घटाए
अपर्याप्त नींद या नींद की कमी के कारण शरीर में सेल डैमेज होने का ख़तरा होता है. कम सोने वाले व्यक्तियों में पाचन संबंधी समस्या होने के साथ-साथ पाचनतंत्र में सूजन की शिकायत हो सकती है, जबकि पर्याप्त नींद पाचन को दुरुस्त रखने के साथ ही शरीर के सूजन को घटाने में मदद करती है.
अधिक कैलोरीज़ के सेवन से बचाए
अपर्याप्त नींद लेनेवाले लोगों में लेप्टिन के स्तर में कमी आती है और ग्रेलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसकी वजह से भूख में 24 फ़ीसदी व खाने की इच्छा में 23 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी होती है और न चाहते हुए भी लोग ज़्यादा कैलोरीज़ का सेवन करने लगते हैं, जबकि पर्याप्त और अच्छी नींद लेनेवाले लोगों पर इस तरह का कोई भी असर नहीं होता है और वो कम कैलोरीज़ का सेवन करते हैं.
मिलती है भावनात्मक मज़बूती
अपर्याप्त नींद या कम सोने वाले लोगों के सामाजिक और भावनात्मक संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ता है. ऐसे लोग सामाजिक रिश्तों से दूरी बना लेते हैं और भावनात्मक रूप से कमज़ोर हो जाते हैं. जबकि अच्छी और सेहतमंद नींद लेने वाले लोग भावनात्मक रूप से मज़बूत होते हैं और उनके सामाजिक रिश्ते भी अच्छे
होते हैं.
नहीं आता है जल्दी बुढ़ापा
अगर आप समय से पहले बुढ़ापे का शिकार नहीं होना चाहते हैं तो फिर अपनी सुकून भरी मीठी नींद से समझौता न करें. अमेरिका के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स केस मेडिकल सेंटर में हुए एक शोध में ख़ुलासा किया गया है कि नींद की कमी से चेहरे का जवांपन जल्दी खोने लगता है और व्यक्ति समय से पहले बुढ़ापे का शिकार हो जाता है. नींद त्वचा की उम्र को प्रभावित करता है.
बढ़ती है गर्भधारण की संभावना
दक्षिण कोरिया स्थित ईज यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मां बनने की इच्छुक महिलाओं को रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए. इससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है. वहीं 9 घंटे से अधिक या 7 घंटे से कम सोने वाली महिलाओं में गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है. इसके साथ ही महिलाओं के सोने और उठने के टाइम टेबल का असर भी उनकी गर्भधारण क्षमता पर पड़ता है.
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