जानिए कितना ख़तरनाक है वायु प्रदूषण? (The Health Effects of Air Pollution)

दिल्ली की प्रदूषित हवा की हर जगह चर्चा हो रही है. वायु प्रदूषण (Air Pollution) हमारे स्वास्थ्य (Health) के लिए बेहद हानिकारक (Harmful) होता है. इसके कारण अस्थमा, हार्ट डिज़ीज़ सहित अन्य कई तरह की गंभीर बीमारियां होने का ख़तरा बढ़ जाता है. जानिए कि वायु प्रदूषण हमें किस प्रकार से क्षति पहुंचाता है और इससे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

Air Pollution

ऑटिज़्म के ख़तरे को बढ़ाता है
हाल ही में हुए एक शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि जो गर्भवती महिलाएं ज़्यादा समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेती हैं, उनके बच्चों को ऑटिज़्म होने का ख़तरा अन्य महिलाओं की तुलना में दोगुना होता है. यह ख़तरा गर्भावस्था की तीसरी तिमाही वाली महिलाओं को अपेक्षाकृत ज़्यादा होता है. लेकिन रिसर्च में यह साफ़ नहीं किया गया है कि वायु प्रदूषण विकसित हो रहे मस्तिष्क को किस प्रकार प्रभावित करता है. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के कारण गर्भवती महिलाओं के पूरे शरीर, ख़ासतौर पर यूट्रस में इंफ्लेमेशन होने का ख़तरा बना रहता है, जिसके कारण प्रीमैच्योर बर्थ की आशंका बढ़ जाती है.

फेफड़ों और हृदय को क्षतिग्रस्त करता है
ड्यूक यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च के अनुसार, शहरों में होने वाले वायु प्रदूषण के कारण एक्सरसाइज़ के फ़ायदे कम हो जाते हैं, ख़ासतौर पर 60 से अधिक उम्र के लोगों में. शोध के अनुसार, थोड़े समय के लिए भी ट्रैफिक वाली प्रदूषित हवा में सांस लेने से दो घंटे टहलने का लाभ ख़त्म हो जाता है. इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के 116 लोगों को चुना. इन लोगों को दो ग्रुप्स में बांटा गया. एक ग्रुप को ट्रैफिक वाली जगह में कुछ दिनों तक रोज़ाना टहलने के लिए कहा गया और एक ग्रुप को प्रदूषण मुक्त पार्क में टहलने का निर्देश दिया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग कम प्रदूषण वाले पार्क में टहलने गए, उनके फेफड़ों की क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई, जबकि प्रदूषित स्थान पर टहलने वाले लोगों को एक्सरसाइज़ का ज़्यादा फ़ायदा नहीं मिला. इसलिए शहरों की हवा को शुद्ध करने के लिए ज़्यादा कठोर कदम उठाए जाने की ज़रूरत है.

पुरुषों की फर्टिलिटी को कम करता है
जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा. एक नए अध्ययन से यह सिद्ध हुआ है कि वायु प्रदूषण से वीर्य की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है. हॉन्गकॉन्ग के चायनीज़ यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में 15 से 49 वर्ष की आयुवाले 6,475 पुरुषों के स्पर्म का विश्‍लेषण किया गया. इस शोध में पाया गया कि जो पुरुष ज़्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, उनकी स्पर्म क्वालिटी अन्य पुरुषों की तुलना में उतनी अच्छी नहीं होती. इतना ही नहीं, जो पुरुष अच्छी हवा में सांस लेते हैं, उनके वीर्य की संख्या प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले पुरुषों की तुलना में ज़्यादा होती है.

हड्डियां कमज़ोर होती हैं
द लेंसेट प्लैनेटरी हेल्थ के जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण ऑस्टियोपोरोसिस और उससे जुड़ी बीमारियों के ख़तरे को बढ़ाता है. अध्ययन के अनुसार, कार से निकलनेवाला धुंआ, लकड़ी जलाने पर निकलने वाला धुंआ इत्यादि कारणों से एयरबोर्न पार्टिकल्स में होनेवाली बढ़ोत्तरी के कारण उम्रदराज़ लोगों की हड्डियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इस शोध में पाया गया है कि जो लोग ज़्यादा प्रदूषित जगहों पर रहते हैं, उनके शरीर में बोन रिलेटेड हार्मोन पैराथायरॉइड का स्राव कम होता है. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई कि वायु प्रदूषण किस प्रकार हड्डियों को कमज़ोर बनाता है.

किडनी को नुकसान पहुंचाता है
आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि वायु प्रदूषण स़िर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि किडनी को भी क्षति पहुंचता है. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्त्ताओं ने वायु प्रदूषण का किडनी पर पड़नेवाले प्रभाव को जानने के लिए 8 वर्ष से अधिक समय तक अध्ययन किया. उन्होंने अध्ययन के दौरान, 44, 793 किडनी संबंधी बीमारियों के केसेज़ और 2,338 किडनी फेल होने के केसेज़ का पता लगाया, जो वायु प्रदूषण से जुड़े हुए थे. शोधकर्त्ताओं के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद माइक्रोस्कोपिक पार्टिकल्स ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाते हैं. चूंकि किडनी का प्रमुख कार्य हमारे रक्त को फिल्टर करना है, इसलिए इन प्रदूषित तत्वों को फिल्टर करने के कारण ये हानिकारक तत्व किडनी में बड़ी संख्या में एकत्रित हो जाते हैं. शोधकर्त्ताओं के अनुसार, जितना अधिक वायु प्रदूषण होता है, किडनी को उतनी अधिक क्षति पहुंचती है.

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त्वचा क्षतिग्रस्त होती है
बहुत से अध्ययनों में पाया गया है कि प्रदूषित जगहों पर रहनेवाले लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होने की आशंका अधिक होती है. ऐसे लोगों की त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो जाती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद हानिकारक तत्व स्किन सेल्स को क्षतिग्रस्त कर देते हैं और त्वचा के स्वाभाविक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिसके कारण त्वचा पर दाग़-धब्बे व झुर्रियां इत्यादि नज़र आने लगते हैं.

सिरदर्द बढ़ाता है
वायु प्रदूषण के कारण सिरदर्द की आशंका भी बढ़ जाती है. हालांकि इस बात के संकेत अभी तक नहीं मिले हैं कि वायु प्रदूषण किस प्रकार सिरदर्द और माइग्रेन को बढ़ावा देता है, लेकिन एक अध्ययन में पाया गया कि जिस दिन वायु प्रदूषण अधिक होता है, उस दिन सिरदर्द और माइग्रेन के केसेज़ ज़्यादा देखने को मिलते हैं.

फेफड़ों संबंधी बीमारी होती है
प्रदूषण का सबसे बुरा प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है. जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण हमारे फेफड़ों में चले जाते हैं, जिसका हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. हाई लेवल वाले ओज़ोन और पीएम में सांस लेने से फेफड़ों की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और फेफड़ों से संबंधित बीमारी होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है.

हार्ट अटैक व स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है
प्रदूषण और हृदय का गहरा संबंध है. प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सूजन आ सकती है, जिसके कारण हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ सकता है. यही वजह है कि प्रदूषित जगहों पर हार्ट अटैक व स्ट्रोक के केसेज़ ज़्यादा दर्ज किए जाते हैं, इसलिए प्रदूषित जगहों पर कम जाएं. अगर प्रदूषण ज़्यादा है तो खुली हवा में एक्सरसाइज़ करने या टहलने की बजाय जिम में जाकर एक्सरसाइज़ करें. साथ ही घर की हवा को शुद्ध रखने का प्रयास करें.

नर्वस सिस्टम पर दुष्प्रभाव
नर्वस सिस्टम हमारे शरीर का कंट्रोल सिस्टम है और इसके अंतर्गत हमारा मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नर्व्स आते हैं. जब प्रदूषित कण हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं, तो नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है, जिसके कारण अनावश्यक इम्यून रिस्पॉन्सेज़ एक्टिवेट हो जाते हैं. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण अल्ज़ाइमर, पार्किन्सन और मस्तिष्क से जुड़ी अन्य बीमारियां होने का ख़तरा अधिक होता है.

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