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रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

Psychology Of Relationships
रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)
मेरी उम्र 27 साल है. सगाई हुए एक साल हो गया है. घरवाले शादी की जल्दी कर रहे हैं, पर मैं अभी भी शादी को लेकर, होनेवाले पति और उनके व्यवहार को लेकर काफ़ी असमंजस में हूं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से हिचक रही हूं. मन में एक अजीब-सा डर है.

- आशालता, चंडीगढ़.

कोई भी नया निर्णय लेना आसान नहीं होता. ख़ासकर तब, जब वह हमारे जीवन और भविष्य से संबंधित हो. शादी का निर्णय लेने से पहले कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, जैसे- शादी को लेकर आपकी अपेक्षाएं, आपकी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तैयारी, क्या आप पूरी तरह से और यहां तक कि आर्थिक तौर पर भी तैयार हैं नए जीवन, नए रिश्तों व नए परिवार की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए? ख़ुद से यह सवाल करें, आत्म विश्‍लेषण करें. घर के बड़ों से, अनुभवी दोस्तों से सलाह लें. परिवार या समाज के दबाव में आकर कोई निर्णय ना लें. यह भी पढ़े: सेक्स प्रॉब्लम्स- पति छुपकर मास्टरबेशन करते हैं… (Sex Problems- My Husband Do Masturbating Secretly) मेरी दो बेटियां हैं. एक की उम्र है 16 साल और दूसरी 14 साल की है. उनके आजकल के बर्ताव से बहुत परेशान रहती हूं. उनके कपड़ों का, जूते-चप्पलों का चयन भी बहुत बदल गया है. वो अपनी ही दुनिया में रहती हैं. किसी को कुछ समझती ही नहीं. मेरी किसी बात का उन पर कोई असर नहीं होता. दोस्तों का साथ उन्हें ज़्यादा पंसद है. क्या करूं, बेहद परेशान हूं.

- नौशीन, कोलकाता.

किशोरावस्था में बच्चों को संभालना अपने आप में एक चुनौती है. आजकल का इंटरनेट युग इसे और भी मुश्किल बना रहा है. आपको संयम से काम लेना होगा. उनसे बहुत ज़्यादा कठोरता से पेश न आएं. उनकी उम्र को देखते हुए आपको उनसे दोस्ताना व्यवहार करना होगा. घर-परिवार का माहौल प्यारभरा बनाए रखें और उनका विश्‍वास जीतें. बात-बात पर रोक-टोक न करें. उनकी दोस्त बनकर रहेंगी, तो वो आपसे दूरी नहीं बानएंगी और मन की बात भी शेयर करने से नहीं हिचकिचाएंगी. हां, उनके दोस्तों के बारे में जानकारी ज़रूर रखें, ताकि वो ग़लत संगत में न पड़ जाएं, लेकिन ध्यान रहे कि आपकी बच्चियों को यह न लगे कि आप उनकी जासूसी करती हैं. मेरे पति काम के सिलसिले में ज़्यादातर बाहर रहते हैं. मेरा एक छोटा बेटा है. घर-बाहर का सारा काम मुझे ही देखना पड़ता है. लगता है मानो मेरा सारा जीवन बस इन्हीं उलझनों में उलझकर रह गया है. अपने लिए तो समय ही नहीं रहा अब.

- रजनी शर्मा, मुंबई.

अभी आपका बेटा छोटा है और मां होने के नाते उसके प्रति आपकी ज़िम्मेदारी बनती है. पति काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, तो यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि उनके पास ना होने से उनकी जगह भी आप लें. बेटे का बचपन और भविष्य सवांरने पर ध्यान दें. कुछ ही सालों में जब वह बड़ा हो जाएगा, आपके पास समय ही समय होगा अपने लिए. तब आप अपने बेटे के साथ को तरसेंगी. बेहतर है, आज जब वह आप पर निर्भर है और आप का समय और अटेंशन चाहता है, तो उसे वह सब दें, जिससे वो कामयाब जीवन की ओर बढ़ सके. जीवन के हर दौर का अपना एक अलग ही मज़ा होता है. हर दौर को भरपूर जीएं और उसका आनंद उठाएं. अगर नकारात्मक सोच रखेंगी, तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगी. हां, यदि आप पर काम का बोझ अधिक बढ़ गया है, तो बेहतर होगा अपने पति से बात करें. हो सकता है वो कुछ अधिक समय आपके व बच्चे के लिए निकाल पाएं. Zeenat Jahan ज़ीनत जहान एडवांस लाइफ कोच व सायकोलॉजिकल काउंसलर [email protected] यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

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