घर हो या ऑफिस, आपके आसपास कोई-न-कोई एक इंसान ऐसा ज़रूर होता है, जो निगेटिव सोचवाला होता है, हमेशा निगेटिव बातें करता है. ऐसे लोगों को पहचानें जो आपकी पॉजिटिविटी को नुक़सान पहुंचाते हैं और हेल्दी वातावरण को ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.
लगातार परेशान रहना, हमेशा लोगों से किसी-न-किसी बात पर शिकायत करना, आत्मविश्वास की कमी, निराशा और चिंता- ये ऐसे कारण हैं जो आपके मन को नहीं बल्कि तन को भी तोड़ देते हैं. ये संकेत होते हैं नकारात्मक लोगों के. जो ख़ुद तो परेशान होते हैं, साथ ही अपने आसपास के लोगों की ज़िंदगी को भी झंड कर देते हैं.
सभी लोगों के जीवन में अच्छा-बुरा समय आता है. सकारात्मक व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच रखता है- सब अच्छा होगा, बुरा वक्त बीत जाएगा, हमें विश्वास बनाए रखना है. कर लेंगे चिंता की बात नहीं है… जैसे सकारात्मक वाक्य उसकी सोच को जीवंत बनाए रखते हैं, लेकिन हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जो हमेशा निराशावादी बातें करते हैं. दूसरों का मनोबल तोड़ते हैं. इनके अलावा और क्या संकेत होते हैं निगेटिव लोगों के, हम आपको बताते हैं.

- लगातार शिकायत करना: नकारात्मक लोगों की सबसे पहली और अहम निशानी होती है- जब भी किसी से कहीं भी मिलते हैं, हमेशा लोगों से हर छोटी बड़ी बात पर शिकायत करते हैं. ये शिकायत उनकी अपनी नौकरी, अपने रिश्तों से लेकर हर चीज़ में कमियां निकालने की आदत होती है. हमेशा अपनी नाराज़गी जाहिर करना उनका स्वभाव होता है, जिससे माहौल में उदासीनता पैदा होती है और वहां पर मौजूद लोगों का मूड ख़राब हो जाता है. असल में ऐसे व्यक्ति से निपटना एक कड़ी चुनौती और थका देने वाला टास्क है. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से हैं, तो संभल जाएं. आप भले ही किसी से कितना अच्छा व्यवहार कर लें. लेकिन आपकी शिकायत करने की आदत आपको दूसरों से दूर कर सकती है. इस आदत को तुरंत बदलें.
2. भविष्य के प्रति हमेशा नकारात्मक सोच: निगेटिव लोगों की ख़ासियत होती है कि वे हर समय निगेटिव बातें करते हैं, उनकी सोच निराशावादी होती है. उनको ऐसा लगता है कि हालात हमेशा ऐसे ही रहेंगे. चीज़ें कभी नहीं बदलेंगी. भविष्य के प्रति लगातार नकारात्मकता न केवल उनकी तरक्की को प्रभावित करती है, बल्कि उनकी सोच अपने आसपास के लोगों की तरक्की पर गहरा असर डालती हैं. नकारात्मक लोगों का ऐसा व्यवहार दूसरे लोगों के लिए किसी मेंटल टॉर्चर से कम नहीं होता.
3. ज़िम्मेदारियों से भागना: अपने काम और परिस्थितियों की ज़िम्मेदारी न लेना- ये किसी व्यक्ति के नकारात्मक होने के संकेत हैं. ऐसे लोग काम नहीं करते हैं. ज़िम्मेदारी उठाने से बचते हैं और दूसरों को दोष देते हैं. ज़िम्मेदारियों से भागने की एक वजह- असफलता या आलोचना का डर भी होता है. हमेशा नकारात्मक सोचना और सकारात्मक बातों की तरफ़ ध्यान न देना निगेटिव लोगों की निशानी होती है, जिसके कारण रिश्तों में भी दरार आती है.
4. हमेशा लोगों में बुराई देखना: नकारात्मक लोगों की ये आदत होती है कि वे हमेशा हर इंसान में, हर चीज़ में सिर्फ़ बुराई देखते हैं. लोगों के प्रति उनकी सोच ग़लत होती है. वे लोगों के साथ निराशावादी व्यवहार रखते हैं. इनका नज़रिया शक्की होता है. दूसरों पर बहुत कम भरोसा करते हैं, जिससे पर्सनल और प्रोफेशनल रिश्तों में तनाव पैदा होता है.
लोगों में ये नकारात्मक संकेत तब पैदा होता है, जब किसी ने उनके साथ विश्वासघात किया हो, या फिर उनके अपने पिछले निराशावादी अनुभव के आधार पर. ऐसे लोग दूसरों में लगातार बुराइयां देखकर, न केवल अपने रिश्तों को ख़राब करते हैं, अपने बल्कि आसपास अविश्वास और नकारात्मकता का माहौल क्रिएट करते हैं.
5. बिना बात के दूसरों की आलोचना करना: नकरात्मक लोगों में बिना किसी वजह के दूसरों की आलोचना करने की प्रवृत्ति होती है. वे दूसरों की कमियों और खामियों को उजागर करने में अपनी महानता समझते हैं. उनके द्वारा बार-बार की जाने वाली आलोचना लोगों को आहत करती है और तनावपूर्ण माहौल पैदा होता है.
6. इनके पास कभी समाधान नहीं होता: निगेटिव लोगों की ये ख़ासियत होती है कि समाधान के बजाय समस्या पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं. परिस्थितियों को बेहतर बनाने की बजाय नकारात्मक विचारों पर उनका ध्यान केंद्रित रहता है. समस्या को बढ़ा-चढ़कर पेश करते हैं. निराशा के जाल में फंसे हुए ये लोग अपने काम को क्रिएटिव तरीके से नहीं पाते है. उनका ये निराशावादी नज़रिया अन्य लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है.
7. जासूसों की तरह दूसरों पर पैनी नज़र रखना: नकारात्मक किस्म के लोग कुछ नहीं करते, लेकिन हर समय उनकी नज़र दूसरों का पीछा करती रहती है कि कौन क्या कर रहा है और कैसे कर रहा है? अपनी लाइफ पर ध्यान देने की बजाय वे अपना अधिकतर समय दूसरों लोगों की बातें कान लगाकर सुनने में बिताते हैं. और फिर वही बातें पूरी दुनिया में फैला देते हैं. ऐसे लोगों से बचकर रहना बेहद ज़रूरी है.

8. छोटी-छोटी बातों पर ओवर रिएक्ट करना: जिन लोगों की सोच और व्यवहार निगेटिव होता है, वे हर छोटी बात पर रिएक्ट करते हैं. दूसरे लोगों को नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. ऐसे लोग विश्वास के लायक नहीं होते हैं. दूसरों की पूरी बात सुनने से पहले ख़ुद का रिएक्शन देना इन लोगों की आदत होती है.
9. दूसरे लोगों को चुभने वाली बातें कहना: निगेटिव लोगों को स्पष्टवादी लोग कभी पसंद नहीं आते हैं. नकारात्मक लोगों को जो लोग पसंद नहीं आते हैं बातचीत के दौरान उन्हें चुभने और ठेस पहुंचाने वाले शब्द कहने से नहीं चूकते है. बात-बात में ताने मारना और उनकी गलतियों को सबके सामने उछालना इन्हें अच्छा लगता है.
10. अपनी बातों को ऊपर रखना: नकारात्मक लोगों की एक पहचान ये भी होती है कि वे हमेशा अपनी बातों को ऊपर रखते हैं. दूसरों की बातों को महत्व नहीं देते हैं.
बॉक्स मैटर
कैसे रखें निगेटिव लोगों से दूरी?
– खाली वक्त में दूसरों को कोसने और उनकी कमज़रियों को प्वाइंट आउट करने की बजाय कुछ नया सीखने का प्रयास करें.
– दूसरों की निराशावादी बातों को अपने पर हावी न होने दें.
– बार-बार दूसरों की आलोचना करने की बजाय सेल्फ रेस्पेक्ट का ख्याल करें.
– नकारात्मक लोगों के साथ अपनी बाउंड्रीज तय करें कि बार-बार उनके आलोचनात्मक कमेंट्स स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
अंत में यही कहना उचित होगा कि पर्सनल हो या प्रोफेशनल लाइफ दोनों मोर्चों पर पॉजिटिव और हेल्दी वातावरण बनाए रखें. और अपने आसपास मौजूद लोगों में इन संकेतों को पहचानें. निगेटिव लोग आपकी सफलता के मार्ग में रुकावट पैदा कर सकते हैं. बेहतर होगा कि ऐसे निगेटिव लोगों से दूरी बनाए रखें.
– पूनम कोठारी
