किन बातों से डरते हैं पुरुष ? (What Scares Men)

आमतौर पर यही माना जाता है कि डर स़िर्फ लड़कियों के व्यक्तित्व का हिस्सा होता है और पुरुषों से तो दूर-दूर तक इसका कोई वास्ता नहीं होता. लेकिन सच्चाई ये है कि पुरुष भी डरते(What Scares Men) हैं. उनके मन में भी कई तरह के डर समाए होते हैं. बाहर से चाहे वे कितनी भी बहादुरी दिखाएं, लेकिन उनके मन के किसी कोने में भी डर का एहसास समाया होता है. सच तो ये है कि हर पुरुष के अंदर जीवन भर एक बच्चा छिपा रहता है. वे भी बार-बार डरते हैं और कुछ डर तो उनके पीछे नहीं, बल्कि हमेशा साथ-साथ चलते हैं. आइए जानते हैं पुरुषों के डर के कुछ ऐसे ही कारणों को.

What Scares Men

रिजेक्शन का डर:  रिजेक्शन एक ऐसी आशंका है, जो हर लड़के के इर्द-गिर्द डर के रूप में हावी रहती है. ठुकराया जाना, चाहे वो ज़िंदगी के किसी भी मामले में हो, पुरुषों के अहं को चोट पहुंचाता है, ख़ासतौर पर अगर ये रिजेक्शन अपने महबूब या साथी द्वारा हो. अपनी मनपसंद लड़की को प्रपोज़ करने के लिए लड़कों को कितनी हिम्मत जुटानी पड़ती है, इसका अंदाज़ा वही लगा सकते हैं. उस पर ठुकरा दिए जाने का डर उनके दिन का चैन और रात की नींद हराम कर देता है. यह डर हर पुरुष के दिल में समाया रहता है कि कहीं वह अपनी ड्रीमगर्ल द्वारा रिजेक्ट न कर दिया जाए.

मनचाहा जॉब न मिलने का डरः काम करना और कमा कर लाना पुरुषों की ज़रूरी योग्यताएं मानी जाती हैं, इसलिए पढ़ाई पूरी होते ही कुछ न कुछ काम तो करना ही होगा, लेकिन क्या मनचाहा जॉब मिलेगा? यह एक बड़ा डर है, जो पुरुषों को हमेशा सताता रहता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी जॉब से समझौता करना पड़ेगा और ज़िंदगी भर उसमें बंधे रहना पड़ेगा? और ऐसे तमाम सवाल उसके मन में डर पैदा कर देते हैं, जिसे स़िर्फ और स़िर्फ वही समझ सकता है.

समाज में अपनी स्थिति बनाए रखने का डर: ढेर सारा बैंक बैलेंस, बड़ा-सा ख़ूबसूरत घर और शानदार गाड़ियां, परिवार में हर सदस्य की बढ़ती चाहतों की लिस्ट को पूरा कर पाने की ज़द्दोजेहद, यह आज के हर पुरुष का डर है. मार्केट में लॉन्च होते नए प्रोडक्ट, परिवार के लिए सुख-सुविधाएं जुटाना, परिवार में किसकी फ़रमाइश पूरी करें, किसकी छोड़ें. उस पर समाज में रुतबा बनाए रखने के लिए अच्छा रहन-सहन जुटाना. हर चीज़ के लिए ज़रूरत है ढेर सारे पैसों की, जिसे स़िर्फ उसे ही जुटाना है. यह डर पुरुषों के लिए बहुत बड़ा होता है और परेशानी का सबब भी, जिससे उबर पाना आसान नहीं होता.

अकेलेपन का डर: अकेले रहना पुरुषों के लिए भी आसान नहीं है. शायद अकेलेपन के इस एहसास से बचने के लिए वो सबसे पहले ढूंढ़ते हैं एक हमसफ़र, जो उन्हें पल-पल प्यार और साथ दे. मनपसंद साथी मिलते ही उनमें इच्छा जागती है प्यारे-प्यारे बच्चों की. कुल मिलाकर हर समय वह अपनों से घिरे रहना चाहता है. ऑफ़िस से जब वो घर आता है तो अपनों को देखकर ही सारी थकान मिटा लेता है. यानी अकेलेपन के डर से हमेशा वो अपने आपको बचाए रखना चाहता है.

सच्चे प्यार की चाहत: पुरुष अपनी प्रेमिका या पत्नी को सर-आंखों पर बिठाकर रखता है, उसकी हर फ़रमाइश को पूरा करने के लिए जी-जान एक कर देता है. उसके कान स़िर्फ यह सुनने के लिए बेताब रहते हैं कि वह उनसे बेहद प्यार करती है. उसे दिल की गहराइयों से चाहती है. संबंधों की इस गहराई को पाने के लिए ही पुरुष सारी भाग-दौड़ करता है. अपनी पत्नी या प्रेमिका से वफ़ा मिलेगी या नहीं, यह डर भी उसे काफ़ी सताता है.

असफलता का डर: पुरुष ज़िंदगी के हर मोड़ पर सफलता चाहता है. क़ामयाबी यानी जीत और नाक़ामयाबी यानी हार- बस, इसी हार-जीत के गणित में उलझा रहता है पुरुष. ज़िंदगी में सफलता मिलेगी या नहीं? जो सपने देखे हैं, वो पूरे होंगे या नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि हर ख़्वाहिश अधूरी रह जाएगी? सफलता आते-आते हाथ से छूट तो नहीं जाएगी? फिर चाहे वह पैसे का मामला हो या शादी का. चूकना किसी भी पुरुष को पसंद नहीं. वह हमेशा सफल होना चाहता है.
बाहर से चट्टान की तरह मज़बूत दिखने वाले पुरुष भी अंदर कितने डर समेटे रहते हैं और वो डर उनके मन को कितना परेशान किए रहते हैं ये उनके मन में झांकने पर ही पता चलेगा, इसलिए भूल जाइए इस बात को कि पुरुषों का डर से कोई वास्ता नहीं है. ऊपर से बहुत स्ट्रॉन्ग दिखनेवाला पुरुष मन भीतर से बहुत भयभीत भी होता है.

– ज्योत्सना ‘प्रवाह’

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