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#Woman’s Health: असंतुलित हार्मोंस के लिए योगासन (Yoga For Hormonal Imbalance)

महिलाएं अक्सर घर और बाहर की ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करती हैं. एक्सरसाइज़ न करना, असंतुलित जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें- इन सब कारणों से उनके हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं और हार्मोनल असंतुलन के कारण वे मोटापा, पीसीओएस और थायरॉयड जैसी बीमारियों का शिकार हो जाती हैं. लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के साथ ही योगासन से हार्मोनल असंतुलन की इस समस्या से राहत पाई जा सकती है.

भुजंगासन

– ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएं.

– अपनी दोनों हथेलियों को ज़मीन पर कंधे की चौड़ाई से अलग रखते हुए

– शरीर के निचले भाग को ज़मीन पर रखें.

– पुश अप मुद्रा की तरह.

– सांस लें और शरीर के ऊपरी भाग को ज़मीन से ऊपर उठाएं.

– सांस छोड़ते हुए पहली वाली अवस्था में आ जाएं.

लाभ

– भुजंगासन पेट की चर्बी को कम करने में सहायक होता है.

– फेफड़ों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह आसन बहुत लाभदायक होता है.

– भुजंगासन एक स्ट्रेचिंग आसन है. यह कंधे का दर्द और तनाव को दूर करने में मदद करता है.

– नियमित रूप से ये आसन करने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है.

– वज़न कम करने में सहायक है.

– असंतुलित हार्मोंस को बैलेंस करने में मदद करता है.

सेतुबंधासन

– पीठ के बल लेट जाएं.

– पैरों को मोड़कर कूल्हों के करीब ले आएं. जितना करीब हो सके, उतना लाएं.

– सांस लेते हुए हाथों पर भार डालते हुए धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं.

– पैरों को मज़बूती से टिका कर रखें. पीठ जितना हो सके, क्षमतानुसार ऊपर उठाएं.

– इस मुद्रा में 5-10 सेकेंड रहें.

लाभ

– इस आसन को नियमित रूप से करने से मासिक धर्म संबंधी परेशानियां दूर होती हैं.

– ये आसन करने से हार्मोन्स संतुलित रहते हैं.

– रीढ़ की हड्डी को मज़बूत बनाने में मदद करता है.

– पाचन तंत्र को बेहतर करता है.

– यह आसन निद्रा, चिंता और थकान को दूर करने में सहायक है.

पश्‍चिमोत्तानासन

– दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं.

– सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएं, फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें.

– धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों से अपने पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें और अपने नाक से घुटनों को छूने की कोशिश करें.

– धीरे धीरे सांस लें और छोड़ें. कुछ देर इसी अवस्था में रहें.

लाभ

– मासिक धर्म के दौरान होने वाली तकलीफों से राहत दिलाता है.

– ये आसन कमर की जकड़न दूर करता है और दर्द से राहत देता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव रह पाते हैं.

– दिमाग़ को शांत कर तनाव दूर करने में मदद करता है.

– डिप्रेशन से राहत दिलाने में मदद करता है.

– इस आसन से स्पर्म से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है.

उष्ट्रासन

– घुटनों के बल या वज्रासन में बैठ जाएं.

– ध्यान रहे जांघ तथा पैर एक सीध में हों.

– अब अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं और गहरी सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें. दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें.

– शरीर का वजन बांहों तथा पांवों पर समान रूप से होना चाहिए.

– धीरे-धीरे सांस लें और धीरे धीरे छोड़ें.

– लंबी गहरी सांस छोड़ते पूर्व अवस्था में आ जाएं.

लाभ

– मासिक धर्म के दौरान होने वाले तेज़ दर्द से राहत प्रदान करता है.

– कमर के निचले हिस्से में दर्द में राहत देता है.

– रोज़ाना ये आसन करने से बॉडी में फ्लेक्सिबिलिटी आती है.

– बॉडी पोस्चर में सुधार होता है.

– ये आसन नियमित करने से कमर और कंधे मज़बूत बनते हैं.

मकरासन

– पेट के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को मोड़कर कोहनियों को जमीन पर टिकाएं.

– आरामदायक अवस्था के लिए अपनी ठुड्डी को अपने दोनों हथेलियों पर रखें.

– गहरी सांस लेते हुए अपने दाएं पैर को मोड़ें और फिर सांस को छोड़ते हुए इसे सीधा कर लें.

– इसी प्रक्रिया को दूसरे पैर से भी दोहराएं.

– फिर कुछ मिनट बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं.

लाभ

– कमर और पीठ दर्द से राहत दिलाने के साथ ही यह आसन हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में भी मदद करता है.

– रोज़ इस आसन को करने से मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनती हैं.

– अस्थमा में यह आसान बहुत लाभदायक है.

– इस आसन को करने से साइटिका और स्लिप डिस्क की समस्या भी दूर होती है.

– यह आसन शारीरिक थकान, गर्दन की अकड़न और पेट संबंधी समस्याओं को ठीक करता है.

– मकरासन से डिप्रेशन में बहुत हद तक काबू पाया जा सकता है.

– अनुभूति कोठारी

नोट: बेहतर होगा कि आप योगासन किसी एक्सपर्ट की देख-रेख में करें और यदि आप किसी गंभीर रोग से ग्रसित हैं या जो महिलाएं गर्भवती हैं वो अपने डॉक्टर और योग गुरू की सलाह से ही कोई भी आसन करें.

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