
क्या आप अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो पीपीएफ आपके लिए बेहतरीन विकल्प है. यह एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है, जिसमें जोख़िम न के बराबर होता है और लाभ बहुत अधिक. लेकिन क्या आप पीपीएफ अकाउंट से जु़ड़े नियमों के बारे में जानते हैं, अगर नहीं तो हम इसके बारे में यहां पर बता रहे हैं विस्तार से.

जमा कर सकते हैं इच्छानुसार रकम
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) सुरक्षित भविष्य के लिए बेहतरीन विकल्प है, जिसमें आप 500 रुपए से लेकर डेढ़ लाख तक की राशि अपनी इच्छानुसार सालाना जमा कर सकते हैं. यदि किसी कारण से आप पीपीएफ अकाउंट में न्यूनतम राशि का निवेश भी नहीं कर पा रहे हैं, तोे प्रतिवर्ष के हिसाब से 50 रुपए का जुर्माना देकर दोबारा से पीपीएफ अकाउंट आरंभ कर सकते हैं.
टैक्स फ्री (करमुक्त) है पीपीएफ
पीपीएफ से जुड़ी सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें जमा राशि, इस जमाराशि पर मिलनेवाले ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलनेवाली राशि तीनों ही टैक्स फ्री होती हैं. इसलिए पीपीएफ ङ्गईईईफ यानी शुशािीं, शुशािीं और शुशािीं के अन्तर्गत
आता है.
टैक्स फ्री होता है पीपीएफ पर मिलनेवाला ब्याज़
यदि आप निवेश करने के इच्छुक हैं, तो आपके लिए निवेश करने का बेहतरीन विकल्प है पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), क्योंकि इसमें मिलनेवाला ब्याज़ टैक्स फ्री होता है. इसका लाभ आपको इनकम टैक्स में भी मिलता है. यदि आप आयकर की धारा 80जी के तहत पीपीएफ में निवेश करते हैं, तो पीपीएफ में जमाराशि को अपने दस्तावेज़ों में दिखाकर टैक्स का लाभ उठा सकते हैं. इसके अतिरिक्त पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश करने का एक अन्य लाभ यह है कि मैच्योरिटी डेट पर मिलनेवाली जमाराशि कर मुक्त होती है यानी इस पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है. इसलिए पीपीएफ आयकर संबंधी निवेश के लिए नौकरीपेशा लोगों का मनपसंद ऑप्शन है.
तिमाही ब्याज़ दर
बैंक व अन्य गैर वित्तीय संस्थाओं की तुलना में पीपीएफ की ब्याज़ दर भले ही कम हो, लेकिन फिर भी यह निवेश करने का बेस्ट ऑप्शन है. पहले ब्याज़ दर तय करने का फैसला वार्षिक होता था. पीपीएफ के नियमों में आए बदलाव के चलते अब ब्याज़ की यह दर तिमाही तय होती है.
15 साल से पहले क्लोज़ कर सकते हैं पीपीएफ अकाउंट
पीपीएफ के पुराने नियमों के अनुसार आप अपना पीपीएफ 15 साल से पहले क्लोज़ नहीं कर सकते थे, लेकिन 1 अप्रैल, 2016 से पीपीएफ के नए नियम लागू किए गए हैं. इन नए नियमों के अनुसार आप अपने पीपीएफ अकाउंट को 15 साल से पहले भी बंद कर सकते हैं और अपनी जमाराशि को निकाल भी सकते हैं, लेकिन ऐसा आप केवल कुछ विशेष स्थितियों में ही कर सकते हैं. यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि आप इस नियम का लाभ तभी उठा सकते हैं, जब आपको अपना पीपीएफ अकाउंट खोले हुए पांच साल हो गए हों. दूसरे शब्दों में कहें, तो यदि आपके पीपीएफ को 5 साल हो गए हैैं, तो आप इस नियम का लाभ उठाकर अपनी जमाराशि को निकाल सकते हैं.
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नाबालिग का पीपीएफ अकाउंट
नाबालिग के नाम से कभी भी पीपीएफ अकाउंट नहीं खोला जा सकता है, लेकिन नाबालिग की ओर से (उसके बेहतर भविष्य के लिए) उसके माता-पिता द्वारा पीपीएफ अकाउंट खोला जा सकता है. पर यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि माता-पिता एक ही नाबालिग के नाम से अपना अलग-अलग पीपीएफ अकाउंट नहीं खोल सकते हैं. यानी या तो मां नाबालिग के नाम पीपीएफ अकाउंट खोल सकती है या फिर पिता. इसके अलावा पब्लिक प्रोविडेंट फंड के नियमों के अनुसार माता-पिता के न होने की स्थिति में नाबालिग के दादा-दादी भी उसका पीपीएफ अकाउंट नहीं खोल सकते हैं. वे नाबालिग का पीपीएफ अकाउंट तभी खोल सकते हैं, जब माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्हें क़ानूनी तौर पर अभिभावक के रूप में नियुक्त किया जाए.
किन स्थितियों में निकाल सकते हैं पीपीएफ की रक़म
बेशक आप पीपीएफ अकाउंट खोलने के 5 साल बाद और 15 वर्ष पूरे होने से पहले अपना पीपीएफ अकाउंट बंद कर सकते हैं, लेकिन ऐसा आप केवल कुछ मामलों में ही कर सकते हैं, जैसे- गंभीर बीमारी का इलाज कराने के लिए और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए. लेकिन इसके लिए आपको बीमारी और उच्च शिक्षा से संबंधित दस्तावेज़ पीपीएफ कार्यालय में जमा कराने होंगे. यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह कि अगर आपके पीपीएफ अकाउंट को खोले हुए 5 साल हो गए हैं, तभी इन स्थितियों में जमाराशि निकाल सकते हैं.
नामांकन (नॉमिनेशन)
पीपीएफ अकाउंट खोलते समय आपको आवेदन फॉर्म में नामांकन का प्रावधान नहीं मिलेगा. यानी आवेदन फॉर्म में नामांकन (नॉमिनेशन) का बॉक्स नहीं होता. अगर आप अपने पीपीएफ अकाउंट में किसी को नॉमिनी बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अलग से फॉर्म-ई भरना होगा, ताकि बाद में आप किसी तरह की क़ानूनी उलझन में न फंसें.
कोई भी दूसरा व्यक्ति आपके पीपीएफ जमाराशि पर क्लेम नहीं कर सकता
पीपीएफ की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि अगर आप किसी कर्ज़ के तले दबे हुए हैं या फिर आपने बैंक का कोई लोन नहीं चुकाया है, तो कोई भी देनदार आपके पीपीएफ अकाउंट में जमाराशि पर क्लेम नहीं कर सकता है. यहां तक कि देनदार अदालत के ज़रिए भी कर्ज़ चुकाने के लिए आप पर दबाव नहीं बना सकता है. लेकिन अगर आपने आयकर नहीं भरा है, तो आयकर विभाग को पूरा अधिकार है कि वह कर संबंधी सभी दस्तोवेज़ों को जमा कराकर और आपके पीपीएफ अकाउंट में बकाया देयता (आउटस्टैडिंग लायबिलिटी) दिखाकर कर वसूल कर सकता है.
15 साल से पहले बंद करने पर देनी होगी पेनाल्टी
पीपीएफ के नए नियमों के अनुसार 15 साल पूरे होने से पहले पीपीएफ अकाउंट क्लोज़ किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको जुर्माना (पेनाल्टी) देना होगा. ज़ुर्माने के तौर पर आपको 1% का ब्याज़ देना होगा, जो कि आपको अपनी कुल जमाराशि पर होगा.
– देवांश शर्मा
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