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मेमोरी के लिए अच्छी गहरी नींद है ज़रूरी (Deep sleep is essential for memory)

रिसर्च से यह बात सामने आई है कि गहरी नींद से जहां स्फूर्ति व ताज़गी प्राप्त होती है, वहीं मेमोरी यानी याद्दाश्त भी गहरी होती है.

नींद न आने की समस्या को लेकर आज दुनिया भर के सामान्य से लेकर बड़े-बड़े वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की नींद उड़ी हुई है. नींद की कमी तथा नींद न आने के अनेक कारण हैं. इसी संबंध में शारीरिक व मानसिक बीमारियों की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों व डॉक्टरों द्वारा नित नए-नए रिसर्च हो रहे हैं.

एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए नींद कितनी आवश्यक है, इस पर भिन्न-भिन्न मर्तों को लेकर ख़ासे विवाद भी होते रहे हैं.

लेकिन इस बात पर सभी वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक एकमत हैं कि स्वास्थ्य एवं ताज़गी के लिए गहरी नींद अति आवश्यक है, गहरी नींद कितनी देर की हो, यह विभिन्न लोगों ने जीवन के अपने-अपने उद्देश्यों एवं संकल्पों के अनुसार निश्चित किया है.

गहरी नींद के लिए शाम के समय टहलना, हल्का व्यायाम करना, सोने से पूर्व आंशिक य पूर्ण स्नान करना, हाथ-पैर धोना अति आवश्यक है. इसके अतिरिक्त मालिश, सदैव ख़ुश व चिंतामुक्त रहना भी गहरी नींद लाने में सहायक पाए गए हैं.

रिसर्च से यह बात सामने आई है कि गहरी नींद से जहां स्फूर्ति व ताज़गी प्राप्त होती है, वहीं मेमोरी यानी याद्दाश्त भी गहरी होती है.

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शोध-परिणामों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति नई जानकारी प्राप्त कर लेता है तो उसके बाद उसे कम-से-कम ६ से ८ घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए, इससे सभी प्राप्त या सीखी गई नई जानकारी मस्तिष्क में स्थायी रूप से बस जाती है.

पर्याप्त गहरी नींद के अभाव में सीखा गया गुण स्थायी नहीं रह पाता. ‘दि जरनल ऑफ काग्निटिव न्यूरोसाइंस’ में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सीखे हुए गुण को सदा याद रखने के लिए रात की गहरी नींव ज़रूरी है, यह शोध हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मनोचिकित्सक विभाग द्वारा किया गया.

उन वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गहरी नींद की दो अवस्थाएं रात में घटती हैं. एक तो रात में पहले दो घंटे के भीतर गहरी नींद आती है तथा दूसरी सुबह से पूर्व दो घंटे की नींद गहरी होती है. इसलिए वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने देर रात्रि तक जागकर पढ़ने वालों तथा कार्य करने वालों को सावधान किया है.

रात में अधिक देर तक जागने से स्मृति क्षीण होती है. इस शोध से मेडिकल कॉलेजों व सेना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है, क्योंकि प्रशिक्षण के दौरान इन स्थानों पर प्रशिक्षार्थियों को देर रात तक जगाया जाता है.

नींद के बारे में विशेष शोध करने वाले शोधकर्ता लिनपूल कहते हैं कि गहरी नींद धीरे-धीरे आती है. इसमें एक घंटे का समय लगता है. जब नींद आती है तो इसका पता भी नहीं चलता. इसीलिए यह महत्वपूर्ण नहीं होता कि कौन कितनी देर तक बिस्तर पर लेटा या पड़ा रहा, बल्कि महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कौन कितनी गहरी नींद में सोया व इस गहरी नींद से उसे कितनी ताज़गी एवं स्फूर्ति प्राप्त हुई.

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अतः यदि आपको हेल्दी व एनर्जेटिक रहने के साथ-साथ अपनी मेमोरी को भी तेज बनाए रखना है तो गहरी नींद सोने की कोशिश करें. रात में नौ बजे से पूर्व सोने की कोशिश करें. गहरी निद्रा से शरीर को पूरा आराम मिलता है व मन प्रसन्न रहता है.

– पुष्कर द्विवेदी

Photo Courtesy: Freepik

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