7 रिलेशनशिप रेसिपीज़, जो बनाएंगे आपके रिश्ते को ख़ूबसूरत(7 Relationship Recipes For Happy Love Life)

जिस तरह खाना बनाना एक कला है, ठीक उसी तरह रिश्तों को बनाए रखना भी एक कला है. रिश्तों की यह रसोई हमें हमारे दुख के समय सांत्वना देती है और ख़ुशियों के समय जीवन में मिठास भर देती है. हमारी कामयाबी पर हमारी पीठ थपथपाती है, तो हार पर हमारा सिर सहलाती है. रिश्तों की यह रसोई अपने स्वाद की विविधता के कारण हमेशा ही ख़ूबसूरत बनी रहेगी, पर आपको एक कुशल रसोइया बनना होगा. 

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गर आपसे यह कहा जाए कि रिश्ते भी पकते हैं, उबलते हैं, कभी गर्म होते हैं, तो कभी आइस्क्रीम से ठंडे, तो क्या आप यक़ीन करेंगे? यह रिश्तों की रसोई भी बड़ी अजीब है. तरह-तरह के रिश्तों के पकवान रोज़ बनते हैं, तो कभी-कभी बिगड़ भी जाते हैं. रिश्तों की यह रसोई किसी कुशल हाथों में पड़ जाए, तो आप इन पकवानों के स्वाद का मज़ा लेते नहीं थकेंगे, पर वहीं रिश्ते अगर किसी नौसिखिए के हाथ पड़ जाएं, तो पूरी रसोई जलने का ख़तरा है.
इस रसोई का एक नियम है कि अगर कभी कोई पकवान बिगड़ भी जाए, तो उसे समय रहते ठीक करना रसोइए को आना चाहिए. रिश्तों की रसोई में नई-नई रेसिपीज़ बनाने वाले रसोइये का अनुभवी, समझदार, संवेदनशील व संयमी होना आवश्यक है. इसी रसोई से हमारा
घर-परिवार, समाज ख़ुशहाल है. इससे ही हमारे सगे-संबंधी हमसे जुड़े हुए हैं.

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आजकल इस रसोई में रिश्तों के कुछ नए पकवान भी बन रहे हैं, पर पकवान चाहे कितने ही नए क्यों न हों, उन्हें स्वादिष्ट बनाने की रेसिपी वही पुरानी है. कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह घर की रसोई के बिना हमारा घर चलना मुश्किल है, उसी तरह रिश्तों की रसोई के बिना या रिश्तों के बिना हमारा परिवार, समाज और हमारा जीवन चल पाना मुश्किल है, तो आइए ज़रा इस रसोई में झांकते हैं और देखते हैं कि आख़िर क्या है रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाए रखने की रेसिपी.
हम कोई मशीन नहीं हैं, इसलिए हमेशा ग़लतियों की गुंजाइश बनी रहती है. हममें ग़ुस्सा, द्वेष, ईर्ष्या आदि सभी अवगुणों का भी समावेश है. इन सब का असर हमारे रिश्तों पर भी पड़ता है. रिश्ते बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है, उन्हें संभालकर रखना. जिस तरह आप खाने को रुचिकर बनाए रखने के लिए अलग-अलग रेसिपीज़ बनाते रहते हैं, उसी तरह हमारे रिश्तों को रुचिकर बनाए रखने के लिए भी कई रेसिपीज़ अर्थात् तरीक़ों का उपयोग करना पड़ता है.
जिस तरह खाने में हल्दी, नमक, मिर्च, मिठास सबका सही अनुपात में होना ज़रूरी है, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी प्रेम की मिठास, नोकझोंक की मिर्च और रूठने-मनाने का नमक होना आवश्यक है. कोई भी रिश्ता कभी भी हमेशा अच्छा ही अच्छा नहीं हो सकता, उसमें थोड़ी-सी कड़वाहट तो आती ही है, तो क्या हमें अपने रिश्ते को उसी कड़वाहट के साथ छोड़ देना चाहिए या उसमें कुछ बदलाव लाकर उसे नया स्वरूप देना चाहिए. नोकझोंक, ग़ुस्सा अगर मर्यादा में रहे, तो आपके रिश्ते चटपटे बन जाएंगे. तो आइए सीखें रिश्तों की कुछ नई रेसिपीज़.
1. रिश्ते से बाहर निकलकर सोचें रिश्ते के बारे में
क्या हुआ, कुछ अजीब लगा, पर यह बड़ा कारगर उपाय है. अक्सर ऐसा होता है कि कुछ समय के बाद कितने भी सुमधुर रिश्ते क्यों ना हों, पर उसमें एक ठंडापन आ जाता है. तो अगर आपका कोई भी रिश्ता इस ठंडेपन से गुज़रने की कगार पर हो, तो अपने
रिश्ते पर थोड़ा-सा नींबू निचोड़ें. ख़ुद को उस रिश्ते से थोड़ा-सा दूर कर लें, पर याद रहे, इस प्रक्रिया में अपने आपको रिश्तेदारों से दूर ना करें. इस उपाय में नींबू का खट्टापन आपके रिश्तों की खटास दूर कर देगा.
2. तोड़ दें सन्नाटे की ब़र्फ
कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ रिश्ते हमसे रूठ जाते हैं. तब दो लोगों के बीच एक अनजानी-सी दीवार खड़ी हो जाती है. एक
अजीब-सी चुप्पी आ जाती है. ना किसी से कोई कुछ पूछता है और ना ही कोई कुछ बताता है. हालांकि यह दीवार दिखती नहीं है, पर होती है, तो इस ब़र्फ पर भावनाओं और संवाद का गर्म पानी डालें और इस ब़र्फ को पिघला दें.
3. अनुभवों का मसाला डालना ना भूलें
यह मसाला अगर हम समय-समय पर अपने रिश्तों में डालते रहें, तो रिश्तों का स्वाद हमेशा बना रहेगा. यह मसाला हमें हमारी
दादी-नानी के पास मिलेगा. समय-समय पर अपने बुज़ुर्गों से रिश्तों के बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान लेते रहना चाहिए. समय की कमी के चलते हमें बड़े-बुज़ुर्गों के पास बैठने का समय कम ही मिलता है, पर हमारे रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है. दादी-नानी की कहानियां स़िर्फ दिल बहलाने के लिए नहीं होतीं, उनमें कुछ ना कुछ सीख छुपी होती है. तो इन पुराने मसालों के
डिब्बों को खोलिए और अपने रिश्तों को नया ज़ायका दीजिए.

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4. नोकझोंक का नमक और मनमुटाव की मिर्च
जिस तरह किसी भी खाने में नमक-मिर्च का होना बहुत आवश्यक है, उसी तरह किसी भी रिश्ते में नोकझोंक और मनमुटाव का होना आम है और कुछ हद तक ज़रूरी भी, क्योंकि यह तो हम सभी जानते हैं कि मनाने का मज़ा तभी आता है, जब कोई रूठा हुआ हो. इस रूठने-मनाने में रिश्ते की मिठास बनी रहती है. पर याद रहे, यह नमक-मिर्च स्वादानुसार ही होनी चाहिए, मतलब यह कि यह नोकझोंक और मनमुटाव सीमा में हो. इससे आपके रिश्ते को कोई स्थायी क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए. ऐसी कितनी ही मीठी नोकझोंक और मनमुटाव हमारे समाज और परिवारों में प्रचलित हैं, जैसे- देवर-भाभी, सास-बहू, ननद-भाभी, जीजा-साली, भाई-बहन आदि.
5. धीमी आंच पर पकने दें
जब नए रिश्ते बनें या पुराने रिश्ते को ही आप नया रूप देना चाह रहे हों, तो उन रिश्तों को थोड़ा समय दें. उन्हें प्रेम और भावनाओं की आंच पर धीरे-धीरे पकने दें. उसका अर्थ यह है कि किसी भी रिश्ते से उसके शुरुआती दौर में बहुत सारी अपेक्षाएं रखना ग़लत है. पहले उसमें विश्‍वास और प्रेम उत्पन्न होने दें. अपेक्षाएं उस रिश्ते को एक झटके में ख़त्म कर देंगी. यह ठीक उसी प्रकार है, जैसे आप रसोई जल्दी बनाने के लिए आंच को बहुत बढ़ा दें, जिससे आपका खाना ही जल जाए. रिश्ते एक दिन में नहीं बनते. इसमें समय लगता है, तो इसमें कोई जल्दबाज़ी ना करें.
6. दर्शनीय हो रिश्तों की परोसी गई थाली
खाना चाहे कितना भी स्वादिष्ट हो, पर जब तक उसे सलीके से परोसा ना जाए, तब तक उसे खाने का मन नहीं करेगा. उसी प्रकार आप किसी रिश्ते को बहुत गंभीरता से लेते हैं. किसी से बहुत प्यार करते हैं, किसी को लेकर चिंतित हैं, तो याद रखें कि आपकी कोई भी भावना व्यक्त किए बग़ैर सामनेवाले के पास ठीक तरी़के से नहीं पहुंचेगी. अपनी भावनाओं को सामनेवाले पर अच्छे से ज़ाहिर करना बहुत ज़रूरी है.
7. आख़िर में ज़रूरी है स्वीट डिश
चाहे खाना अच्छा बने या फिर बेस्वाद, पर अगर अंत में मीठा हो जाए, तो खाना कंप्लीट हो जाता है. कहने का तात्पर्य यह है कि अपने जीवन में रिश्तों की मिठास को ना तो भूलें और ना ही नज़रअंदाज़ करें. किसी भी बिगड़े रिश्ते को छोड़ देना हमेशा सबसे आसान विकल्प होता है, पर ध्यान रखें कि किसी भी रिश्ते को काटकर फेंकने से आपका जीवन अपंग हो जाता है, तो चाहे आपका कोई भी रिश्ता कितनी ही कड़वाहट से गुज़र चुका हो, पर उसमें अपनेपन की मिठास मिलाइए और अतीत की सारी कड़वाहट
भूल जाइए.

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– विजया कठाले निबंधे