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रंग‌ तरंग- बॉस स्तुति (Satire- Boss Stuti)

जिस दिन आपको पता चले कि आपका नाम बॉस का चमचा पड़ गया है, तो समझिए कि आप अपनी बॉस भक्ति में कामयाब हो रहे हैं. आपको चमचा कहने वाले प्रभु-भक्तिहीन दुष्ट प्राणी हैं, उन पर कुपित नहीं होना है. धीरे-धीरे वे भी समझ जाएंगे.

एक बार पृथ्वी लोक का भ्रमण करके जब देवर्षि नारद 'ऊपर' पहुंचे तो उन्होंने अपनी रिपोर्ट थमाई और कहा, "भगवन, धरती पर सभी कर्मचारी नाना प्रकार के कष्टों में फंसे हुए हैं. उनकी व्यथा का वर्णन में हज़ार मुखों से भी नहीं कर पाऊंगा. इसलिए मैंने यह रिपोर्ट बनाई है, जिसमें मात्र १००० पन्ने हैं. इसे पढ़ने के बाद प्रभु आप मुझे रास्ता दिखाइए, ताकि मैं वापस वहां जाकर उनका उद्धार कर सकूं."

नारद की बात सुनकर प्रभु ने अति प्रसन्न होकर कहा, "हे देवर्षि, इस भौतिकवादी संसार में दूसरों की भलाई सोचने वाले सिर्फ़ तुम ही हो. मैं तुम्हें वह विधि बताता हूं, जिसके पालन से धरती के सभी कर्मचारियों के सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे, जब तुम यह काम करके लौटोगे तो मुझसे तुरन्त मिलना, ताकि इस नेक कार्य के बदले मैं तुम्हें कुछ दे सकू, आख़िर कब तक तुम भी इसी पोस्ट पर काम करते रहोगे?"

"जैसी बॉस की इच्छा." कहकर नारद वहां से चले गए, जो विधि भगवान ने नारद को बताई, वह मैं आपको सुना रहा हूं. इसके करने से तमाम दोषों का नाश होता है. जो पाठक इसका फ़ायदा उठाना चाहता हो वह मेरे साथ बोले, "ॐ श्री बॉसाय नमः."

तो देवियों और सज्जनों, आप सब के कष्टों का मूल कारण आपकी बेवकूफ़ी ही है. आप सरकारी कर्मचारी हों या गैर सरकारी, आप बॉस की महिमा को भूल गए हैं. आप भूल गए हैं कि चूंकि कलियुग में किसी और रूप में अवतार लेना मेरे बस में नहीं, इसलिए मैं आप सभी के दफ़्तरों में बॉस के रूप में विद्यमान हूं, देवर्षि नारद भी मेरे नामों का वर्णन नहीं कर सकते. आप जानते हैं क्यों? वह इसलिए कि दफ़्तर चाहे कितना ही छोटा क्यों न हो, उसमें भी बॉस नाम के दो-चार प्राणी मिल ही जाते हैं. और फिर इस देश की जनसंख्या करोड़ों में है. अतः बॉस कितने होंगे, आप स्वतः ही अनुमान लगा सकते हैं.

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अब सब कुछ भुलाकर अपने बॉस यानी मेरे कलियुगी साक्षात् रूप की वन्दना करें. पूजा-अर्चना करें, व्रत-उपवास रखें, ताकि नाना प्रकार के जिन क्लेशों में आप फंसे हुए हैं, उनसे आपको मुक्ति मिले. आपका वर्तमान एवं भविष्य दोनों ख़ुशहाल रहे. यह कार्य एकदम सरल है तथा धरती वासी भारतीयों के लिए बिल्कुल आसान है. इसकी आदत पड़ने के दो सप्ताह के भीतर ही आपको परिणाम मिलने शुरू हो जाएंगे, अतः देर न करें और आज से ही शुरू कर दें.

दफ़्तर का द्वार पार करते ही 'ॐ श्री बॉसाय नमः' महामंत्र का सात बार जप करें. अपनी सीट पर बैठते ही बॉस की महिमा का गुणगान करें जिनकी कृपा से आप अभी तक नौकरी पर टिके हैं. ऐसा करने से आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाएगा और आपके द्वारा की गई ग़लतियां उतनी प्रभावी नहीं रहेंगी.

बॉस के दफ़्तर आते ही प्रणाम करें. हिन्दी में कहने से बॉस ख़ुश होने की बजाय क्रोधित हो सकता है तथा श्राप भी दे सकता है, अतः केवल अंग्रेज़ी का प्रयोग करें. अगर बाकी लोग 'गुड मॉर्निंग सर' कहें तो आप 'वेरी गुड मॉर्निंग टू यू बॉस' कहें, ध्यान रहे कि ऐसा कहते समय वाणी में मधुरता हो, दिल में उल्लास हो, वरना बॉस, चूंकि अर्न्तयामी है, आपको ताड़ सकता है.

बॉस जब अपने कमरे में आसन ग्रहण कर ले, उसके १०-१५ मिनट बाद उनकी सेवा में हाज़िर हो जाइए और मुस्कुरा कर बॉस की ओर वैसे ही देखिए, जैसे दूर-दराज से आया भक्त भाव विह्वल होकर अपने इष्टदेव को देखता है. बॉस के कहने पर ही बैठिए, आपका मन कुर्सी पर नहीं, बल्कि बॉस के चरणों में बैठने को करेगा पर आप उनके बताए स्थान पर ही बैठिए. इससे पहले कि कोई और बात हो बॉस के सजने-संवरने यानी उनकी पसन्द की भूरि-भूरि प्रशंसा करें. अगर आपको टालने के लिए वह कहें कि यह तो उनकी बीवी की पसन्द है, तो तुरन्त कहें कि आख़िर बीवी किसकी है.

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इस तरह अपने इष्टदेव को प्रसन्न कर नारद बन जाएं और इधर-इधर की पूरी ख़बरें बॉस को सुनाएं. ऐसी ख़बरें ही धूप, गन्ध, अक्षत तथा पुष्प का काम करेंगी. इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखें कि बॉस को किस तरह की ख़बर से दुख होता है और किसी ख़बर से ख़ुशी. अपने सहयोगी के ख़िलाफ़ बॉस के कान भरते रहें, ताकि सही समय पर उसे बॉस से श्राप दिलाया जा सके. बीच-बीच में यह भी कहते रहें, "वैसे तो इधर की बात उधर करना आपकी आदत है ही नहीं, पर बॉस अगर आपको नहीं बताऊंगा तो मेरी आत्मा मुझे धिक्कारती रहेगी."

धीरे-धीरे बॉस आपकी भक्ति को समझने लगेगा. फिर चाय-कॉफी भी मिला करेगी, जिसे आप चरणामृत समझ कर ग्रहण करें.

जिस दिन आपको पता चले कि आपका नाम बॉस का चमचा पड़ गया है, तो समझिए कि आप अपनी बॉस भक्ति में कामयाब हो रहे हैं. आपको चमचा कहने वाले प्रभु-भक्तिहीन दुष्ट प्राणी हैं, उन पर कुपित नहीं होना है. धीरे-धीरे वे भी समझ जाएंगे. जिस तरह धूप में बैठने मात्र से सूर्य की गर्मी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है, ठीक उसी तरह आपकी संगत से उन पर भी भक्ति की महिमा का असर हो जाएगा,

दफ़्तर छोड़ने से पहले कम-से-कम एक बार और बॉस के कमरे में जाकर उन्हें प्रणाम करें, भीतर जाने के लिए कोई भी बहाना चल सकता है. बॉस जब तक अपने कमरे में हो, घर न जाएं, बॉस जब घर जाने लगें तो पीछे-पीछे चलकर दरवाज़े तक आएं. गुड नाइट कहना न भूलें, भले ही पांच बजे हों.

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अपनी पत्नी और बच्चों के ख़र्च में कटौती करें, इससे बचाई हुई राशि से बॉस को अकेले या सपरिवार खाना खाने के लिए आमंत्रित करें. उनकी ना-नुकर पर ध्यान न दें और सर-सर कहकर उनके पीछे ही पड़े रहें, जब वे घर आएं तो सपरिवार उनकी सेवा में जुट जाएं. अगर बॉस सिगरेट पीते हैं तो उच्च कोटि की सिगरेट पहले ही मंगवा कर रखें, इस बात की चिन्ता न करें कि सिगरेट के धुएं से आपकी पत्नी को मितली आती है.

बॉस के जाने के बाद सपरिवार 'ॐ श्री बॉसाय नमः' का उच्चारण करें, उनकी तारीफ़ वाले भजन-कीर्तन करें. अगर कुछ खाना बचा हो तो उसे प्रसाद की तरह अपने परिवारजनों में बांट दें. ऐसा करने से बॉस भक्ति का मार्ग सुगम हो जाएगा और आप नाना प्रकार के क्लेशों से मुक्त हो जाएंगे.

बॉस स्तुति की महिमा अपरंपार है. सरकारी दफ़्तरों में तो इसके परिणाम साक्षात देखे जा सकते हैं. राजेश नाम के एक मूर्ख अज्ञानी ने यह सोचकर कि वह तो अभियन्ता है और अपने तकनीकी ज्ञान से बॉस को प्रसन्न कर लेगा, बॉस स्तुति की अवहेलना की. दस वर्ष बाद आज भी वह इसी पद पर है. जबकि रमेश नाम के बॉस भक्त ने बिना किसी विशेष योग्यता के दस वर्षों में चार प्रमोशन पा लिए हैं. अतएव देर न करें. बॉस रूपी प्रभु आपका कल्याण करें. 'ॐ श्री बॉसाय नमः, इति' बॉस कथा सम्पन्न.

- आर. के. वशिष्ठ

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