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‘शादी सबके लिए ज़रूरी नहीं’ मेरी सहेली पॉडकास्ट में तुषार कपूर ने बताया क्यों नहीं की शादी और क्यों लिया सिंगल फादर बनने का फैसला (‘Marriage Is Not For Everyone’ Tusshar Kapoor Opens up about Why He Chose Single Fatherhood Over Marriage)

तुषार कपूर (Tushar Kapoor) ने भले ही कम फिल्में की हों, लेकिन उनकी एक्टिंग को लोगों का बेहद प्यार ज़रूर मिला. तुषार कपूर ‘सिंगल’ हैं, लेकिन उन्होंने ‘सिंगल फादर’ (Tusshar Kapoor single father) बनने का फैसला किया. साल 2016 में वो सरोगेसी के ज़रिए एक बेटे के फादर बने थे. उनके बेटे का नाम लक्ष्य (Tusshar Kapoor's son Lakshy) है और वो अब 10 साल का हो चुका है. हाल ही में उन्होंने सिंगल पेरेंटिंग (Tushar Kapoor on single parenting) के बारे में खुलकर बात की और ये भी बताया कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की.

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Tusshar Kapoor

तुषार कपूर हाल ही में मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में पहुंचे थे, जहां उन्होंने दिल खोलकर बातें की. उनसे जब पूछा गया कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की. क्या उन पर शादी का प्रेशर नहीं था, तो उन्होंने बड़ी ही ईमानदारी से इसका जवाब दिया. "हमारी सोसाइटी में 20-25 के होते ही शादी का प्रेशर शुरू हो जाता है. 30 का होने के बाद ये प्रेशर और बढ़ जाता है. सोशल प्रेशर भी होता गया, पियर प्रेशर भी होता है, फैमिली प्रेशर भी होता है. पर मुझे लगता है कि हर चीज़ का एक वक़्त होता है और अगर आप पूरी तरह रेडी हैं तभी शादी करनी चाहिए. मेरे हिसाब से शादी सबके लिए नहीं होती. मैं शादी की परंपरा में विश्वास करता हूं, लेकिन सबके लिए नहीं है ये. मुझे उस वक्त लगा कि मुझे फादर बनना है और मैं इस ज़िम्मेदारी के लिए पूरी तरह रेडी था और मुझे लगा मैं एक अच्छा फादर बन सकता हूं तो मैं फादर बन गया. जब आप खुद क्लियर और स्ट्रॉन्ग होते हैं तब आपको दूसरों की सोचने की जरूरत नहीं पड़ती."

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मां शोभा कपूर और पापा जितेंद्र उनके इस फैसले के खिलाफ नहीं थे, ये पूछने पर तुषार ने कहा, "बिल्कुल नहीं. बल्कि मैंने उन्हें इसके बारे में बताया ही नहीं था. ये मेरा फैसला था. 

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मैं तिरुपति जा रहा था तो फ्लाइट ने मेरी मुलाकात प्रकाश झा से हो गई. वापसी में बातचीत के दौरान उन्होंने मुझसे कहा, अगर तुम्हें शादी नहीं करनी तो तो सिंगल पैरेंटिंग के बारे में क्यों नहीं सोचते. उन्होंने मेरी एक पैरंट से बात कराई जो सिंगल मदर बनी थी. मुंबई आकर मैं उस पैरेंट से मिला. डॉक्टरों से बात की और सिंगल फादर बनने का फैसला कर लिया और आई एम वेरी हैप्पी."

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सिंगल पैरंट बनने का फैसला लेना अपने आपमें काफी अलग था और इसलिए वह थोड़े नर्वस भी थे. उनके मन में इस तरह के कई सवाल उठ रहे थे, "जब ये प्रोसेस चल रहा था तो हर स्टेप पर मुझे एंजायटी हो रही थी कि क्या होगा कैसे होगा. एक तो इंडिया में ये इतना कॉमन नहीं था, फ़िल्म इंडस्ट्री में तो बिल्कुल भी नहीं था. मुझे फियर था कि सोसाइटी के क्या रिएक्शन होगा. क्योंकि हमारी सोसाइटी एक रूल बुक के हिसाब से चलती है. लेकिन आप यक़ीन नहीं करेंगे कि जब मैंने फादर बनने की न्यूज़ अनाउंस की तो  सबने इतना पॉजिटिव तरीके से इसे एक्सेप्ट किया. मेरे ख्याल से इंडिया में बच्चे का जन्म चाहे हो एडॉप्शन हो, शादी के बाद हो या सिंगल पैरेंट बनना हो, बच्चे का जन्म इतनी खुशी की बात मानी जाती है कि सब खुश हो जाते हैं. और शायद मेरा इंटेंशन बहुत सही था और लोगों ने इसे सही तरीके से कनेक्ट भी किया."

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तुषार कपूर ने सिंगल पापा की जर्नी पर एक किताब भी लिखी है 'बैचलर डैड'. उनका मानना है कि पिता बनना उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक रहा है, इसलिए  उन्होंने इन पलों से जुड़ी छोटी सी छोटी बात अपनी इस किताब में लिखी है.

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