पिछले काफ़ी अरसे से एक शब्द बार-बार हमारे कानों में गूंज रहा है और वो है ज़ेन ज़ी. नेपाल और बांग्लादेश में तख़्तापलट के बाद तो यह शब्द और भी पॉप्युलर हो गया. आख़िर क्या मतलब होता है ज़ेन ज़ी का और इनकी ख़ासियत और मिज़ाज कैसा होता है, यह हम जानने का प्रयास करेंगे.
- ज़ेन ज़ी यानी जनरेशन ज़ेड वह युवा वर्ग है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है. यह वो जनरेशन है जो सोशल मीडिया, डिजिटल वर्ल्ड और इंटरनेट के साथ बड़ी हुई है.
- इस जनरेशन की सोच काफ़ी अलग है, इनकी लाइफस्टाइल और आदतें भी बहुत डिफरेंट हैं, ये सोशल मुद्दों पर भी अपनी राय रखते हैं.
- ये वर्ग काफ़ी टेक्नोसेवी है और हर नई तकनीक को तेज़ी से अपनाते हैं.
- ऑनलाइन शॉपिंग ये प्रेफर करते हैं और अपना ज़्यादातर काम डेस्कटॉप या लैपटॉप की बजाय फ़ोन से करना ही पसंद करते हैं.
- ये जनरेशन लाइफ के प्रति काफ़ी प्रैक्टिकल अप्रोच रखती है.
- ये काफ़ी इंडिपेंडेंट होते हैं और हेल्दी कॉम्पीटिशन में बिलीव करते हैं.
- आज़ाद पसंद होते हैं और अपने करियर से लेकर लाइफ तक के ज़रूरी डिसीज़न ख़ुद ही लेते हैं.
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- इन्हें ट्रिप्स और सोलो ट्रिप्स भी बेहद पसंद होती हैं.
- ये फन लविंग होते हैं और एक्सपेरिमेंट, रोमांच करने से पीछे नहीं हटते.
- अपने रिश्तों को लेकर इनके माइंड में क्लैरिटी होती है और बेवजह की भावनाओं में बहकर ये कोई काम नहीं करते.
- टेक्नोसेवी होने के कारण इनका स्क्रीन टाइम ज़्यादा होता है, जिससे इन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.
- भले ही ये फिटनेस फ्रिक होते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ की समस्याओं से भी ये ज़्यादा जूझते हैं.
- सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय रहते हैं. मीम्स और रील्स इनका पैशन है, तो वहीं दूसरी ओर सोशल इश्यूज़ के प्रति भी ये काफ़ी जागरूक होते हैं और अपनी आवाज़ उठाने से पीछे नहीं हटते.
- इनका काम करने का तरीका भी अलग होता है और ये वर्कप्लेस पर न तो ओवरटाइम करते हैं और न ही वीकेंड्स पर काम करते हैं. ये प्रोफेशनल लाइफ को अपनी पर्सनल लाइफ पर हावी नहीं होने देते.
- वीकेंड पर पार्टी करते हैं और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती इनको पसंद होती है.
ज़ेन ज़ी की कमज़ोरियां
- धैर्य की बेहद कमी होती है, क्योंकि इन्हें सब कुछ फास्ट चाहिए होता है, चाहे पैसा हो या प्रमोशन.
- सही ढंग से ये कम्यूनिकेट नहीं करते, जिससे वर्कप्लेस में प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.
- रिस्पांसिबिलिटी नहीं लेना चाहते, यही वजह है कि ये कमिटमेंट नहीं करते या करने से डरते हैं.
- थोड़े बेपरवाह होते हैं, अनप्रोफेशनल रवैये के कारण डेडलाइन्स को भी गंभीरता से नहीं लेते.
- रोक-टोक पसंद नहीं आती. अपने हिसाब से ज़िंदगी जीने का रवैया कई बार भारी पड़ जाता है.
- टालमटोल करने की आदत होती है, जिससे ज़रूरी काम भी रुक जाते हैं.
- आलोचना नहीं झेल पाते, क्योंकि इनको लगता है ये जो करते हैं सब सही है.
- फेलियर को एक्सेप्ट करने में दिक्कत होती है और ये जल्दी निराश हो जाते हैं.
- टाइम को वैल्यू नहीं करते. लेटलतीफ़ी इनकी आदत में शुमार होती है.

ज़ेन ज़ी और मेंटल हेल्थ
- ज़्यादा स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया कल्चर का प्रेशर इनको जल्द ही मेंटल डिसऑर्डर्स दे सकते हैं.
- इस जनरेशन में एंजाइटी, डिप्रेशन जैसी कई मानसिक समस्याएं देखी जा सकती हैं.
- अनियमित लाइफस्टाइल और जंक ़फूड के ज़्यादा सेवन से भी इन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है.
- ट्रेंड में बने रहने का प्रेशर इनको स्ट्रेस देता है. - इसके अलावा नींद ना आना या नींद की कमी का ये अक्सर शिकार होते हैं.
- सर्वे बताते हैं कि लगभग 40-60% के क़रीब ज़ेन ज़ी डिप्रेशन, एंजाइटी, लो सेफ़ एस्टीम, बॉडी इमेज और लोनलिनेस का शिकार होते हैं. इनकी कई वजहें हैं जिसमें सबसे प्रमुख है सोशल मीडिया, जहां उन्हें सब कुछ परफेक्ट नज़र आता है.
- दूसरों की परफेक्ट लाइफ और कूल लाइफस्टाइल देखकर ये ख़ुद पर प्रेशर महसूस करते हैं, जिससे इन्हें स्ट्रेस होने लगता है.
- लेकिन एक बात अच्छी है कि ये युवा वर्ग अपने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बात करने में हिचकिचाता नहीं है. वो इसे सहजता से लेता है और इलाज व थेरेपी कराने में विश्वास रखता है-
- सेल्फ केयर पर ये ध्यान देते हैं.
- कुल मिलाकर ज़ेन ज़ी एक कॉम्प्लिकेटेड जनरेशन है, जो अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इनको भी काम करने की ज़रूरत है, जैसे- समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लेना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना, सोशल मीडिया को अपना आदर्श न समझना और धैर्य रखना.
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ज़ेन ज़ी के अलावा अन्य जनरेशंस
- बात भविष्य की करें, तो 2013-2025 के बीच जन्में लोग अल्फा जनरेशन हैं.
- 2025 के बाद वाली बीटा जनरेशन कहलाएगी.
- ज़ेन ज़ी से पहले वाली जनरेशन ज़ेन वाई (ॠशप ध) कहलाती है , जो 1981-1996 के दशक की है. इन्हें मिलेनियल्स भी कहा जाता है. - 1965-1980 के बीच जन्मे लोग ज़ेन एक्स (Gen X) कहलाते हैं.
- 1946-1964 वाले बेबी बूमर्स के नाम से जाने जाते हैं.
- 1928-1945 वाली जनरेशन साइलेंट जनरेशन कहलाते हैं.
- 1901-1927 साल वाले ग्रेटेस्ट जनरेशन हैं.
- ये तमाम नामकरण उस दौर की वैश्विक परिस्थितियों, जैसे- वर्ल्ड वॉर, आर्थिक मंदी, डिजिटल क्रांति, एआई आदि पर आधारित हैं.
- गीता शर्मा

