आज की जनरेशन स्क्रीन पर दिखनेवाली 15 सेकंड की रील्स को ही पूरी ज़िंदगी मान बैठी है. यह ‘लाइक्स की भूख’ और ‘कमेंट्स का नशा’ एक ऐसा आभासी दलदल बन चुका है, जिसमें हमारी युवा पीढ़ी, ख़ासकर लड़कियां, अनजाने में धंसती चली जा रही हैं.
फिल्टर्स और एडिटेड चेहरों की इस दुनिया ने लड़कियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उनका मूल्य सिर्फ़ इस बात पर तय होता है कि वे कैमरे पर कितनी आकर्षक दिखती हैं. उनका टैलेंट, उनकी पढ़ाई, उनका अच्छा स्वभाव और उनकी इंसानियत ये सब इस ‘परफेक्ट फोटो’ की होड़ के पीछे कहीं दब जाते हैं. जब आत्मसम्मान की बुनियाद इतनी कमज़ोर चीज़ सिर्फ़ बाहरी रंग-रूप पर टिकी हो, तो उसका ढह जाना तय है. आइए, जानें किस तरह सोशल मीडिया लड़कियों की आत्महत्या की वजह बनता जा रहा है.

ख़ूबसूरत बॉडी इमेज का दबाव
फिल्टर्स और एडिटिंग टूल्स के ज़रिए सोशल मीडिया पर जो पिक्चर लगाई जाती है, वह वास्तविक पिक्चर से बिल्कुल अलग होती है. लेकिन लड़कियां अपना कम्पैरिजन उन तस्वीरों से करती हैं और ख़ुद को काफ़ी कमतर समझने लगती है. यहीं चीज़ें ख़ूबसूरती के अनरियालिस्टक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स बन गए हैं. कटरीना कैफ और अन्य बॉलीवुड हीरोइनों की तरह साफ़ और ग्लो करती हुए स्किन इन लड़कियों का सपना बन जाता है. अपनी फिगर को लेकर ये इतनी कॉन्शियस हो जाती हैं कि हर दिन परफेक्ट दिखने की चाह में खाना-पीना तक छोड़ देती हैं और एनोरोक्सिया जैसे बीमारियों का शिकार होकर आत्महत्या तक कर बैठती हैं, क्योंकि इस वजह से बॉडी शेमिंग का डर और लो सेल्फ-एस्टिम पैदा होता है. नतीज़ा यह होता है कि उन्हें अपनी बॉडी में कमियां नज़र आने लगती हैं और उन्हें ख़ुद की इमेज ख़राब लगने लगती है. ऐसे में कई लड़कियां ख़ुद को दूसरों से कमतर समझने लगती हैं और डिप्रेशन में चली जाती हैं.
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कॉम्पैरिजन ट्रैप में फंस जाती है लड़कियां
जी हां, इसे ट्रैप ही कहा जाएगा, जहां पहले लड़कियों की ज़िंदगी उनके घर, गांव और शहर के बीच रहती थी, वहीं अब पूरी दुनिया उनके छोटे से मोबाइल में सिमट गई है. अब वे अपने साधारण से घर और रूप-रंग की तुलना इन्फ्लुएंसर्स की सजाई हुई ज़िंदगी से करती हैं. उन लोगों की चकाचौंध देखकर उन्हें लगता है कि ’मैं ही ऐसी क्यों हूं. काश मैं भी इन लड़कियों की तरह सुंदर होती... इनके जैसी ग्लैमरस लाइफ जी रही होती...’ लेकिन जब ये सब कुछ नहीं होता, तो उन्हें अपनी ज़िंदगी बेकार लगने लगती है और वे घोर निराशा में डूब कर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेती हैं.
डिजिटल वैलिडेशन की चाह सनक बन जाती है
आज की डेट में हज़ारों लड़कियां लाइक और कमेंट्स पाने की चाह में अपनी रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालती हैं और लाइक-कमेंट का वेट करती रहती हैं. लेकिन जब वह नहीं मिलता, तो वह इस वैलिडेशन को पाने के लिए अपनी बॉडी और लुक को लेकर हद से ज़्यादा पजेसिव हो जाती हैं, जो बाद में ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया या बुलीमिया से ग्रस्त हो जाती हैं. जहां वज़न बढ़ने के डर से लड़कियां खाना छोड़ देती हैं और ये डिसऑर्डर उन्हें बीमार कर मौत के मुंह में धकेल देता है.

साइबर बुलिंग और ट्रोलिंग से परेशान लड़कियां
लड़कियां सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे अपने निजी फोटो और परिवार के फोटो, कहीं घूमने गई हैं, तो उसकी स्टोरी भी लगा देती हैं. जिससे कई बार वे ऑनलाइन उत्पीड़न, भद्दे कमेंट्स, और साइबर बुलिंग का शिकार हो जाती हैं. कई बार उनकी किसी फोटो पर लोग बॉडी शेमिंग भी करते हैं, जिससे वे मानसिक तनाव में आ जाती हैं. कुछ लोग तो सोशल मीडिया पर उनके परिवार के बारे में जानकर ब्लैकमेल तक करते हैं. स़िर्फ यहीं नहीं, बल्कि तकनीक के ग़लत इस्तेमाल से लड़कियों की साधारण तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदल दिया जाता है और फिर उन्हें वायरल करने की धमकी दी जाती है. लड़की के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके फर्ज़ी आईडी बनाकर उससे अवांछित गतिविधियां की जाती हैं, ताकि उसकी सामाजिक छवि ख़राब हो. ऐसे में लड़कियां परेशान हो जाती हैं कि हमारे घरवालों को पता चलेगा, तो वे क्या सोचेंगे या फिर समाज क्या कहेगा का डर उन्हें तनाव में ले आता है और कोई रास्ता ना मिलने पर वे कोई भी आत्मघाती कदम उठा लेती हैं.
छोटी सी पर्सनल प्रॉब्लम बड़ी हो जाती है
अगर पति-पत्नी में किसी बात को लेकर कोई विवाद हो जाता है, तो वह बातचीत के ज़रिए सुलझ सकता है. लेकिन जब एक पार्टनर के द्वारा वह विवाद सोशल मीडिया पर डाल दिया जाता है और वह पब्लिक हो जाता है, तो उस पर आए हुए कमेंट्स और लोगों की बेफ़िजूल की राय से बात बनने की बजाय ईगो पर चली जाती है और रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच जाता है.

पर्सनल फोटो शेयर करना कई बार पार्टनर को अच्छा नहीं लगता
कपल्स अपने हॉलिडे या हैप्पी मोमेंट्स की तस्वीरें शेयर करते हैं. इसमें कोई बुराई भी नहीं है. लेकिन कई बार लोग अपने लाइक्स व व्यूज़ बढ़ाने के चक्कर में कुछ कोजी मोमेंट्स की तस्वीरें भी शेयर कर देते हैं. यह तस्वीरें काफ़ी पर्सनल होती हैं और पार्टनर को यह बात अच्छी नहीं लगती. इस बात को लेकर उनमें तनाव बढ़ जाता है. कई बार इससे पार्टनर को शर्मिंदगी का एहसास होता है या फिर उन्हें ऐसा लगने लगता है कि आपको उनकी इज़्ज़त की कोई परवाह नहीं है. कभी-कभी उन पर्सनल तस्वीरों का लोग ग़लत तरी़के से इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे आपको बाद में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इससे भी जीना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि रिश्ता टूटने के कगार पर आ जाता है.
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पर्सनल चैट शेयर करना मुसीबत बन सकता है
आजकल अपनी पर्सनल चैट या वीडियो शेयर करने का भी चलन बन गया है. यहां तक कि लोग अपनी लड़ाई और प्यार के निजी पल को भी शेयर करने से बाज़ नहीं आते. इससे सामाजिक रूप से कई बार लोग उस परिवार का बहिष्कार भी करते हैं कि इनके परिवार की तो कोई इज़्ज़त नहीं है. इनके घर में तो इतने लड़ाई-झगड़े होते हैं. इससे कई बार बच्चों की शादियां और सोशल सर्कल बनाने में भी दिक़्क़त होती है. पर्सनल चैट का कोई ग़लत फ़ायदा भी उठा लेता है, जिससे तंग आकर लड़की ग़लत कदम उठा लेती है.
इससे कैसे बचें
- सोशल मीडिया की इस आभासी दुनिया को समझें. किसी की काबिलियत उनके करियर और अच्छा इंसान होने से है, ना कि इससे कि लोग उनकी पोस्ट पर कितने कमेंट और लाइक कर रहे हैं.
- केवल ऐप चलाना सीखना काफ़ी नहीं है, बल्कि लड़कियों को यह सीखना ज़रूरी है कि इंटरनेट के इस मायाजाल के पीछे का बिज़नेस मॉडल क्या है और यह कैसे हमारे दिमाग़ को कंट्रोल करता है.
- फ़िल्टर और असली ज़िंदगी के फ़र्क को समझना होगा.
- सोशल मीडिया पर ऐसे अकाउंट्स, इन्फ्लुएंसर्स या दोस्तों को तुरंत अनफॉलो या म्यूट कर दें, जिन्हें देखकर आपके अंदर हीनभावना, जलन या उदासी पैदा होती है.
- डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं. हफ़्ते में कुछ दिन ऐसे होने चाहिए जब आप सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें और अपना समय अपनी फैमिली के साथ बिताएं.
- रात को समय से सोएं और मोबाइल को कहीं दूर रखें. बेड के पास रखकर ना सोएं.
- अपनी प्रोफाइल को हमेशा प्राइवेट मोड पर रखें, ताकि केवल आपके जाननेवाले ही आपकी तस्वीरें देख सकें.
- पीड़ित लड़की या उसके परिजन www.cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं. यहां शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है.
भारतीय न्याय संहिता (BJS) और आईटी एक्ट के तहत ऑनलाइन किसी महिला का पीछा करना (Stalking), अश्लीलता फैलाना या ब्लैकमेल करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है.
- शिखा जैन

