बड़ी का बड़ा होना
क्या था, पता नहीं?
बड़ी बहुत जल्दी बड़ी हो गई,
बड़ी जल्दी ब्याह गई,
बड़ी जल्दी पढ़ गई
बड़ी के ब्याह में
बड़ी की पढ़ाई में
कम ख़र्च किए गए पैसे
छोटों के लिए जो बचाना था
छोटे के हाथों आए
बड़ी के हक़ कई
बड़ी के हाथों आईं
बस ज़िम्मेदारियां
किसी को नहीं पता कि
बड़ी को किसी से प्रेम हुआ या नहीं
बड़ी जवान हुई या नहीं
क्योंकि बड़ी के पास ही रखी गई
खानदान की नाक
परिवार की सारी मर्यादाएं
बड़ी,
बड़ी मासूमियत से
बड़ी बनी रही
सबके भाग्य में आए
खेल, झूले, सावन और बचपन
एक बड़ी के हिस्से आया
बस उसका बड़प्पन
बस उसका बड़प्पन...
- पूर्ति खरे
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