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पहला अफेयर- पहला प्यार… (Pahla Affair- Pahla Pyar…)

मुझे तुमसे बात करनी है... यानी जाने से पहले उसने मुझे ही पुकारा था और मैं उसकी पुकार का जवाब न दे सकी.

प्यार शब्द ही गहरा अर्थ रखता है. इस पवित्र भावना को शब्दों में बांधना कठिन है. उम्र का बचपन और जवानी का संधिकाल मात्र 19 वर्ष! हमारा चार लोगों का ग्रुप था. मेरे विषय में लड़कियां कम होती थीं और उस समय तो ना के बराबर थीं. हम चारों में वह सबसे स्मार्ट, हर गतिविधि में आगे रहने वाला. आकर्षक व्यक्तित्व और हंसमुख स्वभाव शायद उसकी यही विशेषता हम सबसे अलग थी.
कभी-कभी लाइब्रेरी में मिलना होता, तो कभी घर में भी उसका आना-जाना था. घर के सभी लोगों से खुलकर मिलता. उसका आना, उससे मिलना धीरे-धीरे मुझे अच्छा लगने लगा. अगर किसी से मिलने की आस में चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाए, तो शायद यही प्यार है, जिसमें कोई वायदा नहीं, कोई कमिटमेंट नहीं.

इम्तिहान ख़त्म हुए, परिणाम भी अच्छे आए तो निश्‍चय किया गया कि एक छोटी सी पार्टी रखी जाए. उस पार्टी में उसका गाया गाना-
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी...
चाहे कुछ भी हो सवालात न करना उनसे..
मेरे बारे में कोई बात न करना उनसे...

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शायद अपने मन की बात कह दी उसने. हम सबको अलग-अलग जगह नौकरी मिल गई. उसकी इच्छा विदेश जाने की थी, तो वह चला गया. जाते-जाते अपनी एक फोटो न जाने क्या सोच कर दी. उस दिन कितना रोना आया, शायद उतना फिर कभी नहीं आया.
हर साल वह ख़ूबसूरत गिफ्ट्स लेकर आता. फिर हम अपनी-अपनी ज़िंदगी में बिज़ी हो गए. मैंने घर बदल लिया, ऑफिस के मकान से अपने मकान में आ गए. उसके पत्रों का आना धीरे-धीरे कम हो गया था.
कभी-कभी चिट्ठी लिखता तो उसमें अपने काम, घर की तमाम बातें होतीं और मेरा हालचाल. हर हालत में ख़ुश रहने की सलाह भी होती.

बहुत समय बाद बच्चे बड़े हो गए. उसका अरु नाम था. उसका अता-पता खो गया. मेरी बेटी ने फेसबुक के ज़रिए उसे ढूंढ़ निकाला. थोड़ी बहुत बात हुई. जल्दी ही मिलता हूं... उसने वादा किया. फिर कोरोना काल आ गया. पता चला उसको कोरोना हो गया.

एक दिन लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी, तो उसकी मैसेंजर कॉल आया. शायद अस्पताल के आईसीयू में था. तमाम उपकरण लगे थे. बोलने लगा, “देखा अस्पताल में कितना अकेला लगता है.” मुझे लगा कि अभी डॉक्टर आ गए, तो उसे डांटेंगे. मैंने कॉल काट दी.
फेसबुक से मालूम हुआ कि उसकी मृत्यु हो गई. भारी मन से लैपटॉप खोला, तो उसमें तमाम वॉयस मैसेजेस थे- मुझे तुमसे बात करनी है... यानी जाने से पहले उसने मुझे ही पुकारा था और मैं उसकी पुकार का जवाब न दे सकी. बाद में उसकी पत्नी हमारे शहर में ही रहने आ गई, पर अब क्या करूं?

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शायद वही मेरा पहला प्यार था. यादों की अनमोल सौग़ात का ज़िक्र करूं, तो उसकी दी परफ्यूम की बड़ी सी बॉटल आज भी रखी है, पर मैं पहले और अब भी परफ्यूम नहीं लगाती.
- अलका

Photo Courtesy: Freepik

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