Close

कहानी- लकी साड़ी‌ (Short Story- Lucky Saree)

“यह तेरी मां की सबसे प्यारी साड़ी थी. जब भी उसे कुछ नया शुरू करना होता, यही साड़ी पहनती थी. तेरे पापा ने भी उसे पहली बार इसी साड़ी में देखा था. वह कहा करती थी कि यह उसकी लकी साड़ी है.”

मां-पापा के आकस्मिक निधन के बाद मेरी दुनिया जैसे एक पल में बदल गई थी. उस दिन के बाद नानी ने ही मुझे अपनी बांहों में समेट लिया. उन्होंने कभी मुझे मां की कमी महसूस नहीं होने दी. मैं उनकी नातिन कम, सहेली ज़्यादा थी. मेरी हर छोटी-बड़ी बात उन्हें पता होती थी. लेकिन जब मैंने उन्हें हर्षित के बारे में बताया और उससे शादी करने की इच्छा जताई, तो वे चुप हो गईं. उनकी चुप्पी में नाराज़गी नहीं, एक मां जैसी चिंता थी.

“तरुणी बिटिया, मैं बस इतना चाहती हूं कि तेरी ज़िंदगी में फिर कभी दुख का कोई साया न आए.”

उन्होंने एक दिन मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था.

अगले दिन हर्षित अपने माता-पिता के साथ मुझे देखने आने वाला था. नानी ने इस रिश्ते के लिए हां तो कर दी थी, पर उनके चेहरे पर पसरी चिंता मुझे बेचैन कर रही थी. कहीं वे केवल मेरी ख़ुशी के लिए अपनी आशंकाओं को दबा तो नहीं रही थीं? इन्हीं विचारों के साथ मैं रात को सो गई.

सुबह मेरी नींद खुली तो देखा, नानी अपनी पुरानी संदूकची खोले बैठी थीं. उन्होंने बड़े जतन से उसमें से नीले रंग की लिनेन की एक साड़ी निकाली. साड़ी को सहलाते हुए उनकी आंखों में जाने कितनी यादें उतर आईं.

यह भी पढ़ें: बेटी की शादी का ख़र्च बड़ा हो या पढ़ाई का? (Invest More In Your Daughter’s Education Rather Than Her Wedding)

“इसे पहचानती है तरुणी?” उन्होंने मुस्कुराकर पूछा.

मैंने सिर हिलाकर ‘नहीं’ कहा.

“यह तेरी मां की सबसे प्यारी साड़ी थी. जब भी उसे कुछ नया शुरू करना होता, यही साड़ी पहनती थी. तेरे पापा ने भी उसे पहली बार इसी साड़ी में देखा था. वह कहा करती थी कि यह उसकी लकी साड़ी है.”

उन्होंने साड़ी मेरी ओर बढ़ा दी, “आज तू इसे पहन ले.”

मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी. कल तक जो नानी इस रिश्ते को लेकर आशंकित थीं. वे आज इतने स्नेह से मुझे मां की सबसे प्रिय निशानी सौंप रही थीं. मेरे आश्चर्य को पढ़कर वे हल्के से मुस्कुरा उठीं.

“कल रात हर्षित का फोन आया था.” उन्होंने कहा.

“उसने मुझसे बहुत देर तक बात की. उसने सबसे पहले मेरा हाल पूछा, फिर बोला- ‘नानी, मैं तरुणी को बहुत ख़ुश रखूंगा. लेकिन इतना वादा आपसे भी चाहता हूं कि शादी के बाद भी आप उसके जीवन का उतना ही बड़ा हिस्सा बनी रहेंगी, जितनी आज हैं.’ उसकी बातों में इतना अपनापन था कि मन की सारी आशंकाएं दूर हो गईं. अब निश्चिंत हूं, तू सही इंसान के पास जा रही है.”

मेरी आंखें भर आईं. लगा जैसे मां कहीं पास खड़ी मुस्कुरा रही हों.

यह भी पढ़ें: स्पिरिचुअल पैरेंटिंग: आज के मॉडर्न पैरेंट्स ऐसे बना सकते हैं अपने बच्चों को उत्तम संतान (How Modern Parents Can Connect With The Concept Of Spiritual Parenting)

कुछ ही देर में हर्षित अपने घरवालों के साथ आ गया. मां की लकी साड़ी पहने मैं उनके परिवार को भा गई और नीली टी-शर्ट वाला हर्षित नानी को.

उस दिन मैंने जाना, कुछ साड़ियां केवल कपड़े नहीं होतीं, वे पीढ़ियों का स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद अपने आंचल में समेटे होती हैं.

पूर्ति खरे

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES

Photo Courtesy: Freepik

Share this article