जैसे ही तुमने अपने चेहरे पर से मास्क हटाया, तुम्हें देख कर मैं वहीं जड़वत हो गई. मेरी आंखों के कोर गीले हो गए.
ये ज़िंदगी भी ना एक पहेली की तरह है. जब किसी से प्यार करवाती है, तो इस हद तक करवाती है कि उसके बिना जीवन निरर्थक हो जाता है और फिर अचानक राहें जुदा कर देती है. फिर जब हम संभलकर आगे बढ़ जाते हैं, तो फिर अचानक वर्षों बाद हमें फिर से हमारे पहले प्यार से रू-ब-रू करवा देती है. मेरे साथ भी ज़िंदगी ने यही किया.
उस दिन भइया ने फोन पर बताया कि पापा को हार्टअटैक आया है और उनका इमर्जेंसी ऑपरेशन होना है. मैं घबराई हुई हॉस्पिटल पहुंची.
उस दिन भइया ने फोन पर बताया कि पापा को हार्टअटैक आया है और उनका इमर्जेंसी ऑपरेशन होना है. मैं घबराई हुई हॉस्पिटल पहुंची.
मुझे रोते देख भइया ने मुझे आश्वस्त किया और तुम्हारा नाम लेकर कहा कि पापा इज़ इन सेफ हैंड्स, क्योंकि उनका ऑपरेशन देश के सबसे बड़े हार्ट सर्जन कर रहे हैं. भइया के चेहरे पर राहत के भाव थे. मैं तो तुम्हारा नाम सुनकर वहीं जड़वत हो गई. मेरे दिल की धड़कनें कानों तक सुनाई देने लगीं.
ज़िंदगी में तुमसे कभी दोबारा मिलूंगी और वो भी ऐसे, कभी सोचा ही नहीं था. दिल में ख़ुशी थी कि अंततः देश का सबसे बड़ा डॉक्टर बनने का तुम्हारा सपना सच हो गया.
मेरी यादें जो इतने वर्षों से हृदय में ़कैद थीं, वे पंख फड़फड़ा कर बाहर आने को व्याकुल होने लगी थीं. अतीत मुझे खींच कर अपने स्कूल के दिनों में ले गया जब हमारा टकराव प्रतिद्वंदी की तरह किसी ना किसी स्कूल प्रतियोगिता में होता रहता था. तुम नदी की तरह शांत थे और मैं झरने की तरह चंचल. जब कभी मैं हारती, तो तुम बिना कोई प्रतिक्रिया दिए चले जाते. किंतु जब तुम हार जाते, तो मैं सहेलियों के साथ मिलकर तुम्हारा मज़ाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी. तुम फिर भी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए, बस एक मुस्कान देकर चले जाते.
मेरी यादें जो इतने वर्षों से हृदय में ़कैद थीं, वे पंख फड़फड़ा कर बाहर आने को व्याकुल होने लगी थीं. अतीत मुझे खींच कर अपने स्कूल के दिनों में ले गया जब हमारा टकराव प्रतिद्वंदी की तरह किसी ना किसी स्कूल प्रतियोगिता में होता रहता था. तुम नदी की तरह शांत थे और मैं झरने की तरह चंचल. जब कभी मैं हारती, तो तुम बिना कोई प्रतिक्रिया दिए चले जाते. किंतु जब तुम हार जाते, तो मैं सहेलियों के साथ मिलकर तुम्हारा मज़ाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी. तुम फिर भी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए, बस एक मुस्कान देकर चले जाते.
तुम्हारा ये शांत व्यवहार मेरे अहं को चकनाचूर कर देता था. धीरे-धीरे तुम्हारा निर्मल नदी सा शांत व्यक्तित्व मेरे चंचल झरने को अपनी ओर खींचने लगा. हम अच्छे दोस्त बन गए. फिर कब हमारी दोस्ती ने प्यार का रूप ले लिया, पता ही नहीं चला.
तुम अक्सर अपने सपने को लेकर कहते, “सुमी, मेरा सपना है कि मैं देश का सबसे बड़ा हार्ट सर्जन बनूं और देश की सेवा करूं. परंतु मन में एक डर भी है सुमी… मेरे सपने की मंज़िल बहुत दूर है और तब तक तुम्हारे घरवाले शायद इंतज़ार ना करें और हम… लेकिन एक बात तो पक्की है कि मेरी ज़िंदगी में, मेरे हृदय में तुम्हारे अतिरिक्त कोई और नहीं आएगा. कोई भी नहीं.”
तुम अक्सर अपने सपने को लेकर कहते, “सुमी, मेरा सपना है कि मैं देश का सबसे बड़ा हार्ट सर्जन बनूं और देश की सेवा करूं. परंतु मन में एक डर भी है सुमी… मेरे सपने की मंज़िल बहुत दूर है और तब तक तुम्हारे घरवाले शायद इंतज़ार ना करें और हम… लेकिन एक बात तो पक्की है कि मेरी ज़िंदगी में, मेरे हृदय में तुम्हारे अतिरिक्त कोई और नहीं आएगा. कोई भी नहीं.”
तुम्हारी बात सुनकर मेरी आंखें झलक जातीं. मैं अच्छी तरह जानती थी कि तुम्हारा डर निरर्थक नहीं था.
उस दिन स्कूल का अंतिम दिन था और साथ ही हमारी अंतिम मुलाक़ात, क्योंकि इसके बाद तुम अपना सपना पूरा करने के लिए अपनी राह चले गए और मैं अपनी.
आज वर्तमान में इतने वर्षों बाद तुम्हारा नाम सुना. अपने चेतन मन में कुछ सोच-समझ पाती, तभी ऑपरेशन थिएटर की बत्ती हरी हो गई और तुम बाहर आए. जैसे ही तुमने अपने चेहरे पर से मास्क हटाया, तुम्हें देख कर मैं वहीं जड़वत हो गई. मेरी आंखों के कोर गीले हो गए. तुमने पापा के सफल ऑपरेशन की जानकारी दी. एक नज़र मेरी तरफ़ देखा और अपने केबिन की तरफ़ चले गए.
उस दिन स्कूल का अंतिम दिन था और साथ ही हमारी अंतिम मुलाक़ात, क्योंकि इसके बाद तुम अपना सपना पूरा करने के लिए अपनी राह चले गए और मैं अपनी.
आज वर्तमान में इतने वर्षों बाद तुम्हारा नाम सुना. अपने चेतन मन में कुछ सोच-समझ पाती, तभी ऑपरेशन थिएटर की बत्ती हरी हो गई और तुम बाहर आए. जैसे ही तुमने अपने चेहरे पर से मास्क हटाया, तुम्हें देख कर मैं वहीं जड़वत हो गई. मेरी आंखों के कोर गीले हो गए. तुमने पापा के सफल ऑपरेशन की जानकारी दी. एक नज़र मेरी तरफ़ देखा और अपने केबिन की तरफ़ चले गए.
उस एक नज़र ने बहुत कुछ कह दिया था. मेरे कदम ख़ुद-ब-ख़ुद तुम्हारे पीछे चले गए. तुम्हें देख कर मेरीए आंखें अधूरे प्यार की कसक में उमड़ गई थीं. नम तो तुम्हारी आंखें भी हो गई थीं.
“तुम्हारे पापा बिल्कुल ठीक हैं…” तुमने कहा.
“तुमने शादी की?” मैंने बात काटते हुए बस इतना पूछा.
“नहीं.”
“क्यों?” मैंने पूछा.
“कहा तो था तुमसे, मेरे हृदय में स़िर्फ तुम ही होगी और कोई नहीं. तुम नहीं तो कोई नहीं…” कहकर तुम चले गए. हमेशा की तरह नदी से शांत से और मैं ज़िंदगी की पहेली में उलझ कर रह गई.
– कीर्ति जैन
“तुम्हारे पापा बिल्कुल ठीक हैं…” तुमने कहा.
“तुमने शादी की?” मैंने बात काटते हुए बस इतना पूछा.
“नहीं.”
“क्यों?” मैंने पूछा.
“कहा तो था तुमसे, मेरे हृदय में स़िर्फ तुम ही होगी और कोई नहीं. तुम नहीं तो कोई नहीं…” कहकर तुम चले गए. हमेशा की तरह नदी से शांत से और मैं ज़िंदगी की पहेली में उलझ कर रह गई.
– कीर्ति जैन

Photo Courtesy: Freepik
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