आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा, यह तो ग्रहों का फेर है! लेकिन क्या वाकई हमारे शरीर के अंग, हमारी इम्युनिटी, हमारा मूड और हमारी बीमारियों का कनेक्शन हमारी ग्रह दशा से होता है?

प्लैनेट ग्रहों का हमारी ज़िंदगी पर कितना असर पड़ता है, इसी से जुड़ी दिलचस्प व रोचक जानकारियां दे रही हैं आचार्य नीलू आहूजा मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली में हर ग्रह, शरीर के किसी न किसी विशेष अंग और भावना का प्रतिनिधित्व करता है. जब वह ग्रह कमज़ोर, पीड़ित या असंतुलित होता है, तो उससे जुड़े अंग या भावनात्मक पक्ष में गड़बड़ी होने लगती है.
मेडिकल एस्ट्रोलॉजी बेहद गहन और जटिल विषय है, जिसे कुंडली देखे बिना पूरी तरह नहीं समझा जा सकता, लेकिन इतना ज़रूर समझा जा सकता है कि कौन-सा ग्रह किस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है और उसे कैसे संतुलित रखा जा सकता है.
सूर्य
आत्मा, ऊर्जा और आत्मविश्वास का स्वामी.
किन अंगों से जुड़ा है: हार्ट, आंखें, स्पाइन, बोन्स, इम्युनिटी.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: हाई या लो ब्लड प्रेशर, दिल से जुड़ी परेशानियां, आंखों की कमज़ोरी, बार-बार थकान, आत्मविश्वास में कमी.
कमज़ोर सूर्य के संकेत: लो एनर्जी, बार-बार बुखार आना, हड्डियों में दर्द, फ़ैसले लेने में झिझक, नेतृत्व क्षमता की कमी.
क्या करें?
– रोज़ सुबह 10-15 मिनट धूप में बैठें.
– तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें.
– आदित्य हृदयम् स्तोत्र या गायत्री मंत्र का नियमित जाप करें.
– गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करें.
– ज्योतिषी के परामर्श से माणिक्य (रूबी) रत्न धारण करें.
– पिता और गुरुजनों का सम्मान करने से सूर्य बलवान बनता है.
चंद्रमा
मन, भावनाओं और हार्मोन का नियंत्रक.
किन अंगों से जुड़ा है: मन-मस्तिष्क, हार्मोन सिस्टम, रक्त, फेफड़े, स्तन.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: एंग्जायटी, डिप्रेशन, अनिद्रा, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस/पीसीओडी.
कमज़ोर चंद्रमा के संकेत: अत्यधिक तनाव, अकारण भय, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, वॉटर रिटेंशन, शरीर में सूजन.
क्या करें?
– चांदी के बर्तन में पानी पीएं. इससे चंद्रमा शांत होता है.
– सोम सोमाय नमः मंत्र का जाप करें.
– नदी, तालाब या समुद्र जैसे जलस्रोतों के पास समय बिताएं. यह मन को स्थिरता देता है.
– सोमवार का व्रत रखें या दूध का दान करें
– नींद का नियमित समय बनाएं. देर रात जागना चंद्रमा को और कमज़ोर करता है.
– विशेषज्ञ की सलाह पर मोती रत्न धारण करें.
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मंगल
साहस, ऊर्जा और रक्त का देवता.
किन अंगों से जुड़ा है: रक्त, मांसपेशियां, सिर, रिप्रोडक्टिव ऑर्गन.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: इंफ्लेमेशन, बुखार, ब्लड प्रेशर, दुर्घटनाएं और चोट, गुस्से पर नियंत्रण न रहना, पाइल्स.
कमज़ोर मंगल के संकेत: शारीरिक कमज़ोरी, यौन दुर्बलता, अकारण भय, आलस्य और काम टालने की आदत.
क्या करें?
– रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें.
– नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें. यह मंगल को मजबूत करता है.
– मसूर की लाल दाल का दान करें.
– शराब से दूर रहें और क्रोध से बचें.
– मंगलवार का व्रत रखें.
– मूंगा (कोरल) धारण करें.
बुध
तर्क, संवाद और तंत्रिका तंत्र का स्वामी.
किन अंगों से जुड़ा है: त्वचा, नर्वस सिस्टम, गला, आंत.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी, आईबीएस (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम), हकलाना या बोलने में दिक्कत.
कमज़ोर बुध के संकेत: मानसिक तनाव, पाचन संबंधी गड़बड़ी, घबराहट, निर्णय लेने में असमर्थता.
क्या करें?
– विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
– गायों को हरा चारा खिलाएं.
– रोज़ डायरी लिखने की आदत डालें. यह मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है.
– हरी सब्ज़ियों का दान करें.
– झूठ और गॉसिप से बचें. यह बुध को कमज़ोर करता है.
– ज्योतिषीय सलाह पर पन्ना (एमराल्ड) रत्न धारण करें.
गुरु
ज्ञान, स्वास्थ्य और समृद्धि के दाता.
किन अंगों से जुड़ा है: लिवर, पैंक्रियाज़, ओबेसिटी, ग्रोथ हार्मोन.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: डायबिटीज़, फैटी लिवर, मोटापा, कमज़ोर इम्युन सिस्टम. कमज़ोर बृहस्पति के संकेत: बुद्धि की मंदता, पाचन संबंधी समस्याएं, बच्चों में विकास रुकना.
क्या करें?
– गुरुवार का व्रत रखें.
– हल्दी और पीले वस्त्रों का दान करें.
– गुरु मंत्र (ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः) का जाप करें. – छात्रों को पढ़ाएं या उनकी मदद करें.
– शिक्षकों और गुरुजनों का सम्मान करें.
– पुखराज (येलो सफायर) रत्न पहनें.
शुक्र
सौंदर्य, प्रेम और प्रजनन क्षमता का ग्रह.
किन अंगों से जुड़ा है: रीप्रोडक्टिव ऑर्गन्स, किडनी, चेहरा, शुगर बैलेंस.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: पीसीओएस, इंफर्टिलिटी, यूटीआई, शुगर संबंधी समस्याएं, स्किन प्रॉब्लम्स.
कमज़ोर शुक्र के संकेत: कामेच्छा में कमी, रिश्तों में तनाव, चेहरे की रौनक चली जाना.
क्या करें?
– लक्ष्मी मंत्र का जाप करें.
– साफ़-सुथरे और अच्छी क्वालिटी के कपड़े पहनें.
– सफ़ेद मिठाई का दान करें.
– शयनकक्ष को हमेशा साफ़ और सुव्यवस्थित रखें.
– महिलाओं का सम्मान करना शुक्र को मज़बूत करता है.
– डायमंड या ओपल रत्न धारण करें.
शनि
अनुशासन, सहनशक्ति और पुराने रोगों का कारक.
किन अंगों से जुड़ा है: घुटने, बोन्स, जॉइन्ट्स, नर्वस सिस्टम.
क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं: आर्थराइटिस, बैकपैन, क्रॉनिक डिसीज़, डिप्रेशन.
कमज़ोर शनि के संकेत: दर्द, अकारण भय, लंबे समय तक चलनेवाली बीमारी.
क्या करें?
– गरीबों, बुज़ुर्गों और ज़रूरतमंदों की सेवा करें.
– हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें.
– शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं.
– शनिवार को काले तिल, सरसों के तेल का दान करें.
– नियमित और अनुशासित दिनचर्या का पालन करें.
नोटः ध्यान रहे, यह लेख पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. कोई भी हेल्थ प्रॉब्लम होने पर डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.
– श्रेया तिवारी

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