12 मार्च 1993 का वो मनहूस दिन कोई नहीं भूल सकता जब मुंबई में हुए सिलसिलेवार कई बम धमाके (Mumbai Bomb Blast) हुए थे, जिसमें कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी. इस केस में संजय दत्त (Sanjay Dutt) को भी ‘टाडा’ कोर्ट से सज़ा सुनाई गई थी. वो अवैध हथियार रखने और फिर उन्हें नष्ट करने के दोषी पाए गए थे. संजय की कहानी 23 साल लंबी चली. इस कहानी के कई अनसुने किस्से भी हैं, जिसे हाल ही में मुम्बई बम ब्लास्ट के वकीलों में से एक एडवोकेट फरहाना शाह (Advocate Farhana Shah) ने मेरी सहेली (Meri Saheli) के साथ शेयर किया.

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एडवोकेट फरहाना शाह हाल ही में मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में पहुंची थीं, जहां उन्होंने संजय दत्त से जुड़ी कुछ खास बातें (untold stories of Mumbai Bomb Blast) शेयर कीं. उन्होंने बताया कि कस्टडी में होने के बावजूद संजय दत्त का बेहवीयर कैसा होता था, जेल में उनसे मिलने कौन कौन आते थे, बेल रिजेक्ट होने पर संजय का क्या रिएक्शन होता था.

मुंबई बम ब्लास्ट के बारे में बताते हुए एडवोकेट फरहाना शाह ने बताया कि इस केस में लगभग 200 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से कई तो गरीब मासूम भी थे. जिन्हें उनकी मजदूरी, जो 300 रुपए से 500-1000 तक थी के बदले सिर्फ सामान एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने को कहा गया था, जबकि इन्हें पता भी नहीं था कि उन बॉक्सेस में है क्या.

एडवोकेट ने बताया कि संजय (Sanjay Dutt) का केस लेकर उनके पास उनके पापा सुनील दत्त (Sunil Dutt) आए थे. “वो शुरू से ही इस केस में बहुत कोऑपरेटिव थे. जब ये ब्लास्ट हुआ तो संजय दत्त मॉरिशस में शूटिंग कर रहे थे. जब वो लौटे तो उन्हें एयरपोर्ट से ही अरेस्ट कर लिया गया था और इसमें सुनील अंकल ने खुद ही पुलिस की मदद की थी.”

फरहाना शाह ने बताया कि संजय दत्त से जेल में मिलने कौन कौन आता था. “सबसे ज़्यादा तो सुनील दत्त अंकल ही आते थे उनसे मिलने. इसके अलावा रिया पिल्लई, जो उस समय उनकी वाइफ थीं, वो भी उनसे रेगुलर मिलने आती थीं. हां उनकी बहनें कभी कभार ही आती थीं संजय से मिलने.”

संजय दत्त की तारीफ करते हुए वो बोलीं, “एक बात के लिए संजय दत्त की तारीफ करनी होगी कि वो कस्टडी में होने के बावजूद सबकी बहुत इज़्ज़त करते थे. मुझे हमेशा फरहाना जी कहकर ही पुकारते थे. इतना ही नहीं, वो स्मोक तो करते ही थे, लेकिन मुझे देखते ही सिगरेट छिपा देते थे. वो बहुत नेक इंसान भी थे. कई गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद भी कर देते थे. एक लड़की की तो शादी में भी उन्होंने पैसों से मदद की थी.”

हालांकि बेल रिजेक्ट हो जाने पर वो दुखी हो जाया करते थे. कुछेक बार उन्हें रोते हुए भी एडवोकेट ने देखा है. उन्होंने बताया कि संजय को बम ब्लास्ट के बारे में कुछ भी नहीं पता था. उन्होंने कहा कि उस समय आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए एक्टर के पास एके-56 राइफल थी और वह हथियारों का दीवाना था, जिसके कारण उन्होंने ये हथियार खरीदे थे.
