मेनोपॉज़वाली महिलाओं के लिए ज़रूरी...

मेनोपॉज़वाली महिलाओं के लिए ज़रूरी पोषकयुक्त फूड (Best Nutritious Foods for Menopausal Women)

महिलाओं में मासिक धर्म यानी पीरियड्स जब बंद हो जाते हैं, तो इस स्थिति को मेडिकल टर्म में मेनोपॉज़ यानी रजोनिवृत्ति कहा जाता है. इस स्टेज पर, मासिक धर्म पूरी तरह से बंद होने से पहले, आमतौर पर न के बराबर होता है या कुछ महीनों या वर्षों में एक बार होता है. मेनोपॉज़ आमतौर पर 45 और 55 की उम्र के बीच होता है, लेकिन यह इससे पहले की उम्र में भी हो सकता है. मेनोपॉज़ के बाद शरीर में गर्मी महसूस होना, रात को पसीना आना, अनिद्रा, मूड में अचानक से बदलाव होना, वेजाइनल ड्राइनेस, थकान जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.
स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम करने से महिलाएं न सिर्फ़ बेहतर महसूस कर सकती हैं, बल्कि लंबी अवधि में ये उनके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मददगार साबित हो सकते हैं. मेनोपॉज़ से महिलाओं को कुछ अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, जिनके बारे में महिलाओं को जानना ज़रूरी है. इनमें से कई सही मेडिकल केयर के साथ ठीक हो जाते हैं. यहां कुछ लक्षण दिए गए हैं, जिन पर मेनोपॉज़वाली महिलाओं को ध्यान देना चाहिए. इस संदर्भ में वीटाबायोटिक्स लिमिटेड के फिटनेस और न्यूट्रीशन एक्सपर्ट व वीपी रोहित शेलातकर महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

अल्प अवधि के लिए

● मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शराब, उच्च कैलोरीवाले खाद्य पदार्थ और फ़िज़ी ड्रिंक्स के सेवन से परहेज़ करें. ये मेनोपॉज़ के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं.

● सोया उत्पादों का सेवन मेनोपॉज़ के लक्षणों में मददगार हो सकते हैं, क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवोन्स नामक एक यौगिक होता है, जो एस्ट्रोजन के एक्शंस की नकल करता है.


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लंबे समय के लिए

● लंबे समय में मेनोपॉज़ के बार-बार आनेवाले लक्षण ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय संबंधी समस्याओं की वजह बन सकते हैं.

● अच्छी नींद के साथ भरपूर आराम करना बहुत ज़रूरी है.

● केगेल एक्सरसाइज़ पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं, जो यूरिनरी/बॉविल इनकॉन्टीनेन्स को रोकने या कम करने में मदद करते हैं.

● मेनोपॉज चिंता की वजह बन सकता है. मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ शरीर और दिमाग़ को आराम देने में मददगार हो सकते हैं.

● मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट से हड्डियों को नुक़सान हो सकता है, क्योंकि महिलाओं में हड्डियों की सुरक्षा के लिए हार्मोन महत्वपूर्ण है. इस नुक़सान की भरपाई के लिए मेनोपॉज़वाली महिला को ऐसे आहार लेने चाहिए, जो हड्डियों को मज़बूत बनाने के साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस को रोकते हैं. उन्हें कैल्शियम, विटामिन डी और मैग्नीशियम से भरपूर भोज्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए.

इन खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करें

बेरीज: ये प्राकृतिक एंटी-इंफ्लामेटरी पावरहाउस हैं. बेरीज मस्तिष्क को हेल्दी बनाते हैं, ब्लड प्रेशर को कम करते हैं और दिल की सेहत के लिए भी अच्छे होते हैं. मेनोपॉज़ के दौरान ख़त्म हो जानेवाले एस्ट्रोजन के कार्डियो प्रोटेक्टिव बेनीफिट्स के साथ दिल को मज़बूत बनाने में बेरीज बहुत लाभकारी है. बेरीज एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं, जो तनाव से निपटने में मदद करते हैं. मेनोपॉजवाली महिलाओं की एक आम बीमारी, अनिद्रा को दूर करने में भी मददगार होते हैं.

सैमेन फिश: विटामिन डी, ओमेगा -3 और अन्य फैटी एसिड का एक भरपूर स्रोत, सैमेन रक्तचाप को कम करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मददगार होती है. अनेक शोधों से पता चला है कि चिंता, अवसाद को दूर करने और मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संभावित रूप से मदद करने में ओमेगा -3 फैटी एसिड बहुत फ़ायदेमंद है. शाकाहारी महिलाएं विकल्प के तौर पर ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स ले सकती हैं.

फलियां: चने, काली बीन्स और राजमा जैसी फलियां ब्लड शुगर को कम करने और इंसुलिन सेंस्टिविटी को बढ़ाने में मददगार हैं. कैल्शियम और विटामिन डी प्रदान करने के अलावा, फलियां हड्डियों के घनत्व के नुक़सान को कम करने में भी मददगार होती हैं.

साबुत अनाज: साबुत अनाज, मेनोपॉज़वाली महिलाओं के स्वस्थ आहार का हिस्सा होना चाहिए. बकव्हीट और क्विनोआ जैसे साबुत अनाज में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी और मैग्नीशियम होता है. ये अनाज भी ग्लूटेन-फ्री होने के साथ ही अधिकांश पारंपरिक अनाज की तुलना में अधिक पोषण से भरपूर होते हैं. उनकी फाइबर और प्रोटीन कंटेंट सैटिटी फैक्टर में मददगार होते हैं यानी यह लंबे समय तक ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद करता है.

दिल की सेहत सुधारें

● सैचुरेटेड फैट कम करें. इन्हें अनसैचुरेटेड फैट से रिप्लेस करें. उदाहरण के लिए खाना बनाते समय मक्खन की बजाय जैतून के तेल का इस्तेमाल करें.

● यथासंभव हाई फाइबर और साबुत अनाजवाले खाद्य पदार्थों, जैसे- होलव्हीट पास्ता, होलग्रेन ब्रेकफास्ट सीरियल्स और दालों (जैसे लेंटिल्स और बीन्स) का सेवन करें. फल और सब्ज़ियां खाएं, क्योंकि इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है.

● अल्कोहल का सेवन कम करें और धूम्रपान ना करें.


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Photo Courtesy: Freepik

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