
हर किरदार को अपना बना लेनी वाली शबाना आज़मी हो गई हैं 67 साल की. अब भी शाबाना फिल्मों में ऐक्टिव हैं. फिल्मों के अलावा सोशल वर्क में भी वो बिज़ी रहती हैं. 18 सितंबर 1950 को शायर व गीतकार कैफ़ी आज़मी और थिएटर अभिनेत्री शौकत आज़मी के घर के घर जन्मी शबाना आज़मी ने जब जया बच्चन की फिल्म सुमन देखी, उन्होंने तब तय कर लिया था कि उन्हें अभिनेत्री बनना है. हालांकि वो थिएटर्स करती थीं. कॉलेज में उन्होंने अपने सीनियर फारुख शेख के साथ मिलकर हिंदी प्ले के लिए मंच भी बनवाया था. कॉलेज की तरफ से उन्हें इसके लिए पैसे नहीं मिलते थे, फिर भी ऐक्टिंग के प्रति शबाना की दिवानगी ने इस मंच को जीवित रखा और उन्होंने और उनके दोस्तों ने मिलकर पैसे लगाए. एफटीआईआई में उन्होंने एडमिशन लिया और उन्हें वहां बेस्ट स्टूडेंट की स्कॉलरशिप भी मिल गई.
शबाना को उनकी पहली ही फिल्म अंकुर के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 1983 से लेकर 1985 तक उन्होंने लगातार फिल्म अर्थ, कंधार और पार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल अवॉर्ड मिला. साल 1999 में फिल्म गॉडमदर के लिए उन्हें 5वां नेशनल अवॉर्ड मिला.
निशांत, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टन जी, अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं जैसी लगभग 120 हिंदी और बंगाली फिल्मों में बेहतरीन अभिनय करने वाली शबाना आज़मी को पद्मश्री अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है. फिल्म नीरजा में भी उनके अभिनय की सराहना हुई थी.
मेरी सहेली की ओर से शबाना आज़मी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.
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