भाषा विवाद पर कमल हासन ने दिया ब...

भाषा विवाद पर कमल हासन ने दिया बड़ा बयान, बोले- हमारा राष्ट्रगान एक, हमारा सिनेमा भी एक है (Kamal Haasan’s big statement on the language controversy, says ‘Our national anthem is one, our cinema is also one’)

पिछले काफी समय से साउथ फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड के बीच हिंदी भाषा (Hindi vs regional language) को लेकर बहस छिड़ी हुई है. साउथ फिल्मों की ज़बरदस्त कामयाबी और हिंदी फिल्मों के एक के बाद एक बॉक्स ऑफिस पर सफलता ने इस मुद्दे को सोशल पर भी बहस का मुद्दा बना दिया है. अब तक एंटरटेनमेंट वर्ल्ड के कई स्टार्स और सेलेब्स इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं और अब कमल हासन (Kamal Hasan) ने भाषा विवाद पर बड़ा बयान दिया है और कहा है कि हमारा सिनेमा एक ये और इसे भाषा के नाम पर कोई बांट नहीं सकता.

हमारा राष्ट्रगान एक भी है, हमारा सिनेमा भी एक है

कमल हासन अपनी फिल्म ‘विक्रम’ (Vikram Hitlist) के प्रमोशन के दौरान मीडिया से रूबरू थे. इस दौरान उनसे भाषा विवाद सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “फ़िल्में दुनिया की भाषा बोलती हैं. सिनेमा की अपनी भाषा है. हमारा देश विविधताओं का देश है. कुछ मुद्दों को लेकर हमारी सोच अलग हो सकती है. लेकिन इसके बावजूद हमारे बीच कमाल की एकता है. हम भले ही एक भाषा न बोलते हों, पर अपना राष्ट्रगान (national anthem) हम सब गर्व से गाते हैं. तमिलनाडु के लोगों को बंगाली नहीं आती, लेकिन वे भी तो राष्ट्रगान गाते हैं और शान से गाते हैं. तो जैसे हमारा राष्ट्रगान एक है, वैसे ही हमारा सिनेमा एक है.”

हमने ‘मुग़ले आज़म’ और ‘शोले’ फ़िल्में देखकर बड़ी फ़िल्में बनाना सीखा

कमल हासन ने हिंदी फिल्मों की तारीफ करते हुए कहा, “हमने ‘मुगल ए आजम’ और ‘शोले’ जैसी फिल्में देखकर बड़ी फ़िल्में बनाना सीखा. पहले तो हम ऐसी फिल्में बनाने की सोचते भी नहीं थे. हमें लगता था कि हम ऐसी फिल्में कैसे बना सकते हैं. ये इतने बड़े स्केल की फ़िल्में थीं कि तमिल और मलयायम इस तरह की फ़िल्में बनाने की एफोर्ड ही कर सकते थे. लोग कहते हैं कि साउथ की फिल्में सफल हो रही हैं, लेकिन मुझे लगता है कि ये हॉलीवुड सिनेमा के मुकाबले एक भारतीय फिल्म कामयाब हो रही हैं.

सिनेमा की अपनी खुद की भाषा होती है बाकी उसकी कोई भाषा नहीं

कमल हासन ने कहा, “भाषा के नाम पर पॉलिटिक्स होती रहेगी, लेकिन हमारे आर्टिस्ट और स्पोर्ट्समेन इस पॉलिटिक्स के झांसे में नहीं आएंगे. सिनेमाघर ही ऐसी जगह हैं जहां आप इस बात की परवाह नहीं करते कि आपकी बगल में बैठा इंसान किस जाति या धर्म का है. आप वहां एंटरटेनमेंट के लिए जाते हैं. हमारा देश भी ऐसा ही होना चाहिए. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) की मिसाल ले लीजिये. तमिलियन के लिए सचिन हीरो हैं. उन लोगों को न हिंदी आती है न मराठी. वो सिर्फ एक मराठी वर्ड जानते हैं -सचिन तेंदुलकर. हमें ये बात समझनी चाहिए और एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए. अगर आपको कोई फिल्म अच्छी लगती है तो भाषा पर मत जाइए. उसकी तारीफ कीजिए. सिनेमा की अपनी खुद की भाषा होती है बाकी उसकी कोई भाषा नहीं होती.”

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