निधन के बाद पुनीत राजकुमार दे गए...

निधन के बाद पुनीत राजकुमार दे गए चार लोगों को नई जिंदगी, चार लोगों की आंखें कर गए रोशन(Kannada actor Puneeth Rajkumar eye donation gives sight to four blind people)

कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार पुनीत राजकुमार ने इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है. 29 अक्तूबर को हार्ट अटैक की वजह से एक्टर का निधन हो गया था. पुनीत के निधन पर फैंस और सेलेब्स ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया था. पुनीत ने सोसाइटी और लोगों के लिए जीते जी तो कई अच्छे काम किए ही, जाते-जाते भी उन्होंने कुछ ऐसा काम कर दिया है कि सभी उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं और उन्हें हमेशा इस नेक काम के लिए याद किया जाएगा.

Puneeth Rajkumar

जी हां, जाते जाते 4 अंधेरी जिंदगियों को रोशन कर गए हैं पुनीत राजकुमार. पुनीत ने भले ही आंखें मूद ली हों, लेकिन जाते-जाते वो चार लोगों की ज़िंदगी में उजाला कर गए हैं. जी हां, पुनीत ने जीते जी ही अपनी आंखे डोनेट कर दी थीं और उनके निधन के बाद सफलता पूर्वक आंखें ट्रांसप्लांट कर दी गई हैं, वो एक दो नहीं, बल्कि 4 लोगों को.

Puneeth Rajkumar

29 अक्टूबर को एक्टर के निधन के कुछ घँटों बाद ही ये न्यूज़ आई थी कि एक्टर की आंखें डोनेट करने के लिए निकाल ली गई हैं. दरअसल पुनीत के पिता डॉ राजकुमार ने सालों पहले ही अपने पूरे परिवार की आंखें डोनेट करने का फैसला कर लिया था. 2006 में राजकुमार के निधन के बाद भी उनकी आंखें डोनेट कर दी गई थीं और जब पुनीत के निधन के बाद भी ये खबर आई कि उनकी आंखें डोनेट कर दी गई हैं, तो उनके प्रति उनके फैंस का प्यार और बढ़ गया और फैंस इस न्यूज़ से काफी इमोशनल भी हो गए थे.

Puneeth Rajkumar

और अब पता चला है कि पुनीत की आंखें चार लोगों को ट्रांसप्लांट कर दी गई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक्टर की आंखों से तीन पुरुष और एक महिला की आंखों को रोशनी मिली है. इन सभी की उम्र 20-30 साल के बीच है और ये सभी 6 महीने से वेटिंग लिस्ट में थे. लेकिन आखिरकार पुनीत की वजह से उनकी ज़िंदगी में रोशनी लौट आई है और अब वो एक्टर की आंखों से दुनिया देख सकेंगे.

Puneeth Rajkumar

जाते जाते पुनीत ऐसा काम कर गए हैं कि हर कोई उनके इस नेक काम की तारीफ करते नहीं थक रहा है. बता दें कि पुनीत पूरे जीवनभर सोशल वर्क और नेक कामों में लगे रहे. वे हमेशा ज़रुरतमंद लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे. उनके 26 अनाथालय, 46 फ्री स्कूल, 16 गौशाला के साथ ही उन्होंने 1800 बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा भी उठाया था. सच कहें तो पुनीत का पूरा जीवन ही मिसाल था और निधन के बाद भी वो लोगों के लिए मिसाल बन गए.

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