- मैंने पिछले काफ़ी सालों से बहुत काम किया, पर अब मैं अपने बच्चों (अनायरा व त्रिशान) के लिए कुछ अच्छा और अलग करना चाह रहा हूं, ताकि भविष्य में वे मुझ पर प्राउड फील कर सकें.

- फ़िलहाल मेरा बायोपिक बने, ऐसा कोई इरादा नहीं है. ज़िंदगी मेरी अभी ख़त्म नहीं हुई है. मैं ज़िंदा हूं और लाइफ को भरपूर जी रहा हूं.
- शुरू में सिंगर बनने की बड़ी तमन्ना थी, लेकिन क़िस्मत ने कॉमेडियन फिर अभिनेता बना दिया. देखते हैं अब आगे और क्या-क्या होता है.
यह भी पढ़ें: भारती सिंह- एक बेटी की चाह अब भी है… (Bharti Singh- Ek beti ki chah ab bhi hai…)
- मेरी ज़िंदगी में एक ऐसा भी दौर आया था जब मैं पूरी तरह डिप्रेशन से गुज़र रहा था. उस समय मैंने कई ग़लतियां भी कीं. परंतु अब पूरी तरह से संभल गया हूं.
- मुंबई पुलिस जैसी सिक्योरिटी मुझे और कहीं देखने को नहीं मिलती. मैं ख़ुद को अपने देश में पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करता हूं. कनाडा में मेरे कैप्स कैफे पर हुए फायरिंग के लिए कह सकता हूं कि वहां की पुलिस व रूल्स के पास शायद उतने अधिकार नहीं हैं कि वे इस तरह की हरकतों को नियंत्रित कर सकें.

- ‘फिरंगी’ फिल्म के समय मैंने ख़ुद को बेहद फिट महसूस किया था. तभी मैंने ठान लिया था कि फिल्म मिले या न मिले, परंतु मैं ख़ुद को हमेशा फिट रखूंगा.
- फिल्मों व टीवी के काम में मैंने एक बहुत बड़ा अंतर महसूस किया है. जब आप छोटे पर्दे पर काम करते हो, तो बहुत आलसी हो जाते हो. यहां पर अधिकतर बैठे-बैठे शोज़ करने हैं. बस, दिमाग़ के अलावा और कुछ अधिक काम नहीं करना पड़ता. ऐसे में मोटे-पतले होने से भी कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता.
यह भी पढ़ें: नीना गुप्ता- पुरुषों की मानसिकता कभी नहीं बदली… (Neena Gupta- Purushon ki mansikta kabhi nahi badli…)
- जब मैंने कॉमेडी के रिएलिटी शो में दस लाख रुपए जीते थे तब बेहद इमोशनल हो गया था, दिल से बस एक ही बात निकली कि काश! पिताजी ये देखने के लिए मेरे पास होते, साथ होते...

- कॉलेज के दिनों में मैं अपने दोस्तों से अक्सर कहा करता था कि गिन्नी (पत्नी) वही लड़की है, जिससे मैं शादी करूंगा. वाकई में उससे शादी करने के बाद ही मैं न केवल मुश्किलों से उबर पाया, बल्कि मेरी ज़िंदगी भी ख़ुशगवार बन गई.

- 'दादी की शादी' सभी का भरपूर मनोरंजन करेगी. इस फिल्म को करते हुए हमने ख़ूब एंजॉय किया.
- ऊषा गुप्ता
Photo Courtesy: Social Media
