- आज भी लड़कों को वर्जिन लड़की की ही ख़्वाहिश रहती है. आमतौर पर पुरुष मैरिज के समय यही देखते हैं. साथ ही ऐसी दुल्हन चाहते हैं, जो परिवार के साथ एडजस्ट कर सके. यह बरसों से चलता आ रहा है, जो आज भी नहीं बदला.
- पुरुषों की मानसिकता कभी नहीं बदली. उनका जीवनसाथी के रूप में वर्जिन लड़की ही चाहना अजीब सोच लगती है, जो मेरी समझ से परे है.

- यदि अपने देश की बात करें, तो आज भी हम उतना नहीं खुले हैं जितना प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. बहुत कम महिलाएं हैं, जो हर मुद्दे पर खुलकर बात कर पाती हैं. बदलाव व ओपन होने की बातें लिखने भर की हैं. आज भी बहुएं सिर पर पल्लू रख सुबह-सवेरे ससुर के पैर छूती हैं.
- मैंने अपनी ज़िंदगी में ऐसा बहुत कुछ देखा है, जो कथनी और करनी में होने वाले अंतर को दर्शाता है. हमारे रिश्तेदार में एक लड़की की शादी मुंबई में हुई थी, वो साईं बाबा को मानती थी और अपने कमरे में उनकी तस्वीर रखा था, जो उसकी सास को पसंद नहीं आई और उन्होंने अपने गुरु की फोटो रखने को कहा. इसी तरह मेरी भांजी को उसकी सास बेड के साइड टेबल पर फैमिली फोटो लगाने से मना करती थी. मुझे लगता है, स्त्रियों की सोच में परिवर्तन आने में बहुत समय लगेगा.
- स्त्रियों को ससुराल में पितृसत्ता के साथ रूढ़ीवादिता का शिकार होना पड़ता है. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि स्त्रियों को अपनी छोटी-छोटी ख़्वाहिशों को पूरा करने तक की स्वतंत्रता नहीं रहती.
- मैं मानती हूं कि सिंगल मदर बनने का मेरा निर्णय सही था, परंतु मैं दूसरों को इसकी सलाह कभी नहीं दूंगी
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- मैंने पचास साल की उम्र में शादी इसलिए की कि इसकी ज़रूरत महूसस की थी. मैंने अपनी कई ग़लतियों यह भी सीखा कि समाज में रहते हुए हमें कुछ नियमों को मानना ही पड़ता है. पहले जब मैं कहीं भी जाती थी, तो मुझे अजीबोगरीब नज़रों से देखते थे लोग, परंतु शादीशुदा होते ही बहुत कुछ संभल गया.

- 'वध २' का अनुभव लाजवाब रहा. सस्पेंस से भरपूर कहानी रोमांच से भर देगी.
- ऊषा गुप्ता
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