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काव्य- तुम्हारी याद (Kavay- Tumahari Yaad)

जब भी उदास होती हूं

याद आती है वह कोठी

छज्जे पर चिड़ियों का चहकना

भोर की बेला में कोयल की कू-कू

बौराए आम की गंध का बहकना

आंगन में तुलसी की भीनी सी ख़ुशबू

नीम को छूती छत की मुंडेर

खलिहान में गंजे हुए गन्नों के ढेर

वो आंखों में आखें

वो हाथों में हाथ

कितना कुछ याद आता है

इक तुम्हारी याद के साथ...

- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Freepik

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