लस्सी में कई पोषक तत्व होते हैं. यह मांसपेशियों को मज़बूत बनाती है, कैल्शियम से हड्डियों को मज़बूती देती है, प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करती है और पाचन तंत्र को ठंडक देती है. हालांकि जिन लोगों को सर्दी-खांसी की समस्या रहती है, उन्हें लस्सी से बचना चाहिए, अन्यथा इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है.
एक ओर हरियाली घटती जा रही है, तो दूसरी ओर वायु प्रदूषण और वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. परिणामस्वरूप गर्मी का मौसम हर साल और अधिक तीखा होता जा रहा है. तपती लू, असहनीय गर्मी और पसीने से तरबतर कर देने वाले मौसम में शरीर को ठंडक और मन को राहत देने के लिए लोग विभिन्न पेयों का सहारा लेते हैं.
छाछ, कच्चे आम का पना, जलजीरा, गन्ने का रस, नींबू-सत्तू, खस, गुलाब, बेल और पुदीने का शरबत, नारियल पानी, आंवले का रस, तरबूज का जूस और लस्सी... ये सभी गर्मियों के श्रेष्ठ देसी पेय हैं. इन सभी के अपने-अपने स्वास्थ्य लाभ हैं, लेकिन इनका मुख्य लाभ है शरीर को हाइड्रेट रखना, ठंडक प्रदान करना, लू से बचाना, पाचन सुधारना और ऊर्जा देना. ये रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं.
गर्मी में शरीर को ठंडक और ताज़गी की ज़रूरत होती है. ऐसे में तपती दोपहर में ये देसी पेय राहत देते हैं. इस मौसम में कोल्ड ड्रिंक्स, पैक्ड जूस या आर्टिफिशियल पेय और आइसक्रीम का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता. इसकी बजाय देसी पेय या मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी पीना चाहिए. पसीने के कारण शरीर से पानी और मिनरल्स निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का ख़तरा रहता है. इनसे बचने में देसी पेय उपयोगी हैं.
आसानी से और कम समय में बनने वाले इन सुपर ड्रिंक्स में छाछ और लस्सी भी शामिल हैं. दोनों के गुण लगभग समान हैं.
लस्सी के गुण
लस्सी मूल रूप से उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब का पारंपरिक पेय है, जो दही, पानी, मसाले, चीनी या नमक से बनाया जाता है. यह सदियों से पंजाबी संस्कृति का हिस्सा है और आज दुनियाभर में लोकप्रिय है.
* लस्सी शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है. शरीर की गर्मी कम करती है. इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो डिहाइड्रेशन से बचाते हैं.
* रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है. इसमें लैक्टिक एसिड होता है, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
* पाचन शक्ति बढ़ाती है. लस्सी में प्रोबायोटिक्स और लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं और अपच में राहत देते हैं.
* ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है. नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है. इसमें मौजूद पोटैशियम और राइबोफ्लेविन इसे नियंत्रित करने में मदद करते हैं.
* एसिडिटी में लाभकारी है. यह मसालेदार भोजन के प्रभाव को कम करती है और पेट की जलन व एसिडिटी में राहत देती है.
* यह वज़न घटाने में भी सहायक है. लस्सी में कम कैलोरी और फैट होता है. बिना चीनी की लस्सी वज़न कम करने में मददगार है.
* कैल्शियम का अच्छा स्रोत है लस्सी. एक कप लस्सी से लगभग 30 प्रतिशत दैनिक कैल्शियम की पूर्ति होती है, जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है.
* लस्सी बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करती है. लस्सी त्वचा को कसाव देती है. दाग़-धब्बे कम करती है और त्वचा को जवां बनाए रखती है.
लस्सी थकान दूर करती है, तुरंत ऊर्जा देती है. कब्ज़ और गैस की समस्या दूर करती है, हड्डियों और मांसपेशियों के दर्द में राहत देती है, तनाव कम करती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाती है. यह लीवर को भी स्वस्थ रखती है.
इसमें प्रोटीन, विटामिन ए, सी, डी, फोलिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, फाइबर और ज़िंक जैसे पोषक तत्व होते हैं. लस्सी पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर है.
लस्सी दही का ही मीठा या नमकीन रूप है. भारतीय संस्कृति में दही को शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. शुभ अवसरों और यात्रा या परीक्षा से पहले दही-चीनी खाने की परंपरा है. पंचामृत में भी दही का स्थान है.
दही और भगवान कृष्ण का संबंध भी विशेष है. उनकी बाल लीलाओं में दही और माखन का विशेष महत्व है. यही कारण है कि दही आज भी हमारी संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे गुणों से भरपूर दही से बनी लस्सी को गर्मियों का अमृत कहना बिल्कुल उचित है.
- अनिकेत सिंह
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