Close

लव स्टोरी- मेरा महबूब याद आता है… (Love Story- Mera Mahboob Yaad Aata Hai…)

बादलों से कोई कह दो

यूं न टूट के बरसें

ऐसे भीगे से मौसम में

मेरा महबूब याद आता है...

आज इस बात को लगभग दस साल गुज़र चुके हैं, लेकिन आज भी जब आसमान पर काले-काले बादल छाते हैं और अचानक ही बूंदों की पायल बजने लगती है, धरती से सोंधी-सोंधी महक फूट पड़ती है और बिजली रात की स्याही को चीरकर एक पल को हर तरफ़ उजाला बिखेर देती है, वह चुपचाप बिना कहे मेरी यादों में उतर आता है, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह कभी बिन कहे मेरे दिल का मालिक बन बैठा था.

मैं उन दिनों बीए फर्स्ट ईयर में थी. उन्हीं दिनों मम्मी की मौसेरी बहन के इकलौते बेटे रजा की शादी थी. चूंकि भैया के इम्तिहान चल रहे थे और डैडी शहर से बाहर थे इसलिए मम्मी ने मुझे और मेरी छोटी बहन रोमी को भाई के साथ बेंगलुरु भेज दिया.

बेंगलुरु चूंकि हम पहली बार जा रहे थे इसलिए हम बहुत ख़ुश थे. सीमा खाला (मौसी) के घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं. बहुत से मेहमान आए हुए थे. वहीं मेरी उससे मुलाक़ात हुई थी. वह खालू (मौसा) के दोस्त का बेटा था और शादी में शामिल होने के लिए ख़ासकर अमेरिका से यहां आया था.

ज़िंदगी में पहली बार मेरा दिल कुछ अजीब अंदाज़ में धड़कने लगा था. दिल की धड़कनों को कोई नाम नहीं दे पाई थी.

यह भी पढ़ें: लव स्टोरी- गुलाब का  फूल(Love Story- Gulab Ka Phool)

उस शाम बहुत गर्मी थी. मैं रोमी और दो एक मेहमान औरतें छत पर सो रहे थे कि अचानक बूंदा-बांदी होने लगी. आसमान काला हो गया. सब लोग नीचे भागे, लेकिन मैं रह गई. मेरी एक चप्पल नहीं मिल रही थी. अचानक बारिश बहुत तेज हो गई, तभी वह ऊपर आ गया. मैं उसे देखते ही चप्पल-वप्पल सब भूलकर चुपचाप खड़ी रह गई. वह मेरे क़रीब आ गया कितने ही पल हम एक-दूसरे को देखते रहे और भीगते रहे. तभी उसने मेरा भीगा हाथ थामकर आहिस्ता से चूम लिया और कहा, "आई लव यू रूबी, मुझसे शादी करोगी."

मैं सिहर उठी. ख़ुशी के मारे मेरी आंखें बंद हो गईं. वह जाने कब चला गया और मैं शरमाई हुई कितनी देर तक भीगती रही.

वापस पहुंच कर मैंने रोमी के ज़रिए मम्मी से इस बारे में बात की और मम्मी ने डैडी से, लेकिन उस समय मेरी सारी ख़ुशियां, सारी उमंगें दम तोड़ गईं जब डैडी ने कहा कि हमारे यहां खानदान से बाहर शादी करने का बिल्कुल रिवाज़ नहीं है.

मैंने मम्मी से बहुत मिन्नतें की. सारी शर्म भूल कर अपनी मुहब्बत का वास्ता दिया, लेकिन मम्मी ने कहा कि वह मजबूर हैं. डैडी मर जाएंगे, लेकिन खानदान के बाहर शादी की कल्पना भी नहीं कर सकते.

सीमा खाला आईं. उन्होंने बहुत समझाया, लेकिन डैडी ने उनका प्रपोजल स्वीकार नहीं किया. खाला निराश होकर लौट गईं. उन्हीं के ख़त से पता चला कि वह अमेरिका चला गया है कभी न आने के लिए. उसने कहा था कि जिस देश में खानदान मुहब्बत से ज़्यादा अहमियत रखता है उस देश में वह लौटकर कभी नहीं आएगा.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: अधूरे प्रेम की पूरी कहानी (Pahla Affair: Adhure Prem Ki Poori Kahani)

मेरे लिए ज़िंदगी की सारी ख़ुशियां उसी दिन ख़त्म हो गई थीं. अब तो बस जीने का फ़र्ज़ निभाए चली जा रही हूं. मुहब्बत के आगे तो रंग, नस्ल, मज़हब और मुल्क की सरहदें तक कोई मायने नहीं रखती तो ख़ानदान की क्या हैसियत.. लेकिन कुछ भी नहीं हो सका न डैडी समझ सके न हम दोनों फिर कभी मिल सके. लेकिन आज भी जब काली घटा छाती है, आसमान की बूंदें प्यासी धरती पर गिरती हैं, मेरी प्यासी यादों में वह दुश्मन-ए-जां हमेशा की तरह चला आता है और जाने कब मेरी पलकों से दो बूंदें टपक पड़ती हैं.

- रखशिन्दा अख़्तर रिज़वी

Photo Courtesy: Freepik

Share this article