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फिल्म समीक्षाः आदित्य धर के तूफ़ानी निर्देशन में ‘धुरंधर’ रणवीर सिंह का ज़बर्दस्त धमाका… (Movie Review: Dhurandhar)

Movie Review: Dhurandhar

यह आज का हिंदुस्तान है जो दुश्मनों के छेड़ने पर उसे छोड़ेंगे नहीं... यह नया भारत है घर में घुसकर मारेगा... समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विशेषकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस तरह की अभिव्यक्ति देते रहे हैं. इसका काफ़ी प्रभाव दिखा ‘धुरंधर’ के लेखक, निर्माता व निर्देशक आदित्य धर में.

Movie Review: Dhurandhar

भारत में आंतकवादियों द्वारा समय-समय पर किए गए वीभत्स कृत्यों को उन्होंने सिनेमाई अंदाज़ में ग़जब के तांडव के साथ दिखाया है धुरंधर में. टैरेरिस्ट ने कंधार हाइजैक, संंसद पर हमला, मुंबई अटैक द्वारा देश को अनगिनत घाव दिए हैं, जिसका मुकम्मल जवाब देने की कोशिश की गई है इस फिल्म में.

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साल 1999 में हुए भारतीय विमान के अपहरण से जो कहानी शुरू होती है, वो पाकिस्तान के कराची पर ख़त्म होती है, इसके दूसरे पार्ट के शंखनाद के साथ. जी हां, ‘धुरंधर’ का सेकंड पार्ट भी तैयार है, जो 19 मार्च 2026 में रिलीज़ होगा.

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किस तरह भारतीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा आतंकवादियों के अति होने पर एक विशेष प्लान धुरंधर को कार्यन्वित किया जाता है, देखने काबिल है. हिंदुस्तान का यह धुरंधर यानी रणवीर सिंह पाकिस्तान में घुसकर अपने साहस के एक से एक कारनामे को अंजाम देता है. वह दुश्मनों के घर में घुसकर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाता है. कुछ इसी तरह का साहस भरा कार्य भारत ने साल 2016 और 2025 में सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में किया था.

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अभिनेता आर. माधवन देश की आन-बान-शान की ख़ातिर सलाहकार के रूप में अपनी भूमिका बख़ूबी निभाते हैं. उनके ग़जब के गेटअप के साथ फिल्म की शुरुआत होती है. फिल्म चैप्टर वाइस गुज़रती है और सात चैप्टर तक चलती है. हर चैप्टर नया लाजवाब सीन और नए धुंआधार एक्शन से भरपूर है. मूवी में देश पर हुए हमलों की सच्ची घटनाओं को बेहद स्पष्टता व ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया गया है. हरेक हादसों का फिल्माकान भी कुछ इस तरह से किया गया है कि देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

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ख़ून-ख़राबा, एक्शन और दिल दहला देने वाले दृश्य रोमांच के साथ हैरान तो कुछ परेशान भी करते हैं. फिर चाहे वो अक्षय खन्ना द्वारा अपने पिता को मारने वाला दृश्य हो, अर्जुन रामपाल का ख़तरनाक तरी़के से टार्चर करने वाला और कुछ दरिदंगी देख तो रूह कांप जाती है. इन्ही सब वजहों से फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया गया है. वैसे भी परिवार व बच्चों के साथ फिल्म नहीं देख सकते, क्योंकि मारधाड़ के साथ-साथ काफ़ी गाली-गलौज भी है.

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क़रीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म पूरी तरह बांधे रखती है. लेकिन फिर भी संपादक शिवकुमार चाहते तो फिल्म को थोड़ा एडिट कर सकते थे. रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी, सारा अर्जुन, सौम्या टंडन व मानव गोहिल हर किसी ने अपने क़िरदार को बेहतरीन ढंग से निभाया है.

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वैसे शीर्षक भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह सभी पर अकेले ही भारी पड़ते हैं. उनका लुक, एक्शन, बोलती आंखेंे ख़ामोशी से बहुत कुछ कर गुज़रती है. न तो कारवां की तलाश है... न तो हमसफ़र की तलाश है... गाने के साथ उनकी एंट्री भी ज़बर्दस्त रही है. किस तरह अफगानिस्तान के रास्ते वे पाकिस्तान में प्रवेश करते हैं और फिर शुरू होता है धुरंधर का धुरंधरगिरी. वहां के गैंगस्टर की हरकतें, ल्यारी का गैंगवार, राजनीति, बंदूक-शस्त्रों की ख़रीदी-सप्लाई, भारत में नकली नोटों के भेजने के तिकड़म, आईएसआई से जुड़ा आंतकवाद, भारतीय मिशन के साथ हमारा सुनहरा कल बहुत कुछ कह जाता है.

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लोकेशन, सेटअप से लेकर क़िरदारों के गेटअप, गीत-संगीत, बैकग्राउंड स्कोर, संवाद, एक्शन सब कुछ उम्दा हैं. फिल्म की जान इसके स्टंट्स भी हैं, जिसे स्टंट मास्टर्स एजाज गुलाब, सी-यंग ओह, यानिक बेन और रमजान बुुलुत ने बख़ूबी अंज़ाम दिया है. फाइट सीन्स और ख़ास-ख़ास मौक़ों पर पुराने गीतों की जिस तरह से मिक्सिंग की गई है वो बेमिसाल है, जैसे- रंभा हो... हवा हवा... ग़ज़लें आदि. शाश्‍वत सचदेव का संगीत शानदार है. इरशाद कामिल के गीत बढ़िया है. दिलजीत सिंह दोसांझ और शाश्‍वत सचदेव का गाया ईजी-ईजी... को तो गैंगस्टर एंथम तक कहा जाने लगा है. इस पर रैपर हनुमानकाइंड का राज रंजोध के लिखे इस गीत पर अलग ही समां बांध देता है. विकास नौलाख की सिनेमैटोग्राफी काबिल-ए-तारीफ़ है.

‘धुरंधर’ में कुछ पंच लाइन तो दिलचस्प है, जैसे- अगर तुम लोगों के पटाखे ख़त्म हो गए हों तो मैं धमाका शुरू करू... रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है... मुंह तोड़ने के लिए मुट्ठी करना ज़रूरी है... वो घायल है, इसलिए घातक भी है... कभी-कभी धैर्य का टूटना देश के लिए अच्छा हो सकता है... क़िस्मत की सबसे ख़ूबसूरत आदत पता है क्या है, वो व़क्त आने पर बदलती है, हमारा भी वक़्त आएगा... वो (पाकिस्तान) भारत के ख़िलाफ़ नींद में भी सोचे तो उनके ख़्वाब में हम पहले नज़र आने चाहिए... नया भारत है, घर में घुसकर मारेगा... जैसे दमदार डायलॉग सारी वाहवाही लूट ले जाते हैं.

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जियो स्टूडियो व बी62 स्टूडियो के बैनर तले बनी ‘धुरंधर’ रोमांचित करने के साथ-साथ कई बार आक्रोशित व उत्तेजित भी करती है, ख़ासतौर पर भारत पर हुए आंतकी हमलों को लेकर. ज्योति देशपांडे, लोकेश धर व आदित्य धर निर्मित एक्शन-इमोशंस से भरपूर यह स्पाई थ्रिलर फिल्म हमें बहुत कुछ सोचने पर भी मजबूर करती है. यह हमें एहसास कराती है कि भारत के धुरंधर जैसे कई ऐसे सच्चे देशभक्त व ईमानदार सिपाही हैं, जो देश पर कुर्बान होते हैं और जिनके बारे में कोई कुछ जान भी नहीं पाता, तभी तो इन गुमनाम, अनजान नायकों को अननोन हीरो कहा जाता है. हमारी सुरक्षा एजेंसी भी जाने कितने जोख़िम भरे कामों को अंजाम देती है, सच उन सभी अव्यक्त जांबाज़ों को सलाम!

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आदित्य धर को ‘धुरंधर’ की कहानी, रिसर्च, स्टारकास्ट व बजट सब कुछ पूरी करने में क़रीब तीन साल लगे. उन्होंने सेंसर बोर्ड को यह भी साफ़ किया था कि यह मेजर मोहित शर्मा के जीवन से प्रेरित नहीं है, जैसा कि उनके परिवार ने आरोप लगाया था. फिल्म में एक कमी और अधूरापन अखरता है, जब बार-बार रणवीर सिंह के अतीत को दिखाया जाता है, किंतु उसे खुलकर स्पष्ट न करना, पर लगता है शायद इसके दूसरे पार्ट के लिए ऐसा किया गया हो. बहरहाल, यह कहा जा सकता है कि फिल्म के हर विभाग ने इस पर जमकर मेहनत की है, फिर चाहे वो तकनीशियन हो या फिर कोई छोटा क़िरदार निभाता कलाकार.

- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Social Media

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