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फिल्म समीक्षाः मुंज्या- हॉरर कॉमेडी जो डराने के साथ हंसाती भी ख़ूब है… (Movie Review- Munjya)

अक्सर भूत-प्रेत पर आधारित फिल्मों में भयभीत कराने का डोज अधिक होता है, लेकिन दिनेश विजन व अमर कौशिक निर्मित और मराठी फिल्म 'झोंबीवली' फेम आदित्य सरपोतदार निर्देशित ‘मुंज्या’ की प्रस्तुति दोनों में बैलेंस बनाती है. डर, हंसी, दर्द, भावनाएं, रिश्तों का जुड़ाव-टकराव सब कुछ परोसने की कोशिश की गई है दो घंटे तीन मिनट की इस फिल्म में.
प्रमुख भूमिका में बिट्टू, अभय वर्मा ने कमाल का अभिनय किया है. उनकी मासूमियत, शर्मिलापन, भूत-प्रेत को लेकर डर, अपनी दादी, सुहास जोशी के साथ ज़बर्दस्त बॉन्डिंग फिल्म के हर फ्रेम में इमोशनल कर देती है. अभय ने धर्मा प्रोडक्शंस की 'ऐ वतन मेरे वतन' व कान्स फिल्म फेस्टिवल में संदीप सिंह की 'सफ़ेद' में भी काम किया है. इस फिल्म में शो स्टीलर वही हैं.


मां पम्मी के रोल में मोना सिंह भी जब-जब स्क्रीन शेयर करती हैं, अच्छी लगती हैं. उनकी सहजता के साथ पंजाबन अंदाज़ लुभाता है. ख़ासकर अपने देवर से पंगा लेनेवाले सीन्स मज़ेदार हैं.
वर्तमान और फ्लैशबैक से गुज़रती है मुंज्या की कहानी. साल १९५२ में महाराष्ट्र के कोंकण के एक गांव में गोटया नाम के किशोर को अपने से सात साल बड़ी लड़की मुन्नी से जुनून की हद तक प्यार हो जाता है, जबकि उसकी कहीं शादी हो रही है. पर गोटया को यह मंज़ूर नहीं. ऐसे में उसकी मां बेटे को सज़ा देते हुए उसका धार्मिक अनुष्ठान, जनेऊ संस्कार व मुंडन कराती है.
लेकिन प्यार की इंतेहा देखिए कि गोटया अपनी बहन को लेकर चितुक वाड़ी जाता है और वहां पर काला जादू करते हुए प्यार को पाने की ख़ातिर अपनी बहन की ही बलि चढ़ाने की कोशिश करता है, परंतु दुर्भाग्यवश गोटया की मौत हो जाती है.


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कोंकण की लोक कथा अनुसार, यदि किसी की मृत्यु
मुंडन या उपनयन संस्कार कराने के दस दिन के अंदर हो जाती है, तो वो शख़्स मुंजा यानी ब्रह्मराक्षस बन जाता है.
मराठी में उपनयन संस्कार की प्रथा को मुंज कहा जाता है. ऐसे में परिवार व गांव के लोग जिस पीपल के पेड़ के नीचे गोटया तंत्र-मंत्र कर रहा था, वहीं पर उसकी अस्थि डालकर उसकी आत्मा को पेड़ से बांध देते हैं, ताकि वो भटके नहीं उसे मुक्ति मिले, पर ऐसा होता नहीं है.
शुरुआत की ये सभी दृश्य रोचकता उत्पन्न करने के साथ, कोंकण की ख़ूबसूरती को भी बख़ूबी दर्शाते हैं. इसमें सिनमैटोग्राफर ने अपना कमाल भरपूर दिखाया है.
सात दशक बाद तीसरी पीढ़ी में बिट्टू को अक्सर सपने आते हैं, जिसमें उसे जंगल, पेड़, डरावनी चीज़ें बेचैन व परेशान करती रहती हैं, जिसके बारे में वह किसी से कुछ कह भी नहीं पाता.


बिट्टू पुणे में अपनी मां और अज्जी के साथ ख़ुशहाल जीवन बिता रहा है. वो मां, मोना सिंह के पार्लर में उनकी मदद करता है. वहीं विदेश जाकर कॉस्मेटोलॉजी भी करना चाहता है, ताकि मां के पार्लर को और भी आगे बढ़ा सके. लेकिन मां उसे जाने नहीं देना चाहती, पर दादी पोते का भरपूर साथ देती हैं. दादी-पोते के प्यार और आपसी समझ दिल को छूती है.
बेला, शरवरी वाघ बिट्टू की पड़ोसी और उसकी बचपन की जिगरी दोस्त है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब बिट्टू मुंज्या के जाल में फंस जाता है. वह बिट्टू को अपनी अधूरी इच्छा मुन्नी से शादी करवाने के लिए प्रताड़ित करता है. बिट्टू ख़ुद को उसकी चुंगल से बचाता है, तो दूसरी तरफ़ बेला फंस जाती है. अब मुंज्या बेला से शादी करना चाहता है, इसके लिए बिट्टू को परेशान करता है. मज़ेदार बात यह रहती है कि बेला की आजी ही मुन्नी है. बिट्टू अपने दोस्त तरणजोत के साथ कितने पापड़ बेलता है इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए, वे सभी सीन्स मनोरंजन से भरपूर हैं. इसी में बाहुबली फेम कटप्पा, सत्यराज की भूमिका भी दिलचस्प है. फिल्म में बीच-बीच में बेला के अंग्रेज़ बॉयफ्रेंड भी कॉमेडी करते नज़र आते हैं.


क्या बिट्टू इन तिलस्मी जालों से बच पाता है?.. बेला को मुंज्या से बचा पाता है?.. और हां क्या वो अपने एकतरफ़े प्यार का इज़हार बेला से कर पाता है?.. इन सब बातों को जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी. 
मुंजा, जो ब्रह्मराक्षस है की भूमिका किसी कलाकार ने नहीं निभाई है, बल्कि सीजीआई (कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजिनरी) की सहायता से इस क़िरदार को बनाया गया है. जो वाकई में डरता है, तो हंसाता भी ख़ूब है. मुंज्या पहली भारतीय हॉरर फिल्म है, जिसमें CGI कैरेक्टर का इस्तेमाल किया गया है.
वीएफएक्स, विजुअल इफेक्ट्स और बैकग्राउंड स्कोर लाजवाब हैं. अन्य कलाकारों में सुहास जोशी, तरणजोत सिंह, सत्यराज, अजय पुरकर ने भी बढ़िया एक्टिंग की है. गोटया की मां के रूप में छोटे से रोल में श्रुति मराठे प्रभावित करती हैं.


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फिल्म की कहानी पर योगेश चांदेकर व नीरेन भट्ट ने बारीकी से अच्छा काम किया है. सचिन सांघवी का संगीत ठीक है. तरस नी आया तुझको… तेनु ख़बर नहीं… गाने बढ़िया बने हैं.
मैडॉक सुपरनैचुरल यूनिवर्स की स्त्री, भेड़िया और रूही के बाद यह चौथी फिल्म है. मैडॉक फिल्म्स प्रोडक्शन की हॉरर कॉमेडी ड्रामा 'मुंज्या' भी यक़ीनन लोगों को रोमांचित करेगी. शेष फिर…

Photo Courtesy: Social Media

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