मूवी रिव्यूः छिछोरे, मनोरंजन के साथ-साथ संदेश भी (Movie Review Of Chhichhore)

फिल्मः छिछोरे
कलाकार- सुशांत सिंह राजपूत, श्रद्धा कपूर, वरुण शर्मा, तुषार पांडे, नवीन पॉलिशेट्टी, ताहिर भसीन, प्रतीक बब्बर.
निर्देशक- नितेश तिवारी
स्टार्स- 3.5

ये कहानी है इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अनिरुद्ध पाठक, माया और उनके दोस्तों सेक्सा, एसिड, मम्मी, डेरेक और बेवड़ा की. अनिरुद्ध और माया (श्रद्धा कपूर) का एक बेटा है, राघव, जो अपने मां-बाप की तरह इंजीनियरिंग करने का सपना लिए जी रहा है. एंट्रेंस एग्जाम्स में जब राघव का सिलेक्शन नहीं हो पाता, तो वह इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाता और दोस्त की बिल्डिंग से कूदकर जान देने की कोशिश करता है. खुदकशी की कोशिश में उसके दिल-दिमाग पर गहरी चोट लगती है. अनिरुद्ध जब बेटे को हाथों से जाता हुआ देखता है, तो बेटे को बचाने के लिए अपने हॉस्टल डेज के दौर में ले जाता है और उसे लूजर की कहानी सुनाता है. हॉस्टल में माया के प्यार के साथ उसे सेक्सा( वरुण शर्मा), डेरेक (ताहिर राज भसीन), एसिड (नवीन पॉलीशेट्टी), बेवड़ा (सहर्ष शुक्ला), क्रिस क्रॉस( रोहित चौहान), मम्मी (तुषार पांडे) जैसे जिगरी दोस्तों की दोस्ती मिलती है, तो रेजी (प्रतीक बब्बर) जैसे अव्वल स्टूडेंट की राइवलरी. सुशांत और उनके दोस्त इस कहानी के साथ बेटे को ठीक करने की कोशिश करते हैं. इस तरह इस फिल्म की मदद से फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने ‘छिछोरे’ को एक इंस्पिरेशनल फिल्म बनाने की कोशिश की है, और इसमें यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि बच्चों को सिर्फ जीतने ही नहीं, अगर वह हारते हैं तो उसके बाद क्या करना चाहिए वह भी समझाना चाहिए.

Chhichhore

दंगल के डायरेक्टर नितेश तिवारी कितनी बढ़िया फिल्में बनाते हैं, ये हम सभी को पता है. नितेश ने जिस तरह से इस कहानी को सामने रखा है और जो सीख देने की कोशिश है, वो तारीफ के लायक है. निर्देशक ने व्यावसायिक परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों पर किस तरह का बोझ और मानसिक तनाव काम करता है, इसे बेहद खूबसूरती के साथ कहानी में पिरोया है. इस फ़िल्म में वह सब कुछ है, जो आप देखना चाहते हैं. दोस्त है, मस्ती है, प्यार-मोहब्बत है, ज़िंदगी है और साथ ही है ज़िंदगी की जवाबदारी भी.  इसका मतलब ये नहीं है कि इसमें इम्प्रूवमेंट का कोई स्कोप नहीं है. लेकिन कभी-कभी लोगों को लाइट हार्टेड फिल्में देखने की जरूरत भी होती है. फिल्म के गाने भी बढ़िया हैं.

अभिनय की बात करें तो सुशांत सिंह ने अपने किरदार बख़ूबी निभाया है. एक स्मार्ट स्टूडेंट, जो चतुराई से सामने वाले को पागल बनाता है और एक बाप जो अपने बेटे से बहुत प्यार करता है- किरदार के ये दोनों ही पहलु उन्होंने बढ़िया निभाए हैं. इसके अलावा एक्टर वरुण शर्मा, ताहिर राज भसीन, नवीन पॉलीशेट्टी, तुषार पांडे, प्रतीक बब्बर और सहर्ष शुक्ला का काम भी बढ़िया है. श्रद्धा कपूर अपने किरदार में बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

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